जयप्रकाश नगर। विकास खण्ड मुरली छपरा क्षेत्र के करीब एक दर्जन गांवों के किसान बीते एक दशक से बाढ़ व तरसोत के पानी का दंश झेल रहे हैं। इस वर्ष भी तरसोत के पानी के चलते उनकी रबी की फसल की बोआई प्रभावित हो रही है। पानी खेतों में कहीं तीन फुट तो कहीं चार फुट जमा है। धतुरी टोला, सोनकी भाट, दलन छपरा, टोला नेका राय, नवका टोला, लक्ष्मण छपरा, शोभा छपरा, बाबू के डेरा, श्रीपतिपुर, रामपुर, वाजिदपुर, मुरली छपरा, बहुआरा, फकरु टोला, संसार टोला, दलजीत टोला, खवासपुर सहित अन्य गांवों के किसानों के खेतों में अभी भी पानी भरा हुआ है। इन किसानों ने बीएसटी बांध के अंदर मक्का, धान आदि की खेती की थी। खेती तरसोत के पानी से पूरी तरह चौपट हो गई। बीएसटी बांध से करीब आठ दस किलोमीटर की दूरी में मक्के, धान आदि के खेत तरसोत के पानी से डूब कर बर्बाद हो गए। जो खेत सूखे हाल में थे उन पर नीलगाय, घोड़ा, घोड़ी, गदहे आदि जानवरों ने अपना कब्जा जमा लिया। क्षेत्र के किसान राजकिशोर सिंह ,शम्भू सिंह, बच्चा लाल सिंह, जयप्रकाश यादव, रमाशंकर यादव, जद्दू यादव, संतोष सिंह, विक्की सिंह, रामदेव प्रसाद ने बताया कि बाढ़ प्रभावित गांवों से कहीं ज्यादा बर्बादी तरसोत के पानी से हुई है। इसके बावजूद इस इलाके को सरकार बाढ़ से मुक्त मानती है। नतीजन राहत के नाम पर इधर के किसानों को कुछ भी नहीं मिलता है। किसान बताते हैं कि बीएसटी बांध पर संसार टोला गांव के सामने लगे रेगुलेटर के गेट को बन्द करने का यह परिणाम है और अब जब गेट खुलेगा तो भी गेट के उस पार उसके मुंह पर इतना मिट्टी भर गई होती है कि पानी बाहर निकलने का नाम नहीं लेता है। जिसका परिणाम हम किसान भुगतते चले आ रहे हैं।