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Balrampur News: शिवालयों में जुटेगी श्रद्धालुओं की भीड़
Sun, 28 Jul 2024 10:46 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sun, 28 Jul 2024 10:46 PM IST
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बलरामपुर। सावन के दूसरे सोमवार को शिव मंदिरों में जलाभिषेक करने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटेगी। जिले के देवीपाटन मंदिर स्थिति शिवालय, बिजलीपुर स्थित शिवालय, नगर के हनुमानगढ़ी मंदिर स्थित शिवालय, भगवतीगंज स्थित झारखंडेश्वर महादेव मंदिर, पचपेड़वा स्थित शिवगढ़ धाम और उतरौला स्थित दुखहरण नाथ मंदिर एवं राजापुर भरिया जंगल स्थित कल्पेश्वर नाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ रहेगी। इसे देखते हुए मंदिर प्रशासन की तरफ से सभी इंतजार पूरे कर लिए गए हैं। एएसपी नम्रिता श्रीवास्तव ने बताया कि मंदिरों पर महिला एवं पुरुष पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई है।
500 वर्ष पुराना है दुखहरण नाथ मंदिर का इतिहास
उतरौला। नगर के गांधीनगर मोहल्ले में 500 वर्ष पहले मुगलकाल के दौरान दुखहरण नाथ मंदिर का निर्माण कराया गया था। मान्यता है कि घुमंतू प्रवृत्ति के संत जयकरन गिरि इसी स्थान पर विश्राम कर रहे थे। यहीं पर टीले के नीचे शिवलिंग दबा हुआ था, जो उन्हें सपने में दिखाई दिया। नींद टूटने के बाद उन्होंने टीले के खुदाई कराई तो भूरे रंग का शिवलिंग मिला। इसी स्थान पर शिवलिंग स्थापित कर मंदिर का निर्माण कराया गया। मंदिर के सभी दिशाओं में कुल 12 शिवलिंग है, लेकिन मध्य भाग में स्थित शिवलिंग का विशेष महत्व है। मंदिर में हनुमानजी की भी दो प्रतिमाएं स्थापित हैं। मंदिर के पुजारी महंत मयंक गिरि ने बताया कि श्रावण मास में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है। यहां भगवान शिव का जलाभिषेक व रुद्राभिषेक करने से भक्तों के सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं।
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500 वर्ष पुराना है दुखहरण नाथ मंदिर का इतिहास
उतरौला। नगर के गांधीनगर मोहल्ले में 500 वर्ष पहले मुगलकाल के दौरान दुखहरण नाथ मंदिर का निर्माण कराया गया था। मान्यता है कि घुमंतू प्रवृत्ति के संत जयकरन गिरि इसी स्थान पर विश्राम कर रहे थे। यहीं पर टीले के नीचे शिवलिंग दबा हुआ था, जो उन्हें सपने में दिखाई दिया। नींद टूटने के बाद उन्होंने टीले के खुदाई कराई तो भूरे रंग का शिवलिंग मिला। इसी स्थान पर शिवलिंग स्थापित कर मंदिर का निर्माण कराया गया। मंदिर के सभी दिशाओं में कुल 12 शिवलिंग है, लेकिन मध्य भाग में स्थित शिवलिंग का विशेष महत्व है। मंदिर में हनुमानजी की भी दो प्रतिमाएं स्थापित हैं। मंदिर के पुजारी महंत मयंक गिरि ने बताया कि श्रावण मास में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है। यहां भगवान शिव का जलाभिषेक व रुद्राभिषेक करने से भक्तों के सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं।
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