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कोरोना से मौत पर परिजनों को मिले 50 लाख व सरकारी नौकरी
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बलरामपुर। शासनादेश में ड्यूटी के दौरान जिन शर्तो के साथ कोरोना से मौत पर अनुग्रह राशि देने की बात कही गई है जो पूरी तरह से अमानवीय है। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव के प्रशिक्षण, मतदान एवं मतगणना के दौरान करीब 800 बेसिक के शिक्षक-शिक्षिकाओं की कोरोना के चलते मौत हो चुकी है। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में लगे कर्मचारियों की कोरोना से मौत पर परिजनों को 50 लाख रुपये अनुग्रह राशि व सरकारी नौकरी दी जाए।
यह बातें विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश कोषाध्यक्ष दिलीप चौहान ने बीते दिन मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में कही है। उन्होंने कहा है कि शासन की तरफ से जारी शासनादेश की शर्ते पूरा करना बहुत ही मुश्किल है।
शिक्षक व कर्मचारियों कोरोना से मौत के मामले में परिजनों ने एफआईआर व पोस्टमार्टम कराई हो यह जरूरी नहीं है। कई शिक्षकों को अस्पताल में भर्ती होने का मौका ही नहीं मिला और घर पर ही उनकी मौत हो गई। नियम व शर्ते इतनी कठिन है कि परिजन उसे पूरा नहीं कर पाएंगे।
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कोविड महामारी के दौरान कई जगहों पर बेसिक शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई थी ऐसे में तमाम शिक्षक कोरोना पॉजिटिव भी हो गए। जान जोखिम में डालकर शिक्षकों ने अपना काम ईमानदारी से किया।
फ्रंटलाइन वर्कर एवं राज्य कर्मचारियों के इलाज व आक्सीजन कंसन्ट्रेटर खरीदने का भुगतान सरकार करेगी लेकिन बेसिक शिक्षकों को इसका लाभ नहीं मिलेगा। सरकार के भेदभावपूर्ण रवैये से शिक्षकों में कुण्ठा पैदा हो रही है।
एसोसिएशन के प्रदेश कोषाध्यक्ष ने मांग किया है कि चुनाव ड्यूटी में संक्रमित होने पर जिन शिक्षकों व कर्मचारियों की कोरोना से मौत हुई है उनके परिजनों को 50 लाख रुपए की सहायता राशि एवं सरकारी नौकरी दी जाए। फ्रंट लाइन वर्करों को मिलने वाली सुविधाओं का लाभ शिक्षकों को भी दिया जाए।
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यह बातें विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश कोषाध्यक्ष दिलीप चौहान ने बीते दिन मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में कही है। उन्होंने कहा है कि शासन की तरफ से जारी शासनादेश की शर्ते पूरा करना बहुत ही मुश्किल है।
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शिक्षक व कर्मचारियों कोरोना से मौत के मामले में परिजनों ने एफआईआर व पोस्टमार्टम कराई हो यह जरूरी नहीं है। कई शिक्षकों को अस्पताल में भर्ती होने का मौका ही नहीं मिला और घर पर ही उनकी मौत हो गई। नियम व शर्ते इतनी कठिन है कि परिजन उसे पूरा नहीं कर पाएंगे।
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कोविड महामारी के दौरान कई जगहों पर बेसिक शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई थी ऐसे में तमाम शिक्षक कोरोना पॉजिटिव भी हो गए। जान जोखिम में डालकर शिक्षकों ने अपना काम ईमानदारी से किया।
फ्रंटलाइन वर्कर एवं राज्य कर्मचारियों के इलाज व आक्सीजन कंसन्ट्रेटर खरीदने का भुगतान सरकार करेगी लेकिन बेसिक शिक्षकों को इसका लाभ नहीं मिलेगा। सरकार के भेदभावपूर्ण रवैये से शिक्षकों में कुण्ठा पैदा हो रही है।
एसोसिएशन के प्रदेश कोषाध्यक्ष ने मांग किया है कि चुनाव ड्यूटी में संक्रमित होने पर जिन शिक्षकों व कर्मचारियों की कोरोना से मौत हुई है उनके परिजनों को 50 लाख रुपए की सहायता राशि एवं सरकारी नौकरी दी जाए। फ्रंट लाइन वर्करों को मिलने वाली सुविधाओं का लाभ शिक्षकों को भी दिया जाए।