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सामानों को बेचकर पाला पेट, कुछ नहीं बचा तो निकल पड़े गांव की ओर

Wed, 20 May 2020 08:30 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 20 May 2020 08:30 PM IST
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Stomach sold by selling goods, left nothing to village
बैरिया। लॉकडाउन में विभिन्न प्रान्तों की कम्पनियां अपने मजदूरों को लाचारी में भूख से बिलबिलाने के लिए उनके हाल पर छोड़ दिया। वहीं सरकारी तंत्र की अव्यवस्था से परेशान प्रवासी मजदूर हर रोज दिल्ली, फरीदाबाद, हरियाणा, चेन्नई, गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान, पंजाब आदि राज्यों से पैदल, ट्रक व बस से एनएच 31 सड़क मार्ग से होकर बिहार की तरफ पलायन करने को मजबूर हैं।
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बिहार के सीतामढ़ी निवासी भोला पांण्डेय, कामेश्वर राय आदि ने बताया कि मुंबई बासी में रहते थे। कंपनी बंद होने के बाद जो पैसा बचा था उससे काम चला रहे थे और बाद में कुछ कीमती सामानों को बेच कर भी पेट पाला। लेकिन जब कुछ नहीं बचा तो किराए पर ट्रक लिए और चालक को बताया कि घर चल कर पैसे दे देंगे। ट्रक चालक 40 मजदूरों को लेकर चला जो सभी बिहार के थे। ट्रक 150 किमी चला ही था कि रास्ते में सभी मजदूरों से चालक पूरा पैसा मांगने लगा। पैसे न होने की विवशता बताने पर चालक ने रास्ते मे ही मजदूरों को उतार दिया। इसके बाद वह पैदल चलने को मजबूर हो गए। यह मजदूर औरतों, बच्चों के साथ 24 वें दिन बैरिया पहुंचे। बैरिया में कुछ खाने-पीने के बाद पुलिस ने पिकअप से मांझी सीमा तक भेजवाया। हाजीपुर निवासी जितेंद्र साह ने बताया लॉकडाउन की वजह से मध्य प्रदेश का औद्योगिक हब कहे जाने वाले इंदौर के पहिये थम गए हैं। इसके चलते वहां मजदूरों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। काम ना मिलने के चलते दो वक्त का खाना जुटाने में भी मजदूर असमर्थ हैं लिहाजा गांव लौटना पड़ रहा है। इंदौर से लौट रहे मुहम्मद सलीम के परिवार में पांच सदस्य हैं, इनके तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं। बताया कि तीन साल पहले दरभंगा से मजदूरी करने इंदौर गए थे, लेकिन पिछले एक महीने से काम नहीं मिला जिससे परिवार चलाना मुश्किल हो गया था लिहाजा वापस अपने गांव लौटने को मजबूर हुए। इंदौर में बेलदारी करने गई समस्तीपुर की मीना देवी का कहना है कि काम ना मिलने की वजह से इन्हें अपने बच्चों को भूखा रखना पड़ रहा था।
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