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स्वयं सहायता समूह बनाकर भूल गए अफसर, हजारों को नहीं मिल रहा काम

Sat, 02 Oct 2021 10:33 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 02 Oct 2021 10:33 PM IST
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Forgotten officers by forming self-help groups, thousands are not getting work
बलिया। जिले के अफसरों ने शासन से मिले लक्ष्य को हासिल करने के लिए स्वयं सहायता समूहों का गठन कागजों पर करा दिया है। जिले में गठित 6020 समूहों में करीब 2895 ऐसे हैं, जो विभाग की किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं हो रहे हैं।
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गांव की गरीबी दूर करने के लिए शासन ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना प्रारंभ की है। इस के तहत महिलाओं का समूह बनाकर उन्हें स्वरोजगार के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है। स्वरोजगार प्रारंभ करने के लिए इच्छुक महिलाओं को बैंकों से आर्थिक मदद दी जाती है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना के तहत अभी तक जिले भर में 6020 स्वयं सहायता समूहों का गठन किया गया है। इनमें से 3125 समूह ऐसे हैं, जो विभागीय योजनाओं में भागीदार बने हुए हैं, मगर 2895 समूहों को कोई पूछने वाला नहीं है। शासन ने विभाग को प्रोत्साहित करने के लिए भारी भरकम बजट आवंटित कर रखा है मगर अधिकारियों की लापरवाही के कारण समूह सिर्फ प्रशिक्षण तक ही सीमित हैं।
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वर्तमान में स्वयं सहायता समूह महिलाओं के उत्थान के लिए कार्य नहीं कर रहे हैं, बल्कि सार्वजनिक वितरण की दुकानों को हासिल करने और सार्वजनिक शौचालयों में मानदेय पर होने वाली तैनाती पर लोगों की निगाहें टिकी हैं। कोरोना काल में मॉस्क, सैनिटाइजर का निर्माण करने वाली समूह की महिलाएं इन दिनों घर पर बैठी हुई हैं। इससे महिलाओं को अब योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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मेठ, सफाई कर्मी और कोटा के नाम पर होता है खेल
योगी सरकार ने समूह की महिलाओं को मनेरगा में महिला मेठ, सामुदायिक शौचालयों में मानदेय पर सफाई कर्मचारी और कोटा चयन में प्राथमिकता देने को कहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से नाम भेजने पर ही महिलाओं का चयन होता है। इसमें भी विभागीय अधिकारी खेल कर रहे हैं। सामुदायिक शौचालयों में होने वाली तैनाती में प्रधान की ओर से छह-छह हजार रुपये मानदेय दिए जाते हैं। जिसमें नाम भेजने पर महिलाओं से कमाई की जा रही है। जबकि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को काम नहीं मिलता है। इसी कारण जिले में हजारों स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को काम के नाम पर प्रशासन की ओर से कुछ नहीं दिया गया।

निष्क्रिय समूहों के चिह्निकरण प्रक्रिया चल रही है। इसके पूरा होती ही शिथिल पड़े समूहों के सदस्यों के साथ बैठक करके उन्हें सक्रिय किया जाएगा। जिले में वर्ष 2017-18 से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन योजना के तहत समूह गठन की कार्रवाई प्रारंभ हुई है। इसके पहले भी कुछ समूहों का गठन किया गया था। पहले वाले समूह सक्रिय नहीं हैं। जबकि नए समूह पूरी तरह कार्य कर रहे हैं। - डीएन पांडेय, डीसी, आरएनएलएम, बलिया
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