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Balrampur News: बारिश आते ही कांपने लगते हैं, एक रुपया भी नहीं मिलता मुआवजा

Fri, 05 Jul 2024 12:02 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, बलरामपुर Updated Fri, 05 Jul 2024 12:02 AM IST
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As soon as it rains, they start shivering; they don't get even a single rupee compensation
बलरामपुर। राप्ती नदी के तटीय इलाकों में लोगों की जिंदगी में रहना, उजड़ना और फिर बसना एक हिस्सा सा बन गया है। सदर व उतरौला तहसील के 85 गांव राप्ती नदी के तटीय इलाकों में बसे हैं। चार साल पहले राप्ती नदी की कटान ने सदर तहसील के कल्याणपुर गांव के 66 परिवारों को बेघर कर दिया था। राप्ती के तटीय इलाकों में बसे करीब 85 गांवों के एक लाख परिवारों को हर साल बाढ़ की तबाही का मंजर झेलना पड़ता है। इन गांवों के लोगों का कहना है कि बारिश आते ही हाथ पैर कांपने लगते हैं। हर साल बाढ़ के पानी में हमारे अरमान बह जाते हैं, लेकिन सरकार की ओर से मुआवजा के नाम पर एक रुपया भी नहीं मिलता है। सदर तहसील के लालपुर, फगुइया, झौहना, गोंसाईपुरवा, मानकोट, टेंगनहिया, जबदही, जबदहा, ढोंढरी, मुजेहनी, सरदारगढ़, बेलवा सुल्तानजोत, सेमरहना व नोहरपुरवा सहित करीब 40 गांवों के लगभग एक लाख लोगों को हर साल राप्ती नदी के कटान का कहर झेलना पड़ता है। उतरौला तहसील के मोहनजोत, बाघाजोत, मटियरिया, फत्तेपुर, रूस्तमनगर, बभनी बुजुर्ग, जनुकी, जनुका, बारम, कोहैनिया, केतारपुर, महुआधनी व तिलखी बढ़या सहित करीब 45 गांवों के लोगों को हर साल राप्ती नदी के कटान से भारी नुकसान उठाना पड़ता है। यहां के कल्लू व बलदेव का कहना है कि बाढ़ का पानी 15 दिन से अधिक घरों में भरा रहता है। ग्रामीण शिवप्रसाद का कहना है कि खेतों में खड़ी फसलों में पानी भर जाता है। घरों में रखा आनाज व समान बेकार हो जाता है। करीब एक महीने के बाद फिर से हम नए तरीके से जिंदगी शुरू करते हैं। मनोरथ व शिवराम का कहना है कि हर साल बारिश आते ही कांपने लगते हैं,लेकिन सरकार की ओर से मुआवजा के नाम पर एक रुपया भी नहीं मिलता है।
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--कालोनी को बसाने पर खर्च किए 273.29 लाख वर्ष 2021-22 में सदर तहसील के कल्याणपुर गांव में राप्ती नदी के कटान करके 66 परिवारों के घरों को निगल लिया था। बिना घर के लोग अपना जीवन यापन करने को मजबूर हो गए। कटान पीड़ितों को बसाने के लिए प्रशासन ने टेंगनहिया मानकोट गांव में 72.70 लाख रुपये में करीब 12 बीघे भूमि खरीदी। यहां पर इन्हें बसाने और कालोनी को बनाने के नाम पर 273.29 लाख रुपये खर्च किए गए थे।
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आपदा प्रबंधन से की जा रही मदद
-राप्ती नदी के कटान से फसलों का नुकसान होने पर आपदा प्रबंधन से हर साल मदद की जा रही है। घर कटने पर पीड़ित परिवारों को मुख्यमंत्री आवास योजना से लाभ दिए जाने का प्राविधान है। इसमें चयन करके उन्हें योजना का लाभ दिया जाएगा।
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-प्रदीप कुमार, एडीएम वित्त एवं राजस्व
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