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अध्यक्ष पद पर दिग्गजों के बीच रोचक होगा मुकाबला
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बलरामपुर। जिला पंचायत अध्यक्ष पद की कुर्सी पर इस बार दिग्गजों के बीच रोचक मुकाबला होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। शुक्रवार को शासन ने अध्यक्ष पद को अनारक्षित घोषित कर दिया है। अनारक्षित घोषित होने के बाद सत्ता तथा विपक्ष के राजनीतिक दिग्गज इस सीट पर कब्जा करने की जुगत में जुट गए हैं। सदस्य पदों पर भी दिग्गजों के समर्थक इस बार रोचक लड़ाई लड़ेंगे।
22 मई 1997 को बलरामपुर जिला घोषित हुआ था। छह महीने तक जिला पंचायत अध्यक्ष का कार्यभार गोंडा जिला पंचायत की अध्यक्ष डॉ. सीमा पांडेय ने देखा। वर्ष 1998 में अध्यक्ष पद के लिए पहला चुनाव हुआ और शासन ने यह सीट पिछड़ा वर्ग महिला के लिए घोषित कर दी। चुनाव के बाद सोनपता अध्यक्ष बनी। वर्ष 2001 में शासन ने अध्यक्ष पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित कर दी। इस बार इस सीट पर पूर्व सांसद स्व. सत्यदेव की पत्नी स्व. सरोजरानी अध्यक्ष बनी।
वर्ष 2005 में यह सीट अनारक्षित हो गई और इस बार इस सीट पर पूर्व सांसद रिजवान जहीर की पत्नी हुमा रिजवान ने चुनाव जीता। वर्ष 2010 में यह सीट फिर सामान्य महिला के लिए आरक्षित हुई और राजनीतिक समीकरण के चलते इस पद पर दूसरी बार हुमा रिजवान निर्विरोध चुनी गई। वर्ष 2015 में शासन ने इस सीट को अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित की। इस सीट पर सपा समर्थित रामावती ने अपना कब्जा जमाया। 2021 में शासन ने इस सीट को एक बार फिर अनारक्षित कर दिया है।
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राजनीतिक दिग्गज सीट के आरक्षण के इंतजार में चुप्पी साधे हुए थे। आरक्षण घोषित होते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। संभावित उम्मीदवार पहले जिला पंचायत सदस्य पदों पर अपने समर्थकों को चुनाव लड़ाकर जीत सुनिश्चित करने की रणनीति तैयार कर रहे है। अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में इस प्रतिष्ठित कुर्सी पर किसका कब्जा होगा।
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22 मई 1997 को बलरामपुर जिला घोषित हुआ था। छह महीने तक जिला पंचायत अध्यक्ष का कार्यभार गोंडा जिला पंचायत की अध्यक्ष डॉ. सीमा पांडेय ने देखा। वर्ष 1998 में अध्यक्ष पद के लिए पहला चुनाव हुआ और शासन ने यह सीट पिछड़ा वर्ग महिला के लिए घोषित कर दी। चुनाव के बाद सोनपता अध्यक्ष बनी। वर्ष 2001 में शासन ने अध्यक्ष पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित कर दी। इस बार इस सीट पर पूर्व सांसद स्व. सत्यदेव की पत्नी स्व. सरोजरानी अध्यक्ष बनी।
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वर्ष 2005 में यह सीट अनारक्षित हो गई और इस बार इस सीट पर पूर्व सांसद रिजवान जहीर की पत्नी हुमा रिजवान ने चुनाव जीता। वर्ष 2010 में यह सीट फिर सामान्य महिला के लिए आरक्षित हुई और राजनीतिक समीकरण के चलते इस पद पर दूसरी बार हुमा रिजवान निर्विरोध चुनी गई। वर्ष 2015 में शासन ने इस सीट को अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित की। इस सीट पर सपा समर्थित रामावती ने अपना कब्जा जमाया। 2021 में शासन ने इस सीट को एक बार फिर अनारक्षित कर दिया है।
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राजनीतिक दिग्गज सीट के आरक्षण के इंतजार में चुप्पी साधे हुए थे। आरक्षण घोषित होते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। संभावित उम्मीदवार पहले जिला पंचायत सदस्य पदों पर अपने समर्थकों को चुनाव लड़ाकर जीत सुनिश्चित करने की रणनीति तैयार कर रहे है। अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में इस प्रतिष्ठित कुर्सी पर किसका कब्जा होगा।