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तहसील और पुलिस प्रशासन के खिलाफ हो निष्पक्ष जांच
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बांसडीहरोड थाना क्षेत्र के घघरौली गांव में बिंद समाज के लोगों के उत्पीड़न के विरोध में प्रदर्शन
- फोटो : BALLIA
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बलिया। राष्ट्रीय निषाद संघ के बैनर तले बड़ी संख्या में घघरौली कांड के पीड़ितों ने मंगलवार को सदर तहसील के गेट पर धरना दिया। इस दौरान 29 मई को घघरौली गांव में ग्रामीणों के साथ की गई ज्यादती मामले में सदर तहसील और बांसडीहरोड पुलिस के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करने की मांग की गई। आंदोलनकारियों ने राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के प्रतिनिधि को सौंपा।
धरनासभा में राष्ट्रीय निषाद संघ के राष्ट्रीय सचिव लौटन राम निषाद ने कहा कि घघरौली में तहसील प्रशासन औेर बांसडीहरोड पुलिस ने गोंड, बिंद और निषाद परिवारों पर अत्याचार किया। आरोप लगाया कि थानाध्यक्ष की रिश्तेदारी उसी गांव में है। ऐसे में उन्हीं के इशारे पर बिंद परिवारों पर कहर बरपाया गया है। जिस प्रभारी निरीक्षक ने गांव के लोगों पर मुकदमा दर्ज कराया है। उसी को मुकदमे का विवेचक बनाया गया है। उन्होंने जिला प्रशासन के किसी अन्य अधिकारी से प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और थाना प्रभारी को निलंबित करने की मांग की। कहा कि एसडीएम के इशारे पर घर में घुसकर तोड़फोड़ की गई और बच्चों तथा महिलाओं से मारपीट की गया। इस दौरान पुलिस ने नाबालिग बच्चों, महिलाओं समेत 70 लोगों को पुलिस ने आरोपी बनाया है। बलिया सदर विस के सपा नेता लक्ष्मण गुप्ता ने कहा कि घघरौली की घटना अत्यंत दु:खद है। तहसील प्रशासन ने 26 अप्रैल के आदेश का समयानुकूल अनुपालन किया होता तो शायद किया होता तो शायद यह दिन देखने को नहीं मिलता। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर घघरौली के पीड़ितों पर कायम किया गया संगीन अपराध वाले मुकदमे वापस नहीं लिए जाते और एसओ के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती है तो हम जल्द ही बेमियादी घेरा डालो-डेरा डालो आंदोलन छेड़ने के लिए विवश होंगे।
फूलन सेना के जिलाध्यक्ष साहनी वीरेंद्र निषाद तथा निषाद संघ के जिलाध्यक्ष राधेश्याम बिंद ने जिला प्रशासन से दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग की। इस मौके पर धरना सभा को संबोधित करने वालों में रामकृष्ण यादव, प्रधान बरमेश्वर वर्मा, रामकेवल बिंद, राजेश बिंद, डॉ. रोहित निषाद, मंटू साहनी, रविंद्र निषाद, रविशंकर बिंद, ज्ञानेश्वर बिंद, डॉ. चंद्रमा यादव, डॉ. चंद्रशेखर बिंद, संजय साहनी, स्वामीनाथ साहनी, सहजानंद बिंद, रमेश भारद्वाज आदि प्रमुख रहे।
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धरनासभा में राष्ट्रीय निषाद संघ के राष्ट्रीय सचिव लौटन राम निषाद ने कहा कि घघरौली में तहसील प्रशासन औेर बांसडीहरोड पुलिस ने गोंड, बिंद और निषाद परिवारों पर अत्याचार किया। आरोप लगाया कि थानाध्यक्ष की रिश्तेदारी उसी गांव में है। ऐसे में उन्हीं के इशारे पर बिंद परिवारों पर कहर बरपाया गया है। जिस प्रभारी निरीक्षक ने गांव के लोगों पर मुकदमा दर्ज कराया है। उसी को मुकदमे का विवेचक बनाया गया है। उन्होंने जिला प्रशासन के किसी अन्य अधिकारी से प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और थाना प्रभारी को निलंबित करने की मांग की। कहा कि एसडीएम के इशारे पर घर में घुसकर तोड़फोड़ की गई और बच्चों तथा महिलाओं से मारपीट की गया। इस दौरान पुलिस ने नाबालिग बच्चों, महिलाओं समेत 70 लोगों को पुलिस ने आरोपी बनाया है। बलिया सदर विस के सपा नेता लक्ष्मण गुप्ता ने कहा कि घघरौली की घटना अत्यंत दु:खद है। तहसील प्रशासन ने 26 अप्रैल के आदेश का समयानुकूल अनुपालन किया होता तो शायद किया होता तो शायद यह दिन देखने को नहीं मिलता। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर घघरौली के पीड़ितों पर कायम किया गया संगीन अपराध वाले मुकदमे वापस नहीं लिए जाते और एसओ के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती है तो हम जल्द ही बेमियादी घेरा डालो-डेरा डालो आंदोलन छेड़ने के लिए विवश होंगे।
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फूलन सेना के जिलाध्यक्ष साहनी वीरेंद्र निषाद तथा निषाद संघ के जिलाध्यक्ष राधेश्याम बिंद ने जिला प्रशासन से दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग की। इस मौके पर धरना सभा को संबोधित करने वालों में रामकृष्ण यादव, प्रधान बरमेश्वर वर्मा, रामकेवल बिंद, राजेश बिंद, डॉ. रोहित निषाद, मंटू साहनी, रविंद्र निषाद, रविशंकर बिंद, ज्ञानेश्वर बिंद, डॉ. चंद्रमा यादव, डॉ. चंद्रशेखर बिंद, संजय साहनी, स्वामीनाथ साहनी, सहजानंद बिंद, रमेश भारद्वाज आदि प्रमुख रहे।
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