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दोषियों पर लटक रही सीबीआई जांच की तलवार!
Updated Wed, 02 Aug 2017 10:58 PM IST
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बलिया। जनपद के माध्यमिक शिक्षा विभाग में सालों पहले हुए करोड़ों के जीपीएफ घोटाला के दोषियों पर अब सीबीआई जांच की तलवार लटक रही है। हालांकि विभागीय आला अफसरों के पास सात अगस्त तक दोषियों पर कार्रवाई कर जांच से बचने का रास्ता है। सूत्रों की मानें तो हाईपावर कमेटी इस मामले को अंतिम रुप देने की तैयारी में है।
1994-95 और 2003 से 2011 तक लगातार जीपीएफ खाते से कुल 104 अनियमित शिक्षकों के वेतन का भुगतान किया गया। हालंाकि 2002 में इसका खुलासा होने पर विजिलेंस टीम ने 379 शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के खिलाफ बलिया कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराते हुए शासन को जांच रिपोर्ट सौंपी। इतना ही नहीं इसके बाद भी वर्ष 2003 से लेकर वर्ष 2011 तक लगातार जीपीएफ खाते से ही शिक्षकों के वेतन का भुगतान किया जाता रहा। बीते मार्च महीने में वित्त विभाग विजिलेंस के छह अधिकारियों की दो टीमें जिले में पहुंची। टीम ने मामले से संबंधित कई पड़ताल की। लेकिन बार-बार मांगे जाने के बाद भी टीम को जीपीएफ से संबंधित पत्रावली उपलब्ध नहीं कराई गई। हालांकि इस मामले में विजिलेंस ने सात डीआईओएस तथा इस दौरान रहे लेखाकार को दोषी माना है। इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है और कोर्ट ने विभागीय अपसरों को खरी-खोटी सुनाते हुए एक सप्ताह के अंदर कार्रवाई नहीं होने पर सीबीआई जांच कराने की चेतावनी भी दी है।
सूत्रों की मानें तो शासन की ओर से बनाई गई हाईपावर कमेटी दोषियों पर कार्रवाई की तैयारी में जुटी है। सात अगस्त तक अगर कार्रवाई नहीं हुई तो कोर्ट मामले की सीबीआई जांच का आदेश भी दे सकता है।
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1994-95 और 2003 से 2011 तक लगातार जीपीएफ खाते से कुल 104 अनियमित शिक्षकों के वेतन का भुगतान किया गया। हालंाकि 2002 में इसका खुलासा होने पर विजिलेंस टीम ने 379 शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के खिलाफ बलिया कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराते हुए शासन को जांच रिपोर्ट सौंपी। इतना ही नहीं इसके बाद भी वर्ष 2003 से लेकर वर्ष 2011 तक लगातार जीपीएफ खाते से ही शिक्षकों के वेतन का भुगतान किया जाता रहा। बीते मार्च महीने में वित्त विभाग विजिलेंस के छह अधिकारियों की दो टीमें जिले में पहुंची। टीम ने मामले से संबंधित कई पड़ताल की। लेकिन बार-बार मांगे जाने के बाद भी टीम को जीपीएफ से संबंधित पत्रावली उपलब्ध नहीं कराई गई। हालांकि इस मामले में विजिलेंस ने सात डीआईओएस तथा इस दौरान रहे लेखाकार को दोषी माना है। इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है और कोर्ट ने विभागीय अपसरों को खरी-खोटी सुनाते हुए एक सप्ताह के अंदर कार्रवाई नहीं होने पर सीबीआई जांच कराने की चेतावनी भी दी है।
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सूत्रों की मानें तो शासन की ओर से बनाई गई हाईपावर कमेटी दोषियों पर कार्रवाई की तैयारी में जुटी है। सात अगस्त तक अगर कार्रवाई नहीं हुई तो कोर्ट मामले की सीबीआई जांच का आदेश भी दे सकता है।
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