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हत्या के मामले में एक को ताउम्र कैद
ब्यूरो/ अमर उजाला बलिया
Updated Thu, 26 Nov 2015 10:00 PM IST
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करीब 18 वर्ष पूर्व कुल्हाड़ी से एक दलित को काटकर की गई हत्या के मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने एक आरोपी को दोषी साबित करते हुए उसे आजीवन कारावास तथा दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया। इस मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार द्वितीय की अदालत में हुई।
अभियोजन के अनुसार वादी मुकदमा चितबड़ागांव थाना क्षेत्र के नगपुरा निवासी धुर विगन राम ने 13 अगस्त 1997 को चितबड़ागांव थाने में केस दर्ज कराया कि उसके गांव के मोती कुर्मी से खेत न जोतने को लेकर विवाद था। इसी रंजिश को लेकर 12 अगस्त 1997 की रात में जदई कुर्मी व मोती कुर्मी ने कुल्हाड़ी से आंगन में सोए मेरे बेटे बेचू राम पर प्रहार कर दिया।
जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया और जिला अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस मामले में आरोपपत्र प्रेषित होने के बाद कोर्ट ने सुनवाई करते हुए आरोपी मोती कुर्मी पर दोष साबित पाकर उसे आजीवन कारावास तथा दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया। विचारण जदई कुर्मी की मृत्यु हो चुकी है। अभियोजन की ओर से एडीजीसी आरपी गुप्त तथा बचाव पक्ष से शेषनाथ तिवारी ने पैरवी की।
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अभियोजन के अनुसार वादी मुकदमा चितबड़ागांव थाना क्षेत्र के नगपुरा निवासी धुर विगन राम ने 13 अगस्त 1997 को चितबड़ागांव थाने में केस दर्ज कराया कि उसके गांव के मोती कुर्मी से खेत न जोतने को लेकर विवाद था। इसी रंजिश को लेकर 12 अगस्त 1997 की रात में जदई कुर्मी व मोती कुर्मी ने कुल्हाड़ी से आंगन में सोए मेरे बेटे बेचू राम पर प्रहार कर दिया।
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जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया और जिला अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इस मामले में आरोपपत्र प्रेषित होने के बाद कोर्ट ने सुनवाई करते हुए आरोपी मोती कुर्मी पर दोष साबित पाकर उसे आजीवन कारावास तथा दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा से दंडित किया। विचारण जदई कुर्मी की मृत्यु हो चुकी है। अभियोजन की ओर से एडीजीसी आरपी गुप्त तथा बचाव पक्ष से शेषनाथ तिवारी ने पैरवी की।
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