Up Nikay Chunav 2023: चुनाव परिणाम तय करेंगे किसकी बचेगी कुर्सी, 13 को पता चलेगा दिग्गजों का सियासी कद
बलिया जिले में निकाय चुनाव परिणाम सत्ताधारी भाजपा और मुख्य विपक्षी पार्टी सपा के दिग्गजों का कद तय करेगा। टिकट वितरण में मंत्री से लेकर सांसद तक और विधायक से लेकर पूर्व विधायक व जिलाध्यक्ष तक ने जोर आजमाइश की थी।
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निकाय चुनाव के परिणाम पर माननीयों के साथ दिग्गज नेताओं की खास नजर है। बलिया जिले में निकाय चुनाव परिणाम सत्ताधारी भाजपा और मुख्य विपक्षी पार्टी सपा के दिग्गजों का कद तय करेगा। भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में जहां मुख्यमंत्री समेत कई मंत्रियों और डिप्टी सीएम तक ने प्रचार किया।
वहीं सपा के पूर्व विधायकों भी अपने करीबियों के लिए दिन रात एक किए रहे। अब जनता ने अपना फैसला कर दिया है। दोनों पार्टियों के दिग्गजों पर मतदाता कितने मेहरबान हुए ये 13 मई को आने वाले परिणाम तय करेंगे। बलिया जिले की सात विधानसभा सीटों में से दो पर भाजपा और तीन पर सपा का कब्जा है। एक-एक सीट बसपा और सुभासपा के कब्जे में हैं।
इन दिग्गजों ने बलिया में किया चुनाव प्रचार
केंद्र व प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है। नगर पालिका बलिया से भाजपा के संत कुमार उर्फ मिठाई लाल की जीत बलिया नगर से विधायक और परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बनी हैं।
पार्टी ने इस सीट पर जीत हासिल करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत डिप्टी सीएम बृजेश पाठक के अलावा आजमगढ़ के सांसद और भोजपुरी सिने अभिनेता दिनेश लाल यादव निरहुआ और रवि किशन से भी प्रचार कराया। इसके अलावा जिले के प्रभारी मंत्री दयाशंकर मिश्र दयालु ने चुनाव के दौरान शहर की गलियों की खाक छानी।
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पूर्व मंत्री की साख दांव पर
वहीं, निर्दलीय संजय उपाध्याय के लिए पूर्व मंत्री सपा के कद्दावर नेता नारद राय ने अपनी साख दांव पर लगा रखीं हैं। जीत-हार से सपा हाईकमान के फैसले से इधर जाकर निर्दलीय की मदद करने वाले नारद राय की राजनीति जीवन का भविष्य भी दांव पर है। इसके अलावा, सपा के अधिकृत उम्मीदवार लक्ष्मण गुप्ता के लिए पूर्व विधायक मंजू सिंह, राम इकबाल सिंह के अलावा जिला अध्यक्ष राजमंगल यादव ने अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगाई थी। इसलिए इस सीट पर हार-जीत भी काफी मायने रखती है।
मतदान के बाद जीत-हार पर चर्चा शुरू
गुरुवार शाम मतदान समाप्त होने के बाद प्रत्याशी, समर्थक और आम मतदाताओं की निगाह अब मतगणना परिणाम पर टिकी हुईं हैं। इससे पहले सभी हार जीत का गुणा भाग लगा रहे हैं। हर कोई अपने-अपने वार्ड में पड़े मतदान प्रतिशत के आधार पर जीत हार की बाजी लगा रहा था। कइयों की नजर पार्टी प्रत्याशियों के अलावा बागियों के वोटों पर भी है। उन्हें आभास है कि निर्दलीय के वोटों का ग्राफ बढ़ा तो उनकी राह में रोड़ा अटक सकता है। इसे लेकर लोगों बीच जमकर बहसबाजी भी हो रही थी। इसके अलावा बूथ की दिनभर गतिविधियों के बारे में प्रत्याशियों के कार्यालय पर देर शाम तक चर्चा होती रही।