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राप्ती में उफान, सौ गांव पानी से घिरे
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बलरामपुर। जिले से लेकर नेपाल तक बीते दिनों हुई भारी बारिश का असर अब दिखने लगा है। पहाड़ी नालों तथा राप्ती नदी के तेवर देख लोग बाढ़ की आशंका से सहम गए हैं। नदी का जलस्तर खतरे के निशान से मात्र तीन सेंटीमीटर नीचे है। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से कई मार्गों पर आवागमन ठप हो गया है। 100 से अधिक गांव पानी से घिर गए हैं।
रविवार शाम राप्ती नदी का जलस्तर खतरे के निशान 104.620 मीटर के सापेक्ष 104.590 मीटर पहुंच गया है। नदी खतरे के निशान से मात्र तीन सेंटीमीटर नीचे है। नदी के जलस्तर में एक से दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से वृद्धि जारी है। बाढ़ के कारण गौरा से तुलसीपुर जाने वाले मार्ग पर भुसैलवा डिप पर आवागमन ठप हो गया है। हरिहरगंज से कोड़री जाने वाले मार्ग पर भी लौकहवा डिप के पास आवागमन बाधित है।
बाढ़ से जम्मू डिप, बेलहसा, किठुरा, अमरहवा, बेला, पटोहाकोट, रामनगर, विजयीडीह, शांतिपुरवा सहित राप्ती नदी के तट पर बसे 100 से अधिक गांव या तो जलमग्न हो गए हैं या फिर पानी से घिर गए हैं। बाढ़ से सैकड़ों बीघे धान व गन्ने की फसल जलमग्न हो गई है। रास्तों के जलमग्न होने से लोग जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे हैं। राहत की बात ये है कि शनिवार दोपहर से बारिश बंद होने के कारण पहाड़ी नालों का उफान धीरे-धीरे थमने लगा है।
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गौरा चौराहा से तुलसीपुर, हरिहरगंज से कोड़री, बेला व बरगदही के संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी से कट गए हैं। संपर्क मार्ग कटने से ग्रामीण गांव में ही फंसे हैं। राहत व बचाव कार्य शुरू नहीं होने से बाढ़ पीड़ितों में आक्रोश बढ़ रहा है। कई जगह पुल व डिप के एप्रोच भी धंस गए हैं। आवागमन में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
एडीएम राम अभिलाष ने बताया कि पहाड़ी नालों तथा राप्ती नदी की बाढ़ से प्रभावित गांवों का दौरा करके राहत व बचाव कार्य शुरू करा दिए हैं। ग्रामीणों को बाढ़ के बीच पानी भरे स्थानों पर जाने से मना किया गया है। क्षतिग्रस्त मार्गों का सर्वे कराकर उनकी मरम्मत का निर्देश दिया जा रहा है। हालात पर कड़ी नजर रखी जा रही है।
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रविवार शाम राप्ती नदी का जलस्तर खतरे के निशान 104.620 मीटर के सापेक्ष 104.590 मीटर पहुंच गया है। नदी खतरे के निशान से मात्र तीन सेंटीमीटर नीचे है। नदी के जलस्तर में एक से दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से वृद्धि जारी है। बाढ़ के कारण गौरा से तुलसीपुर जाने वाले मार्ग पर भुसैलवा डिप पर आवागमन ठप हो गया है। हरिहरगंज से कोड़री जाने वाले मार्ग पर भी लौकहवा डिप के पास आवागमन बाधित है।
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बाढ़ से जम्मू डिप, बेलहसा, किठुरा, अमरहवा, बेला, पटोहाकोट, रामनगर, विजयीडीह, शांतिपुरवा सहित राप्ती नदी के तट पर बसे 100 से अधिक गांव या तो जलमग्न हो गए हैं या फिर पानी से घिर गए हैं। बाढ़ से सैकड़ों बीघे धान व गन्ने की फसल जलमग्न हो गई है। रास्तों के जलमग्न होने से लोग जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे हैं। राहत की बात ये है कि शनिवार दोपहर से बारिश बंद होने के कारण पहाड़ी नालों का उफान धीरे-धीरे थमने लगा है।
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गौरा चौराहा से तुलसीपुर, हरिहरगंज से कोड़री, बेला व बरगदही के संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी से कट गए हैं। संपर्क मार्ग कटने से ग्रामीण गांव में ही फंसे हैं। राहत व बचाव कार्य शुरू नहीं होने से बाढ़ पीड़ितों में आक्रोश बढ़ रहा है। कई जगह पुल व डिप के एप्रोच भी धंस गए हैं। आवागमन में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
एडीएम राम अभिलाष ने बताया कि पहाड़ी नालों तथा राप्ती नदी की बाढ़ से प्रभावित गांवों का दौरा करके राहत व बचाव कार्य शुरू करा दिए हैं। ग्रामीणों को बाढ़ के बीच पानी भरे स्थानों पर जाने से मना किया गया है। क्षतिग्रस्त मार्गों का सर्वे कराकर उनकी मरम्मत का निर्देश दिया जा रहा है। हालात पर कड़ी नजर रखी जा रही है।