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दवा खरीद में हुई भारी धांधली

Thu, 29 Mar 2018 10:49 PM IST
ballia
ballia Updated Thu, 29 Mar 2018 10:49 PM IST
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Heavy rigging in drug purchase
Drugs - फोटो : अमर उजाला
जनपद में दवा खरीद के नाम पर स्वास्थ्य महकमे में लाखों का घोटाला सामने आने के बाद भी कार्रवाई अभी तक लटकी है। जांच के लिए शासन के निर्देश पर तत्कालीन जिलाधिकारी के निर्देश पर कमेटी का गठन किया गया था। लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। मामले में परोक्ष रूप से एक फार्मासिस्ट की भूमिका संलिप्त पाई गई, जिसमें बिना दर अनुबंध के औषधि क्रय में अनियमितता व सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि हुई। इतना ही नहीं, उक्त फार्मासिस्ट के करीबी को औषधि खरीद की अनुमति भी मिल गई। मामला वर्ष 2003 से 2006 तक और 2013-14 का है। एक ही व्यक्ति के अलग-अलग तीन फर्मो से करोड़ों की दवा खरीदी जाती रही।
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बताया जाता है कि नरही में तैनात फार्मासिस्ट सत्यप्रकाश सिंह जो वर्तमान में केंद्रीय औषधि भंडार में सबद्ध है। आरोप है कि उसने अपने करीबियों के फर्म के माध्यम से दवा खरीद में वर्ष 2003-04 से 2005-06 में एक करोड़ 13 लाख व 2013-14 में एक करोड़ आठ लाख का घोटाला किया। इस अवधि में वह केंद्रीय औषधि भंडार बलिया में कार्यरत था। 15 अक्टूबर 2008 को महानिदेशक चिकित्सा व स्वास्थ्य सेवाएं की अध्यक्षता में गठित समिति ने औषधि खरीद में फार्मासिस्ट को दोषी पाया था। इसके बाद वित्तिय वर्ष 2013-14 में आडिट रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन वित्त नियंत्रक लखनऊ ने जनपद में आरसी एवं फ्लैक्सीपुल कार्यक्रम के अंतर्गत सर्जिकल आइटम के क्रय में गंभीर वित्तीय अनियमिता का मामला पकड़ा, जिसमें एक करोड़ आठ लाख 23 हजार 25 रुपये की रिकवरी का आदेश देते हुए मुख्य चिकित्साधिकारी को निर्देशित किया गया था। लेकिन न तो रिकवरी हुई न ही कोई कार्रवाई हुई।
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इसके बाद जून 2017 में तत्कालीन जिलाधिकारी सुरेंद्र विक्रम ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय टीम का गठन किया। जिसमें ज्वाइंट मजिस्ट्रेट उपजिलाधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी, मुख्य कोषाधिकारी शामिल रहे। टीम के सदस्यों द्वारा आज तक जांच पूरी नहीं की जा सकी है, जिस कारण कार्रवाई किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है।
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