{"_id":"5974dc944f1c1b53438b468e","slug":"verification-of-12-percent-cards","type":"story","status":"publish","title_hn":"12 फीसदी कार्डों का ही सत्यापन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
12 फीसदी कार्डों का ही सत्यापन
ballia
Updated Sun, 23 Jul 2017 10:57 PM IST
विज्ञापन
राशनकार्ड
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले में राशन कार्डों के सत्यापन का काम गति नहीं पकड़ पा रहा। 30 जुलाई तक सत्यापन का काम पूरा करना है। लेकिन काम को देखते हुए ऐसा नहीं लग रहा की सत्यापन पूरा हो सकेगा। विभागीय अधिकारी की माने तो अभी सत्यापन का काम महज 12 फीसदी ही हो सका है। ।
जिले में 2005 में ग्रामीण व शहरी इलाकों के लोगों को राशन कार्ड मुहैया कराया गया। कुल तीन तरह के राशन कार्ड बनाए गए थे जिसमें अन्त्योदय, बीपीएल व एपीएल कार्ड थे।
कुल पांच लाख 85 हजार राशन कार्ड जिले में बने थे, इसमें एक लाख एक हजार 701 अन्त्योदय, एक लाख 61 हजार 16 बीपीएल व तीन लाख 22 हजार 283 एपीएल कार्डधारक थे। 2015 में एनएफएसए (राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम) लागू होने पर जिले में फिर राशन कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई।
विज्ञापन
शहरी और ग्रामीण इलाकों में सर्वे कर पात्र गृहस्थी व अन्त्योदय कार्डधारकों का चयन किया गया। पूर्ति विभाग की ओर से कार्डधारकों की फीडिंग कराई गई और शासन ने मार्च 2016 में सूची को ऑनलाइन प्रदर्शित किया तो बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई।
इसके बाद संशोधन शुरु हुआ लेकिन सालभर बाद भी काम पूरा नहीं हुआ। डेढ़ माह पहले शासन ने राशन कार्डों का सत्यापन करने का निर्देश दिया लेकिन कागजों पर ही कोरम पूरा कर दिया गया। शासन की ओर से 30 जुलाई तक सत्यापन कार्य पूरा करने का निर्देश दिया गया है। लेकिन अधिकांश इलाकों में अभी तक सत्यापन का काम शुरु तक नहीं हो सका है।
विज्ञापन
जिले में 2005 में ग्रामीण व शहरी इलाकों के लोगों को राशन कार्ड मुहैया कराया गया। कुल तीन तरह के राशन कार्ड बनाए गए थे जिसमें अन्त्योदय, बीपीएल व एपीएल कार्ड थे।
विज्ञापन
कुल पांच लाख 85 हजार राशन कार्ड जिले में बने थे, इसमें एक लाख एक हजार 701 अन्त्योदय, एक लाख 61 हजार 16 बीपीएल व तीन लाख 22 हजार 283 एपीएल कार्डधारक थे। 2015 में एनएफएसए (राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम) लागू होने पर जिले में फिर राशन कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई।
विज्ञापन
शहरी और ग्रामीण इलाकों में सर्वे कर पात्र गृहस्थी व अन्त्योदय कार्डधारकों का चयन किया गया। पूर्ति विभाग की ओर से कार्डधारकों की फीडिंग कराई गई और शासन ने मार्च 2016 में सूची को ऑनलाइन प्रदर्शित किया तो बड़े पैमाने पर गड़बड़ी सामने आई।
इसके बाद संशोधन शुरु हुआ लेकिन सालभर बाद भी काम पूरा नहीं हुआ। डेढ़ माह पहले शासन ने राशन कार्डों का सत्यापन करने का निर्देश दिया लेकिन कागजों पर ही कोरम पूरा कर दिया गया। शासन की ओर से 30 जुलाई तक सत्यापन कार्य पूरा करने का निर्देश दिया गया है। लेकिन अधिकांश इलाकों में अभी तक सत्यापन का काम शुरु तक नहीं हो सका है।