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Balrampur News: 60 आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को मिलेगा ताजा और पौष्टिक भोजन
Tue, 22 Sep 2026 11:17 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Tue, 22 Sep 2026 11:17 PM IST
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फोटो-28-बलरामपुर के कलेक्ट्रेट में एमओयू के दौरान मौजूद अधिकारी व अन्य।-स्रोत: विभाग
बलरामपुर। जिले को कुपोषण मुक्त बनाने की दिशा में जिला प्रशासन और जोमैटो फीडिंग इंडिया ने पहल की है। जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन के नेतृत्व में मंगलवार को दोनों के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इसके तहत पहले चरण में रेहरा बाजार की 21 ग्राम पंचायतों के 60 आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को निशुल्क ताजा, गर्म और पौष्टिक नाश्ता व दोपहर का भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। योजना का शुभारंभ दो अक्तूबर को केंद्रीय राज्यमंत्री कीर्तिवर्धन सिंह करेंगे।
भोजन तैयार करने के लिए अचलपुर चौधरी में केंद्रीय रसोई स्थापित की जाएगी। यहां से पांच विशेष वाहनों के माध्यम से निर्धारित समय पर आंगनबाड़ी केंद्रों तक भोजन पहुंचाया जाएगा। बच्चों को विविध खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के लिए 12 दिवसीय रोटेशन मेन्यू तैयार किया गया है। इसमें पोहा, दूध का दलिया, इडली-सांभर, खीर, सेवई, रागी का दलिया, मौसमी फल और गुड़-चना के साथ दाल, तहरी, पालक-बेसन कढ़ी, चना-पालक दाल, पनीर-वेजिटेबल पुलाव और मौसमी सब्जियां शामिल हैं।
योजना के तहत छह माह से तीन वर्ष और तीन से छह वर्ष तक के बच्चों के साथ गर्भवती व धात्री महिलाओं के पोषण पर भी ध्यान दिया जाएगा। बच्चों की उपस्थिति, वजन और लंबाई की डिजिटल निगरानी की जाएगी। फेस रिकग्निशन प्रणाली और पोषण ट्रैकर के आंकड़ों के माध्यम से प्रगति का आकलन किया जाएगा। पहले चरण के अनुभव के आधार पर योजना का विस्तार 218 आंगनबाड़ी केंद्रों तक करने की योजना है।
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भोजन तैयार करने के लिए अचलपुर चौधरी में केंद्रीय रसोई स्थापित की जाएगी। यहां से पांच विशेष वाहनों के माध्यम से निर्धारित समय पर आंगनबाड़ी केंद्रों तक भोजन पहुंचाया जाएगा। बच्चों को विविध खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के लिए 12 दिवसीय रोटेशन मेन्यू तैयार किया गया है। इसमें पोहा, दूध का दलिया, इडली-सांभर, खीर, सेवई, रागी का दलिया, मौसमी फल और गुड़-चना के साथ दाल, तहरी, पालक-बेसन कढ़ी, चना-पालक दाल, पनीर-वेजिटेबल पुलाव और मौसमी सब्जियां शामिल हैं।
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योजना के तहत छह माह से तीन वर्ष और तीन से छह वर्ष तक के बच्चों के साथ गर्भवती व धात्री महिलाओं के पोषण पर भी ध्यान दिया जाएगा। बच्चों की उपस्थिति, वजन और लंबाई की डिजिटल निगरानी की जाएगी। फेस रिकग्निशन प्रणाली और पोषण ट्रैकर के आंकड़ों के माध्यम से प्रगति का आकलन किया जाएगा। पहले चरण के अनुभव के आधार पर योजना का विस्तार 218 आंगनबाड़ी केंद्रों तक करने की योजना है।
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