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पाॅक्सो एक्ट : किशोर को 25 साल की सजा
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बलिया। पाॅक्सो एक्ट के मामले में बाल न्यायालय ने किशोर अपचारी को दोषी पाते हुए 25 वर्ष के सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
यह फैसला सोमवार को विशेष न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट कोर्ट संख्या-08 प्रथमकांत की अदालत ने सुनाया। अभियोजन के अनुसार चितबड़ागांव थाना क्षेत्र में 21 अगस्त 2024 को 14 वर्षीय किशोरी के साथ दुष्कर्म किए जाने का मामला सामने आया था।
शिकायत मिलने के बाद चितबड़ागांव थाने में पॉक्सो सहित अन्य मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किए।
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मामले की सुनवाई के दौरान किशोर अपचारी को पाॅक्सो एक्ट की धारा 4(2) के तहत दोषी पाया। इसके बाद न्यायालय ने उसे 25 वर्ष के सश्रम कारावास तथा 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत गंभीर अपराधों में प्रभावी पैरवी कर दोषियों को सजा दिलाने पर जोर दिया जा रहा है। पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह के निर्देशन में मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन विभाग द्वारा इस मामले की लगातार पैरवी की गई।
न्यायालय में प्रभावी पैरवी के लिए मुकदमे से संबंधित साक्ष्यों, गवाहों और अभियोजन की कार्यवाही की नियमित निगरानी की गई। इसके परिणामस्वरूप न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किशोर अपचारी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
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यह फैसला सोमवार को विशेष न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट कोर्ट संख्या-08 प्रथमकांत की अदालत ने सुनाया। अभियोजन के अनुसार चितबड़ागांव थाना क्षेत्र में 21 अगस्त 2024 को 14 वर्षीय किशोरी के साथ दुष्कर्म किए जाने का मामला सामने आया था।
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शिकायत मिलने के बाद चितबड़ागांव थाने में पॉक्सो सहित अन्य मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किए।
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मामले की सुनवाई के दौरान किशोर अपचारी को पाॅक्सो एक्ट की धारा 4(2) के तहत दोषी पाया। इसके बाद न्यायालय ने उसे 25 वर्ष के सश्रम कारावास तथा 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत गंभीर अपराधों में प्रभावी पैरवी कर दोषियों को सजा दिलाने पर जोर दिया जा रहा है। पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह के निर्देशन में मॉनिटरिंग सेल और अभियोजन विभाग द्वारा इस मामले की लगातार पैरवी की गई।
न्यायालय में प्रभावी पैरवी के लिए मुकदमे से संबंधित साक्ष्यों, गवाहों और अभियोजन की कार्यवाही की नियमित निगरानी की गई। इसके परिणामस्वरूप न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किशोर अपचारी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।