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Balrampur News: ई रिक्शा से ढोये जा रहे बच्चे
Wed, 08 Apr 2026 11:04 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Wed, 08 Apr 2026 11:04 PM IST
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फोटो-29- तुलसीपुर में ई-रिक्शा से स्कूल जाते विद्यार्थी। संवाद
बलरामपुर। स्कूली वाहनों में बच्चों को सुरक्षित वातावरण देने के लिए शासन स्तर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन स्थानीय स्तर पर सख्ती न होने के कारण आए दिन कुछ न कुछ घटनाएं होती रहती हैं। स्कूली वाहनों की पहचान के लिए शासन स्तर से पीले रंग से पेंट कराने, चालक व प्रबंधक का नाम व मोबाइल नंबर लिखने का नियम है, कुछेक को छोड़कर बाकी वाहनों में इन मानकों का ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
जिले में 170 निजी विद्यालयों में 371 छोटे-बड़े स्कूली वाहन पंजीकृत हैं। इनमें से टॉप स्कूलों के वाहनों पर तो विभागीय मानक लगभग पूरे मिलते हैं लेकिन छोटे कॉन्वेंट स्कूली वाहनों में सुरक्षा के मानक का अता-पता नहीं रहता है। ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित शिक्षण संस्थानों में आज भी कमर्शियल वैन व ई-रिक्शा धड़ल्ले से बच्चों को बैठाकर फर्राटा भर रहे हैं। स्कूल प्रबंधन एक-दो वाहनों का पंजीकरण कराकर पांच से छह वाहनों का संचालन करते हैं। अधिकारी भी जिला मुख्यालय पर नामचीन विद्यालयों के वाहनों की जांच करके फोटो खिंचवाकर कोरम कर देते हैं लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित शिक्षण संस्थानों के वाहनों की जांच नहीं हो पाती है। ऐसे में वह बेखौफ डग्गामार वाहनों का संचालन करते रहते हैं। ऐसे में कभी-कभी बड़ा हादसा हो जाता है।
स्कूली वाहनों में होनी चाहिए यह व्यवस्था
स्कूली बसों व वैन के लिए पीले रंग का मानक निर्धारित है। वाहनों के दोनों तरफ स्कूल का नाम, चालक व प्रबंधक का नाम व मोबाइल नंबर लिखा होना चाहिए। बस में आपातकालीन नंबर भी लिखने का नियम है।
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स्कूल बस की टक्कर से जीजा-साले की हो चुकी है मौत, सुरक्षा पर उठे थे सवाल
स्कूली वाहनों की लापरवाही का खामियाजा पहले भी सामने आ चुका है। रेहरा बाजार क्षेत्र में 12 नवंबर 2024 को तेज रफ्तार स्कूली बस की टक्कर से बाइक सवार जीजा-साले की मौके पर ही मौत हो गई थी। जानकारी के अनुसार एएसके मेमोरियल स्कूल की बस सुबह बच्चों को लेकर जा रही थी। धुसवा बाजार-भरतपुर मार्ग पर बस ने सामने से आ रही बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में रामपुर ग्रांट निवासी शिवधर (45) और उनके साले नरदाहे (40) गंभीर रूप से घायल हो गए। आसपास के लोग उन्हें संभालते उससे पहले ही दोनों ने दम तोड़ दिया। टक्कर इतनी तेज थी कि बस का अगला शीशा पूरी तरह टूट गया और वाहन कुछ दूरी तक अनियंत्रित होकर डगमगा गया। चालक की सूझबूझ से बस पलटने से बच गई, जिससे उसमें सवार सभी बच्चे सुरक्षित रहे। मामले की विभागीय जांच में चालक का ड्राइविंग लाइसेंस और बस के दस्तावेज वैध पाए गए थे लेकिन तेज रफ्तार और लापरवाही को हादसे की वजह माना गया। इस घटना के बाद स्कूली वाहनों की गति, फिटनेस, चालक प्रशिक्षण और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।
