{"_id":"5fda41288ebc3e3e731c335b","slug":"janseva-ballia-news-vns5637899129","type":"story","status":"publish","title_hn":"जनसेवा केंद्र संचालकों के पांच लाख से अधिक धनराशि का गोलमाल!-","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जनसेवा केंद्र संचालकों के पांच लाख से अधिक धनराशि का गोलमाल!-
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बलिया। नवीनीकरण की आड़ में सेवा प्रदाता एजेंसी ने जनसेवा केंद्र संचालकों का लाखों का गोलमाल कर दिया। एजेंसी की ओर से केंद्र संचालन के लिए न्यूनतम 450 रुपये की धनराशि रखने का प्रावधान किया था लेकिन नवीनीकरण में केंद्र संचालकों को जहां पंजीकरण शुल्क देना पड़ा वहीं न्यूनतम धनराशि शून्य हो जाने से नुकसान उठाना पड़ा। इस तरह 1195 केंद्रों की 5 लाख से अधिक की धनराशि का गोलमाल कर दिया गया।
आठ साल पहले सरकार ने आठ विभागों की 26 सेवाओं को ऑनलाइन करते हुए ग्रामीणों को घर बैठे सुविधाएं देने की व्यवस्था की। इसके लिए ग्रामीण इलाकों में जनसेवा केंद्रों का संचालन शुरु कराया गया और इसके संचालन की जिम्मेदारी बतौर सेवा प्रदाता एजेंसी वयमटेक को दी गई। हालांकि करीब पांच साल पहले जिले को ई-डिस्ट्रिक्ट योजना में शामिल कर लिया गया और सभी सेवाओं को इसी के माध्यम से देने की व्यवस्था की गई लेकिन सेवा प्रदाता एजेंसी बरकरार रहा। इसके बाद सेवा प्रदाता एजेंसी की ओर से आवेदन शुल्क जमा करने के लिए एजेंसी के वॉलेट में न्यूनतम धनराशि 450 रुपये रखने का प्रावधान किया गया। इसके चलते सभी केंद्र संचालक न्यूनतम राशि से अधिक की ही धनराशि रखते थे। करीब एक माह पहले प्रदेश सरकार ने जिले में संचालित जनसेवा केंद्रों के संचालन के दो सेवा प्रदाता एजेंसी वयमटेक व बीएलएस को जिम्मेदारी दे दी है। सेवा प्रदाता एजेंसिंयों की ओर से जनसेवा केंद्रों का ऑनलाइन पंजीकरण व शुल्क जमा कराते हुए नवीनीकरण किया जा रहा है। इसके बाद केंद्र संचालक को नई आईडी उपलब्ध कराया जा रहा है लेकिन पूर्व के सेवा प्रदाता एजेंसी के वॉलेट में जमा न्यूनतम धनराशि किसी को नहीं मिली। हालांकि सैंकड़ों केंद्र संचालकों ने दूसरे सेवा प्रदाता एजेंसी का रुख कर लिया है। अगर जिले में संचालित 1195 केंद्रों के न्यूनतम धनराशि को देखें तो यह पांच लाख 37 हजार 750 रुपये होती है। जिला प्रबंधक, ई-डिस्ट्रिक्ट, अभिजात सिंह ने बताया कि अभी सेवा प्रदाता एजेंसियों की ओर से नवीनीकरण का कार्य किया जा रहा है। पूर्व के सेवा प्रदाता के खाते में रखी गई न्यूनतम राशि नहीं मिलने के बाबत किसी जनसेवा केंद्र संचालक ने शिकायत नहीं की है। अगर शिकायत मिली तो मामले से अपर जिलाधिकारी, जिलाधिकारी को अवगत कराया जाएगा।
विज्ञापन
आठ साल पहले सरकार ने आठ विभागों की 26 सेवाओं को ऑनलाइन करते हुए ग्रामीणों को घर बैठे सुविधाएं देने की व्यवस्था की। इसके लिए ग्रामीण इलाकों में जनसेवा केंद्रों का संचालन शुरु कराया गया और इसके संचालन की जिम्मेदारी बतौर सेवा प्रदाता एजेंसी वयमटेक को दी गई। हालांकि करीब पांच साल पहले जिले को ई-डिस्ट्रिक्ट योजना में शामिल कर लिया गया और सभी सेवाओं को इसी के माध्यम से देने की व्यवस्था की गई लेकिन सेवा प्रदाता एजेंसी बरकरार रहा। इसके बाद सेवा प्रदाता एजेंसी की ओर से आवेदन शुल्क जमा करने के लिए एजेंसी के वॉलेट में न्यूनतम धनराशि 450 रुपये रखने का प्रावधान किया गया। इसके चलते सभी केंद्र संचालक न्यूनतम राशि से अधिक की ही धनराशि रखते थे। करीब एक माह पहले प्रदेश सरकार ने जिले में संचालित जनसेवा केंद्रों के संचालन के दो सेवा प्रदाता एजेंसी वयमटेक व बीएलएस को जिम्मेदारी दे दी है। सेवा प्रदाता एजेंसिंयों की ओर से जनसेवा केंद्रों का ऑनलाइन पंजीकरण व शुल्क जमा कराते हुए नवीनीकरण किया जा रहा है। इसके बाद केंद्र संचालक को नई आईडी उपलब्ध कराया जा रहा है लेकिन पूर्व के सेवा प्रदाता एजेंसी के वॉलेट में जमा न्यूनतम धनराशि किसी को नहीं मिली। हालांकि सैंकड़ों केंद्र संचालकों ने दूसरे सेवा प्रदाता एजेंसी का रुख कर लिया है। अगर जिले में संचालित 1195 केंद्रों के न्यूनतम धनराशि को देखें तो यह पांच लाख 37 हजार 750 रुपये होती है। जिला प्रबंधक, ई-डिस्ट्रिक्ट, अभिजात सिंह ने बताया कि अभी सेवा प्रदाता एजेंसियों की ओर से नवीनीकरण का कार्य किया जा रहा है। पूर्व के सेवा प्रदाता के खाते में रखी गई न्यूनतम राशि नहीं मिलने के बाबत किसी जनसेवा केंद्र संचालक ने शिकायत नहीं की है। अगर शिकायत मिली तो मामले से अपर जिलाधिकारी, जिलाधिकारी को अवगत कराया जाएगा।
विज्ञापन