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Balrampur News: केजीएमयू से छिना मेडिकल कॉलेज, तैनात होगा प्राचार्य

Thu, 07 Mar 2024 11:53 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर Updated Thu, 07 Mar 2024 11:53 PM IST
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Medical college snatched from KGMU, Principal will be posted
बलरामपुर। जिले में राजकीय मेडिकल कॉलेज के संचालन का अधिकार शासन ने किंग जार्ज मेडिकल विश्वविद्यालय (केजीएमयू) से छीन लिया है। बीते छह साल से इसका संचालन शुरू करने में बरती जा रही लापरवाही मेडिकल विश्वविद्यालय को भारी पड़ी। अब इसका संचालन स्वायत्तशासी संस्थान की तरह चिकित्सा शिक्षा विभाग संभालेगा। इसके लिए जल्दी मेडिकल कॉलेज में प्राचार्य की तैनाती होगी। डीएम अरविंद सिंह ने नए प्राचार्य को तैनात किए जाने का प्रस्ताव भी शासन को भेज दिया है।
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प्रदेश सरकार ने साल 2018 में ही जिले में केजीएमयू का सेटेलाइट सेंटर बनाने का निर्णय किया था। 18 नवंबर 2019 को मुख्यमंत्री ने 85 करोड़ की लागत से निर्मित होने वाले 300 बेड के भारत रत्न पंडित अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा महाविद्यालय और चिकित्सा परिसर केजीएमयू के निर्माण की नींव रखी थी। सेटेलाइट सेंटर का भवन निर्माण एक साल पहले ही पूरा हो चुका है। शासन स्तर से इसका निरीक्षण कर इसे मेडिकल कॉलेज का दर्जा भी दे दिया गया। इसके बाद प्रशासन ने गोंडा रोड पर 50 एकड़ भूमि भी छात्रावास व आवासीय परिसर के लिए उपलब्ध करा दी।
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इसके बावजूद इसका संचालन शुरू किए जाने में केजीएमयू के स्तर से लगातार उपेक्षा बरती जाती रही। इसके लिए किसी प्रतिनिधि तक की तैनाती तक नहीं हुई। इससे नाराज सीएम योगी ने मेडिकल कॉलेज के संचालन की जिम्मेदारी केजीएमयू से छीन कर अब चिकित्सा शिक्षा विभाग को सौंप दी है।
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- केजीएमयू का हस्तक्षेप सीमित करने के लिए पहले इसे राजकीय मेडिकल कॉलेज घोषित किया गया। इस दौरान प्राचार्य समेत प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर व अन्य कर्मियों की तैनाती लोक सेवा आयोग से होने की बात सामने आई। इसमें ज्यादा समय लगता। इस मसले को डीएम ने मुख्यमंत्री कार्यालय के साथ शासन के आला अफसरों को दी। साथ ही सुझाव दिया कि स्वायत्तशासी होने से कार्मिकों की नियुक्ति प्राचार्य स्तर से विभाग की देखरेख में हो सकेगी।

डीएम ने बताया कि भवन बनने के बाद मेडिकल कॉलेज का संचालन शीघ्र हो सके, इसके लिए शासन स्तर से समन्वय स्थापित किया गया। इसके बाद ही मेडिकल कॉलेज को स्वायत्तशासी का दर्जा मिला है। अब यहां एमबीबीएस की सौ सीटों पर पढ़ाई शुरू किए जाने के लिए जल्दी प्राचार्य की नियुक्ति हो सकेगी।
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