{"_id":"596a4a244f1c1b2b278b48e5","slug":"five-accused-including-officer-je-in-golamal","type":"story","status":"publish","title_hn":"गोलमाल में अफसर जेई समेत पांच दोषी","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
गोलमाल में अफसर जेई समेत पांच दोषी
ballia
Updated Sat, 15 Jul 2017 10:30 PM IST
विज्ञापन
Rupee
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उप्र राजकीय निर्माण निगम में 13.82 लाख के गोलमाल में तत्कालीन सहायक परियोजना प्रबंधक (एपीएम), जेई समेत पांच लोग दोषी मिले हैं। इंटक के जिलाध्यक्ष की शिकायत पर शासन ने जांच का आदेश दिया था। मामले की जांच कर रिपोर्ट इलाहाबाद जोन के महाप्रबंधक आरपी सिंह ने प्रदेश मुख्यालय को रिपोर्ट भेज दी है। अमर उजाला ने 30 मई 17 के अंक में खबर प्रकाशित कर गोलमाल का खुलासा किया था।
अगस्त 2015 में इंटक के जिलाध्यक्ष विनोद सिंह ने संयुक्त सचिव को शिकायती पत्र देकर बताया था कि वर्ष 2010 में निर्माण निगम के तत्कालीन सहायक परियोजना प्रबंधक संजय वर्मा (वर्तमान में वाराणसी यूनिट के परियोजना अधिकारी) और जेई लल्लन यादव ने मिलीभगत कर 13 लाख 82 हजार 585 रुपये का फर्जी भुगतान किया है। संयुक्त सचिव सुरजन सिंह ने निर्माण निगम के प्रबंध निदेशक को जांच कर कार्रवाई का निर्देश दिया। लेकिन दो साल में भी कार्रवाई नहीं हुई तो विनोद सिंह ने कुछ माह पहले पीडब्लूडी के प्रमुख सचिव से शिकायत की।
शासन के निर्देश पर निर्माण निगम इलाहाबाद जोन के महाप्रबंधक आरपी सिंह ने जांच कर एक सप्ताह पहले रिपोर्ट शासन को भेज दी। जांच अधिकारी ने माना है कि बार-बार निर्देश के बावजूद पूरे अभिलेख तथा सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराई गई। जो अभिलेख मिले, उसके आधार पर यह पाया गया कि बलिया इकाई प्रभारी द्वारा मेसर्स राजेश कुमार से सरिया, सीमेंट की आपूर्ति ली गई लेकिन मुख्यालय या उच्चाधिकारी से अनुमोदन उपलब्ध नहीं कराया। बार-बार निर्देश के बाद भी इकाई का गेट रजिस्टर, एमएस रजिस्टर, स्टोर लेजर, खपत प्रपत्र आदि की प्रति नहीं उपलब्ध कराई गई। जांच अधिकारी ने माना है कि तत्कालीन प्रभारी, सहायक अभियंता, स्थानिक अभियंता, उप अभियंता, लेखाकार द्वारा नियमानुसार सीमेंट तथा स्टील की खरीद नहीं की गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
अगस्त 2015 में इंटक के जिलाध्यक्ष विनोद सिंह ने संयुक्त सचिव को शिकायती पत्र देकर बताया था कि वर्ष 2010 में निर्माण निगम के तत्कालीन सहायक परियोजना प्रबंधक संजय वर्मा (वर्तमान में वाराणसी यूनिट के परियोजना अधिकारी) और जेई लल्लन यादव ने मिलीभगत कर 13 लाख 82 हजार 585 रुपये का फर्जी भुगतान किया है। संयुक्त सचिव सुरजन सिंह ने निर्माण निगम के प्रबंध निदेशक को जांच कर कार्रवाई का निर्देश दिया। लेकिन दो साल में भी कार्रवाई नहीं हुई तो विनोद सिंह ने कुछ माह पहले पीडब्लूडी के प्रमुख सचिव से शिकायत की।
विज्ञापन
शासन के निर्देश पर निर्माण निगम इलाहाबाद जोन के महाप्रबंधक आरपी सिंह ने जांच कर एक सप्ताह पहले रिपोर्ट शासन को भेज दी। जांच अधिकारी ने माना है कि बार-बार निर्देश के बावजूद पूरे अभिलेख तथा सूचनाएं उपलब्ध नहीं कराई गई। जो अभिलेख मिले, उसके आधार पर यह पाया गया कि बलिया इकाई प्रभारी द्वारा मेसर्स राजेश कुमार से सरिया, सीमेंट की आपूर्ति ली गई लेकिन मुख्यालय या उच्चाधिकारी से अनुमोदन उपलब्ध नहीं कराया। बार-बार निर्देश के बाद भी इकाई का गेट रजिस्टर, एमएस रजिस्टर, स्टोर लेजर, खपत प्रपत्र आदि की प्रति नहीं उपलब्ध कराई गई। जांच अधिकारी ने माना है कि तत्कालीन प्रभारी, सहायक अभियंता, स्थानिक अभियंता, उप अभियंता, लेखाकार द्वारा नियमानुसार सीमेंट तथा स्टील की खरीद नहीं की गई।
विज्ञापन