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Balrampur News: सिस्टम की अनदेखी ने छींन ली एक और हंसते-खेलते परिवार की खुशियां
Sun, 30 Aug 2026 11:32 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Sun, 30 Aug 2026 11:32 PM IST
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बलरामपुर के शुक्लागंज बाजार में निर्माणाधीन पुल के एक तरफ किया गया बेरीकेडिंग तो दूसरी तरफ केवल
श्रीदत्तगंज। क्षेत्र में निर्माणाधीन पुल पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी एक और हंसते-खेलते परिवार के लिए अभिशाप बन गई। शुक्लागंज बाजार में निर्माणाधीन पुल पर हुए हादसे में दिनेश कुमार की मौत ने सड़क निर्माण की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं और लापरवाही मिलने पर दो अवर अभियंताओं को निलंबित तक किया जा चुका है। इसके बावजूद व्यवस्था नहीं बदली और एक और परिवार को इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।
11 जून को बेलहा-इटवा मार्ग एनएच-159 पर निर्माणाधीन पुलिया के पास सुरक्षा इंतजामों की कमी का मामला अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था। मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर हुई जांच में पर्याप्त बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेत और अन्य सुरक्षा इंतजाम नहीं मिलने की पुष्टि हुई। इसके बाद जेई रामशंकर यादव और चंद्रशेखर यादव को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू की गई थी। तब विभाग ने निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं करने का दावा किया था। लेकिन शुक्लागंज की घटना ने उन दावों की हकीकत सामने रख दी। निर्माणाधीन पुल के पास यदि पहले से स्पष्ट चेतावनी, मजबूत बैरिकेडिंग और सुरक्षित मार्ग की व्यवस्था होती तो शायद दिनेश को खतरे का अंदाजा हो जाता।
साहब...कब तय की जाएगी जवाबदेही
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल एक हादसा का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की अनदेखी है जो कार्रवाई के बाद भी नहीं जाग रही है। आखिर यह कब तक होता रहेगा। दिनेश अपने पीछे पत्नी और चार बच्चों को छोड़ गए। लोग कह रह हैं कि दिनेश के परिवार के लिए यह सिर्फ एक हादसा नहीं, जिंदगी भर का दर्द है। अब लोगों का प्रशासन से एक ही सवाल है कि क्या अब निर्माण स्थलों पर सुरक्षा की जिम्मेदारी और इसमें लापरवाही होने पर सिस्टम की जवाबदेही तय की जाएगी या फिर अगली मौत का इंतजार किया जाएगा।
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11 जून को बेलहा-इटवा मार्ग एनएच-159 पर निर्माणाधीन पुलिया के पास सुरक्षा इंतजामों की कमी का मामला अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था। मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर हुई जांच में पर्याप्त बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेत और अन्य सुरक्षा इंतजाम नहीं मिलने की पुष्टि हुई। इसके बाद जेई रामशंकर यादव और चंद्रशेखर यादव को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू की गई थी। तब विभाग ने निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं करने का दावा किया था। लेकिन शुक्लागंज की घटना ने उन दावों की हकीकत सामने रख दी। निर्माणाधीन पुल के पास यदि पहले से स्पष्ट चेतावनी, मजबूत बैरिकेडिंग और सुरक्षित मार्ग की व्यवस्था होती तो शायद दिनेश को खतरे का अंदाजा हो जाता।
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साहब...कब तय की जाएगी जवाबदेही
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल एक हादसा का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की अनदेखी है जो कार्रवाई के बाद भी नहीं जाग रही है। आखिर यह कब तक होता रहेगा। दिनेश अपने पीछे पत्नी और चार बच्चों को छोड़ गए। लोग कह रह हैं कि दिनेश के परिवार के लिए यह सिर्फ एक हादसा नहीं, जिंदगी भर का दर्द है। अब लोगों का प्रशासन से एक ही सवाल है कि क्या अब निर्माण स्थलों पर सुरक्षा की जिम्मेदारी और इसमें लापरवाही होने पर सिस्टम की जवाबदेही तय की जाएगी या फिर अगली मौत का इंतजार किया जाएगा।

बलरामपुर के शुक्लागंज बाजार में निर्माणाधीन पुल के एक तरफ किया गया बेरीकेडिंग तो दूसरी तरफ केवल
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