एआरटीओ बृजेश ने बताया कि स्कूली वाहनों की नियमित जांच कर सुरक्षा मानकों की पड़ताल की जाती है। विभाग की तरफ से फिटनेस समाप्त होने वाले 32 वाहन संचालकों को मानक पूरा कराने के लिए नोटिस दिया है। आगे भी जांच करके कार्रवाई की जाएगी।
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जिले में 170 निजी विद्यालयों में 371 छोटे-बड़े स्कूली वाहन पंजीकृत हैं। इनमें से टॉप स्कूलों के वाहनों पर तो विभागीय मानक लगभग पूरे मिलते हैं लेकिन छोटे कॉन्वेंट स्कूली वाहनों में सुरक्षा के मानक का अता-पता नहीं रहता है। ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित शिक्षण संस्थानों में आज भी कमर्शियल वैन व ई-रिक्शा धड़ल्ले से बच्चों को बैठाकर फर्राटा भर रहे हैं। स्कूल प्रबंधन एक-दो वाहनों का पंजीकरण कराकर पांच से छह वाहनों का संचालन करते हैं। अधिकारी भी जिला मुख्यालय पर नामचीन विद्यालयों के वाहनों की जांच करके फोटो खिंचवाकर कोरम कर देते हैं लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित शिक्षण संस्थानों के वाहनों की जांच नहीं हो पाती है। ऐसे में वह बेखौफ डग्गामार वाहनों का संचालन करते रहते हैं। ऐसे में कभी-कभी बड़ा हादसा हो जाता है।
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स्कूली वाहनों में होनी चाहिए यह व्यवस्था
स्कूली बसों व वैन के लिए पीले रंग का मानक निर्धारित है। वाहनों के दोनों तरफ स्कूल का नाम, चालक व प्रबंधक का नाम व मोबाइल नंबर लिखा होना चाहिए। बस में आपातकालीन नंबर भी लिखने का नियम है।
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स्कूल बस की टक्कर से जीजा-साले की हो चुकी है मौत, सुरक्षा पर उठे थे सवाल
स्कूली वाहनों की लापरवाही का खामियाजा पहले भी सामने आ चुका है। रेहरा बाजार क्षेत्र में 12 नवंबर 2024 को तेज रफ्तार स्कूली बस की टक्कर से बाइक सवार जीजा-साले की मौके पर ही मौत हो गई थी। जानकारी के अनुसार एएसके मेमोरियल स्कूल की बस सुबह बच्चों को लेकर जा रही थी। धुसवा बाजार-भरतपुर मार्ग पर बस ने सामने से आ रही बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में रामपुर ग्रांट निवासी शिवधर (45) और उनके साले नरदाहे (40) गंभीर रूप से घायल हो गए। आसपास के लोग उन्हें संभालते उससे पहले ही दोनों ने दम तोड़ दिया। टक्कर इतनी तेज थी कि बस का अगला शीशा पूरी तरह टूट गया और वाहन कुछ दूरी तक अनियंत्रित होकर डगमगा गया। चालक की सूझबूझ से बस पलटने से बच गई, जिससे उसमें सवार सभी बच्चे सुरक्षित रहे। मामले की विभागीय जांच में चालक का ड्राइविंग लाइसेंस और बस के दस्तावेज वैध पाए गए थे लेकिन तेज रफ्तार और लापरवाही को हादसे की वजह माना गया। इस घटना के बाद स्कूली वाहनों की गति, फिटनेस, चालक प्रशिक्षण और सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल उठे थे।
एआरटीओ बृजेश ने बताया कि स्कूली वाहनों की नियमित जांच कर सुरक्षा मानकों की पड़ताल की जाती है। विभाग की तरफ से फिटनेस समाप्त होने वाले 32 वाहन संचालकों को मानक पूरा कराने के लिए नोटिस दिया है। आगे भी जांच करके कार्रवाई की जाएगी।