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Balrampur News: हजरत सैयदना की यादों से जुड़ा है औलिया मजार
Mon, 14 Jul 2025 11:36 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
Updated Mon, 14 Jul 2025 11:36 PM IST
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बलरामपुर के चांद औलिया में स्थित बाबा का मजार।-संवाद
उतरौला (बलरामपुर)। उतरौला के चांद औलिया मजार एक प्रसिद्ध सूफी संत हजरत सैयदना शाह चांद मियां औलिया से जुड़ा है। वह 13 वीं शताब्दी में यहां आकर बस गए थे। उन्हें लोग सूफी संत के रूप में मानते थे। 300 वर्ष पहले यहां उनकी मजार बनाई गई और यह दरगाह के रूप में स्थापित है।
यह मजार उतरौला शहर के केंद्र में स्थित है और क्षेत्र के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल है।यहां हर साल उर्स का आयोजन किया जाता है। जिसमें दूर-दूर से लोग शामिल होते हैं।
उर्स के दौरान, मजार को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है और कव्वाली का आयोजन किया जाता है। इस बार छांगुर पर हुई कार्रवाई से आयोजन नहीं हो सका। इसलिए दरगाह में सन्नाटा पसरा है।
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दरगाह के खादिम परहेजगार ने बताया कि हजरत सैयदना शाह चांद मियां औलिया प्रसिद्ध सूफी संत थे। जिन्होंने अपना जीवन लोगों की सेवा में समर्पित किया था। उन्हें चांद औलिया के नाम से जाना जाता था। खादिम परहेजगार ने बताया कि यह मजार क्षेत्र के लोगों के लिए धार्मिक व सांस्कृतिक स्थल है, जहां लोग मनोकामनाएं लेकर आते हैं और प्रार्थना करते हैं। इस मजार से लोगों की आस्था जुड़ी है।
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यह मजार उतरौला शहर के केंद्र में स्थित है और क्षेत्र के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल है।यहां हर साल उर्स का आयोजन किया जाता है। जिसमें दूर-दूर से लोग शामिल होते हैं।
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उर्स के दौरान, मजार को फूलों और रोशनी से सजाया जाता है और कव्वाली का आयोजन किया जाता है। इस बार छांगुर पर हुई कार्रवाई से आयोजन नहीं हो सका। इसलिए दरगाह में सन्नाटा पसरा है।
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दरगाह के खादिम परहेजगार ने बताया कि हजरत सैयदना शाह चांद मियां औलिया प्रसिद्ध सूफी संत थे। जिन्होंने अपना जीवन लोगों की सेवा में समर्पित किया था। उन्हें चांद औलिया के नाम से जाना जाता था। खादिम परहेजगार ने बताया कि यह मजार क्षेत्र के लोगों के लिए धार्मिक व सांस्कृतिक स्थल है, जहां लोग मनोकामनाएं लेकर आते हैं और प्रार्थना करते हैं। इस मजार से लोगों की आस्था जुड़ी है।