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Balrampur News: 102 नमूने फेल, 83 दुकानदारों पर केस दर्ज
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बलरामपुर। एफएसडीए ने 140 दुकानों पर छापा मारकर वहां से खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे थे। जांच में विभिन्न खाद्य पदार्थों के 102 नमूने फेल हो गए हैं। इनमें 49 पदार्थ अधोमानक, 46 मिथ्या छाप (गलत ब्रांडिंग) व सात खाद्य पदार्थ असुरक्षित मिले हैं।
मामले में विभाग ने 83 दुकानदारों पर अभियोग पंजीकृत कराया गया है। जबकि शेष 19 के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की अनुमति शासन से मांगी गई है। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि फेल हुए 102 नमूनों में सात असुरक्षित मिले हैं। इनमें सब्जी मसाला, खोया, नमकीन, मेवे व रंग वाली चाय की पत्ती शामिल है।
जांच के दौरान मसाला व मेवे में कीड़े, नमकीन में सिंथेटिक कलर, खोए में फारेन फैट मिला है। वीर विनय चौराहे के पास थोक विक्रेता की दुकान पर छापे में रंग वाली नकली चाय की पत्ती पकड़ी गई थी। अधिकारी बताते हैं कि नकली चाय की पत्ती ठंडे पानी में भी डालनेे पर रंग बदल देती है।
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मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि 102 नमूने फेल होने के मामले में अब तक 83 अभियोग पंजीकृत कराए गए हैं। शेष 19 पर कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखकर अनुमति मांगी गई है।
जांच में फेल होने वाले खाद्य पदार्थों को तीन श्रेणियों में बांटा जाता है। सभी मामलों में विभाग विक्रेता पर अभियोग दर्ज कराता है। परीक्षण में नमूने के अधोमानक मिलने पर विक्रेता को पांच लाख रुपये तक जुर्माना देना पड़ता है। इसी तरह मिथ्या छाप नमूने में तीन लाख एवं खाद्य पदार्थ के असुरक्षित मिलने पर संबंधित दुकानदार को आजीवन कारावास व दस लाख रुपये तक जुर्माना देना पड़ता है।
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मामले में विभाग ने 83 दुकानदारों पर अभियोग पंजीकृत कराया गया है। जबकि शेष 19 के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की अनुमति शासन से मांगी गई है। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी विनोद कुमार ने बताया कि फेल हुए 102 नमूनों में सात असुरक्षित मिले हैं। इनमें सब्जी मसाला, खोया, नमकीन, मेवे व रंग वाली चाय की पत्ती शामिल है।
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जांच के दौरान मसाला व मेवे में कीड़े, नमकीन में सिंथेटिक कलर, खोए में फारेन फैट मिला है। वीर विनय चौराहे के पास थोक विक्रेता की दुकान पर छापे में रंग वाली नकली चाय की पत्ती पकड़ी गई थी। अधिकारी बताते हैं कि नकली चाय की पत्ती ठंडे पानी में भी डालनेे पर रंग बदल देती है।
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मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि 102 नमूने फेल होने के मामले में अब तक 83 अभियोग पंजीकृत कराए गए हैं। शेष 19 पर कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखकर अनुमति मांगी गई है।
जांच में फेल होने वाले खाद्य पदार्थों को तीन श्रेणियों में बांटा जाता है। सभी मामलों में विभाग विक्रेता पर अभियोग दर्ज कराता है। परीक्षण में नमूने के अधोमानक मिलने पर विक्रेता को पांच लाख रुपये तक जुर्माना देना पड़ता है। इसी तरह मिथ्या छाप नमूने में तीन लाख एवं खाद्य पदार्थ के असुरक्षित मिलने पर संबंधित दुकानदार को आजीवन कारावास व दस लाख रुपये तक जुर्माना देना पड़ता है।