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कूटरचना और गलत प्रमाण पत्र पर नौकरी करने वाले पर केस दर्ज
Updated Sun, 17 Jun 2018 11:48 PM IST
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बलिया। पुलिस भर्ती में दूसरे नाम से शामिल हुए वन विभाग के फारेस्ट गार्ड को शनिवार को मेडिकल के दौरान संदेह के आधार पर पकड़ लिया गया। पूछताछ में मामले का खुलासा होने के बाद कूटरचना और धोखाधड़ी करने का केस दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी ने उम्र कम कराने और हाई स्कूल तथा इंटर में मेरिट बढ़वाने के लिए 2012 हाईस्कूल तथा 2014 मेंइंटर की परीक्षा दूसरे नाम से दी थी। जबकि वह 2005 में हाईस्कूल और 2007 में इंटर की परीक्षा पास कर चुका था।
बैरिया थाना क्षेत्र के जयप्रकाश नगर निवासी सुरेंद्र कुमार यादव पुत्र कामता यादव ने वर्ष 2005 में हाईस्कूल तथा इंटर 2007 में किया था। बाद में उम्र घटाने तथा मेरिट बढ़वाने के लिए उसने 2012 में हाईस्कूल तथा 2014 में इंटर की परीक्षा सूरज यादव के नाम से दी और अच्छे अंकों से परीक्षा पास की। इसी बीच पुराने अंकपत्रों के आधार पर ही 2015 में उसे सोनभद्र में वन विभाग में फारेस्ट गार्ड की नौकरी मिल गई।
बाद में उसने 2015 में पुलिस की सीधी भर्ती के लिए 2012 व 14 के प्रमाणपत्र लगाते हुए सूरज यादव के नाम से आवेदन कर दिया और परीक्षा भी पास कर ली। इस बीच चयनित पुलिस प्रशिक्षुओं का मेडिकल किन्हीं कारणों से रुक गया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद 16 जून को मेडिकल का कार्य चल रहा था। इसी दौरान सूरज के नाम से आवेदन करने वाले सुरेंद्र ने भर्ती के अपने प्रपत्रों पर वास्तविक सुरेंद्र यादव नाम से हस्ताक्षर कर दिया। इससे शक होने पर उससे कड़ाई से पूछताछ की गई तो पूरा मामला सामने आ गया। उसने बताया कि वह वास्तव में सुरेंद्र ही है। पुलिस ने क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर राम सहाय की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया।
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बैरिया थाना क्षेत्र के जयप्रकाश नगर निवासी सुरेंद्र कुमार यादव पुत्र कामता यादव ने वर्ष 2005 में हाईस्कूल तथा इंटर 2007 में किया था। बाद में उम्र घटाने तथा मेरिट बढ़वाने के लिए उसने 2012 में हाईस्कूल तथा 2014 में इंटर की परीक्षा सूरज यादव के नाम से दी और अच्छे अंकों से परीक्षा पास की। इसी बीच पुराने अंकपत्रों के आधार पर ही 2015 में उसे सोनभद्र में वन विभाग में फारेस्ट गार्ड की नौकरी मिल गई।
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बाद में उसने 2015 में पुलिस की सीधी भर्ती के लिए 2012 व 14 के प्रमाणपत्र लगाते हुए सूरज यादव के नाम से आवेदन कर दिया और परीक्षा भी पास कर ली। इस बीच चयनित पुलिस प्रशिक्षुओं का मेडिकल किन्हीं कारणों से रुक गया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद 16 जून को मेडिकल का कार्य चल रहा था। इसी दौरान सूरज के नाम से आवेदन करने वाले सुरेंद्र ने भर्ती के अपने प्रपत्रों पर वास्तविक सुरेंद्र यादव नाम से हस्ताक्षर कर दिया। इससे शक होने पर उससे कड़ाई से पूछताछ की गई तो पूरा मामला सामने आ गया। उसने बताया कि वह वास्तव में सुरेंद्र ही है। पुलिस ने क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर राम सहाय की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया।
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