फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ballia News ›   MSME scheme is not climbing in the district due to the arbitrariness of banks

बैंकों की मनमानी से जिले में परवान नहीं चढ़ रही एमएसएमई योजना

Fri, 12 Jun 2020 10:21 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 12 Jun 2020 10:21 PM IST
विज्ञापन
MSME scheme is not climbing in the district due to the arbitrariness of banks
बलिया। भले ही आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत केंद्र सरकार ने एमएसएमई को बढ़ावा देनें तथा गांवों में रोजगार के अवसर मुुहैया कराने की मंशा से आर्थिक पैकेज दे रखा हो,लेकिन जिले बैंकों की मनमानी के कारण यह योजना परवान नहीं चढ़ रही है। परिणाम स्वरूप अद्योगिक नजरिये से जनपद आज भी पिछड़ापन की मार झेल रहा है। बहुतेरे ऐसे बैंक हैं, जिन्होंने बगैर उचित कारणों के उद्यमियों को की फाइल को ऋण देने से या तो मना कर दिया या फिर उनकी फाईल वापस लौटा दी। जिस कारण नव उद्यमियों को लघु और कुटीर उद्योगों के संचालन में कठिनाई आ रही है। हालांकि सरकार का पूरा फोकस लघु उद्योगों के माध्यम से गांव में प्रवासी कामगारों को रोजगार मुहैया कराने पर है। इसके लिए एमएसएमई योजना के तहत लघु व कुटीर उद्योग को विस्तारित करने की कार्य योजना पर कार्य किया जा रहा है, लेकिन बैंकों की मनमानी और असहयोग की भावना ने सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को पलीता लगा रहीं है। विशुनपुरा निवासी अजय कुमार ने करीब एक वर्ष पूर्व ऋण के लिए आवेदन किया था, उनकी पत्रावली प्रधानमंत्री रोगार सृजन योजना के तहत जिला उद्योग प्रोत्साहन व उद्यमिता विकास विभाग द्वारा स्वीकृत होकर बैंक गई,लेकिन बैंक ने बिना कोई समुचित कारण बताये फाइल को वापस कर दी। जिससे वह काफी निराश हुआ। इस प्रकार निधरिया के संजय कुमार के जाली-जंगला उद्योग, श्रीगणपति की मिल्क प्रोडेक्ट,राजेन्द्र नगर निवासी रिंकू कुमार के आटोमोबाइल से जुड़े उद्यम लगाने की पत्रावली पर संबंधित बैंकों ने ऋण देने की बजाय फाइल वापस लौटा दी। इसके अलावा जिले के ऐसे सैकड़ों युवा है जो एमएसएमई के तहत उद्यम लगाने के इच्छुक तो है,लेकिन बैंकों की मनमानी का शिकार होकर बेरोजगार है।
विज्ञापन

------------
जिले में लघु व कुटीर उद्योगों के विकास में बाधक संवादहीनता भी है,जिसके तहत उद्यमी बैंकों के सामने अपना प्रजेंटेशन ठीक ढ़ंग से नहीं कर पाते। साथ बैंकों के इर्द-गिर्द मंडरा रही दलालों की फौज भी नये उद्योगों के आड़े आ रही है। बावजूद इसके जिले में लघु व कुटीर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए विभाग द्वारा सतत प्रयास किया जा रहा है। जिसके तहत बैंकों से वापस लौटने वाली फाइलों को पुनर्विचार कर ऋण स्वीकृत करने के लिए भेजा जा रहा है।
विज्ञापन

राजीव पाठक
उपायुक्त,जिला उद्योग प्रोत्साहन व उद्यमिता विकास केंद्र
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed