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उच्चतम बाढ़ बिंदु से मात्र 64 सेमी नीचे गंगा

Tue, 10 Aug 2021 10:15 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 10 Aug 2021 10:15 PM IST
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Ganga just 64 cm below the highest flood point
गंगा की लहरों का उफान शांत होते नहीं दिख रहा है। खतरे के निशान से काफी ऊपर चल रही गंगा की लहरें अब उच्चतम बाढ़ बिंदु को छूने को बेताब हैं। उच्चतम बाढ़ बिंदु जनपद के गायघाट गेज पर 60.390 मीटर है। गंगा का जलस्तर शाम चार बजे 59.750 मीटर पहुंच गया था। अभी जलस्तर और तेजी से बढ़ने के आसार जताए जा रहे हैं। यदि नदी इस स्तर को पार कर लेती है तो बड़ी तबाही मचनी तय है। बाढ़ पानी से कई और गांवों ने टापू का रूप ले लिया। नाव ही आवागमन का सहारा बचा है। एक लाख से ज्यादा की आबादी बाढ़ की चपेट में है।
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गंगा की बाढ़ से ग्राम पंचायत केहरपुर, गोपालपुर, दयाछपरा, जगदेवा, टेंगरही, नौरंगा आदि की लगभग एक लाख आबादी का न सिर्फ एनएच-31 से संपर्क टूट गया है, बल्कि घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है। आवागमन ठप हो गया है। रास्ते, मंदिर, कुएं सब कुछ बाढ़ के पानी में डूब गए हैं। गोपालपुर, आंशिक दयाछपरा, जगदेवा के साथ ही टेंगरी का वंशगोपाल छपरा अब पूरी तरह से जलमग्न है। ग्रामीण अपना आशियाना छतों पर बनाने लगे हैं। कई ने रिश्तेदारियों में शरण ली है। सदर तहसील के आखिरी गांव चौबे छपरा में बचा एक मात्र लक्ष्मण ओझा का मकान भी गंगा में विलीन होने के कगार पर है। आज के बाद से चौबे छपरा का नामोनिशान मिट जाएगा। वर्ष 2016 में आई भीषण बाढ़ में पूरा चौबे छपरा गंगा नदी में विलीन हो गया था। एक मात्र शेष बचा लक्ष्मण ओझा का मकान और लगभग 100 साल पुराना कुआं भी विलीन होने के कगार पर है। गंगा के तेवर देख वर्ष 2016 जैसे तबाही से इंकार नहीं किया जा सकता। गंगा नदी एनएच-31 से दक्षिण में तबाही मचा रही है। एनएच के उत्तर में तरसोत के पानी में करीब 100 एकड़ फसल डूब चुकी है। मक्का, हरी सब्जियों की फसल तहस नहस हो चुकी है। किसानों का कहना है कि खेती महंगाई का सौदा हो गया है।
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सरयू के तेवर नरम, कटान जारी
बेल्थरारोड। सरयू नदी के जलस्तर में बीते एक पखवारे से लगातार उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी है। नदी खतरे के निशान से नीचे बह रही है। हाहानाला से टीएस बंधा से पानी खिसक कर नदी की तरफ चला गया है। गुलौरा, तुर्तीपार, मुजौना, बेल्थरा बाजार गांव के बस्तियों के किनारे से सरयू का पानी बह रहा है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार मंगलवार को शाम चार बजे 63.920 मीटर दर्ज किया गया। खतरे का निशान 64.010 है। पानी घटने के साथ ही कुछ तटवर्ती क्षेत्रों में कटान होना शुरू हो गया है। कृषि योग्य भूमि कट-कट कर नदी की जलधारा में विलीन हो रही है। चैनपुर गुलौरा के तटवर्ती क्षेत्र में कटान रोकने के लिए पांच स्पर बन जाने से लोगों को काफी राहत मिल रही है। हल्दिरामपुर रेग्युलेटर पर पानी का रिसाव हो रहा है।
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गंगा के साथ ही टोंस का भी कहर, बंधे पर खतरा
फेफना। गंगा और टोंस की बाढ़ की चेपेट में आने से क्षेत्र के कई संपर्क मार्ग जलमग्न हो गए हैं। मंगलवार को सागरपाली से थमह्नपुरा होते हुए कोट अंजोरपुर तक जाने वाला मुख्य सम्पर्क मार्ग के ऊपर से बाढ़ का पानी हो जाने के कारण यह मार्ग बंद होने के कागार पर है। क्षेत्र के गंगहरा, हसनपुरा, थमह्नपुरा, इन्दरपुर, अंजोरपुर, मंझरिया व कोट आदि के लगभग 30 हजार की आबादी के लिए यह मार्ग लाइफ लाइन है। इस मार्ग के डूबते इन सभी गांवों का जिला मुख्यालय से सम्पर्क कट जाएगा। वहीं, थमह्नपुरा से बैरिया तक जाने वाला रिंग बंधा इन्दरपुर और मंझरिया गांव से सामने टूटने के कगार पर है। गंगा नदी का पानी सीधे रिंग बंधे के नीचे गहरी खाई बना लगातार बंधे पर प्रहार कर रहा है। बंधा टूट गया तो क्षेत्र के कई गांवों में जलप्रलय की स्थिति हो जाएगी।
डूब क्षेत्र के गांवों में घुसने लगा पानी
लालगंज। लगातार गंगा नदी के बढ़ते जेस्तर के कारण क्षेत्र के डूब क्षेत्र के गांवों में गंगा का पानी पसरने लगा है। दस प्राथमिक स्कूल, दो ग्राम पंचायत सचिवालय के अलावा हजारों की आबादी बाढ़ के पानी से घिर जाएगी। गंगा का पानी सोमवार के देर रात गांवों की तरफ बहने लगा। बहुआरा हृदयपुर के तरफ से शिवपुर कपूर दियर के बिंद बस्ती के पास दामोदरपुर पुरवा के पास से नदी उफनाकर खेतों के फसलों को नुकसान करते हुए रिहायसी गांवों के तरफ बढ़ने लगा है। बाढ़ चौकी की स्थापना कर दी गई है और लेखपालों की तैनाती कर दी गई है।

कई गांव टापू में तब्दील
नरहीं। गंगा, टोंस, मगई नदी ने इलाके में कई गांव को टापू में तब्दील कर दिया है।सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न हो चुकी है। पशुपालकों को चारे के संकट की चिंता सताने लगी है। इलाके में भूसा भी नहीं मिल पा रहा है। जिला प्रशासन इलाके में अभी तक नाव की भी व्यवस्था नहीं करा पाया है। इच्छा चौबे का पूरा, शाहपुर बभनौली, रैयाखाड़ी, गंगहरा, सरवन पुर टापू में तब्दील हो चुका है। एसडीएम सदर जुबेर अहमद ने बताया कि स्थानीय नाविकों को नाव चलाने के लिए चिन्हित किया जा रहा है। जल्द ही नाव को लगा दिया जाएगा। इच्छा चौबे के पूरा में बैरिया-थम्हनपुरा मार्ग पर रह रहे 30 बाढ़ पीड़ितों को मंगलवार को तिरपाल दिया गया। भोजन का भी इंतजाम जिला प्रशासन के माध्यम से कराया जाएगा। शाहपुर बभनौली प्राथमिक विद्यालय में 60 बाढ़ पीड़ित परिवार शरण लिए हुए हैं। इच्छा चौबे के पूरा गांव में 35 बाढ़ प्रभावित परिवार बैरिया-थम्हनपुरा मार्ग पर अपना नया आशियाना बसा चुके हैं। विद्युत उपकेंद्र चितबड़ागांव के जेई विपिन कुमार सिंह ने बताया कि जरूरत पड़ी तो बाढ़ प्रभावित गांव की बिजली आपूर्ति ठप की जा सकती है।
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