{"_id":"597e1bf84f1c1be2068b48db","slug":"141501436920-ballia-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"उीआईओएस तैनाती से ही रहे हैं सुर्खियों में","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
उीआईओएस तैनाती से ही रहे हैं सुर्खियों में
Updated Sun, 30 Jul 2017 11:38 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बलिया। जिले में तैनाती के दौरान बर्खास्त तत्कालीन डीआईओएस रमेश कुमार सिंह को हाईकोर्ट की ओर से दो माह कैद तथा अर्थदंड निर्धारित किया गया है। तैनाती के दौरान डीआईओएस का नाता हमेशा विवादों से रहा है। बोर्ड परीक्षा के केन्द्र निर्धारण से लेकर अन्य विवादों के चलते डीआईओएस सुर्खियों में रहे हैं।
वर्ष 2015 के अगस्त महीने में जिला विद्यालय निरीक्षक रमेश कुमार सिंह ने जनपद में कार्यभार लिया। वर्ष 2015-16 व 2016-17 में परीक्षा केन्द्र को लेकर डीआईओएस पर मनमानी के आरोप भी लगे। वर्ष 2016-17 में तो ऐसे विद्यालयों को भी केन्द्र बना दिया गया, जहां छात्रों के बैठने के अलावा संबंधित विद्यालयों में अन्य सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं थी। कई लोगों ने इसकी शिकायत जिलाधिकारी से लेकर शासन तक की, लेकिन ऊंची पहुंच के चलते डीआईओएस के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। पूरे परीक्षा के दौरान लगातार प्रश्न पत्र आउट होते रहे, लेकिन डीआईओएस हमेशा इंकार करते रहे। बोर्ड परीक्षा में नकल माफियाओं ने खूब खेल किया। सबकुछ जानकारी के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। बोर्ड का रिजल्ट जब घोषित हुआ तो डीआईओएस का कारनामा पता चला। जिसमें हाईस्कूल व इंटर में एक ही विद्यालय के कई छात्रों ने जिले से लेकर प्रदेश तक के टॉप 10 में जगह बना ली। जो जनपद में चर्चा का विषय बना रहा। यही नहीं विधानसभा चुनाव के दौरान डीआईओएस के हस्ताक्षर से सभी माध्यमिक स्कूलों पर पत्र भेजकर तत्कालीन प्रदेश सरकार के पक्ष में मतदान करने की अपील भी की थी।
हालांकि डीआईओएस श्री सिंह ने इससे इंकार करते हुए बताया कि जिस तिथि में पत्र जारी किया गया है उस तिथि में वह अवकाश पर थे और इसमें कुछ माफियाओं का हाथ है। जो उन्हें बदनाम करने की साजिश कर रहे हैं। करीब ढाई माह पहले एक इंटर कालेज के शिक्षकों व कर्मचारियों के दो माह का वेतन का भुगतान बगैर प्रबंधक के हस्ताक्षर के ही कर दिए गए। मामले को लेकर जब हो हल्ला मचा तो डीआईओएस ने कार्यालय के दो बाबू व एक दफ्तरी को सस्पेंड कर दिया। डीआईओएस ने इस बार भी बताया कि वह भुगतान के दौरान अवकाश पर थे और लिपिकों ने मनमानी की थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
वर्ष 2015 के अगस्त महीने में जिला विद्यालय निरीक्षक रमेश कुमार सिंह ने जनपद में कार्यभार लिया। वर्ष 2015-16 व 2016-17 में परीक्षा केन्द्र को लेकर डीआईओएस पर मनमानी के आरोप भी लगे। वर्ष 2016-17 में तो ऐसे विद्यालयों को भी केन्द्र बना दिया गया, जहां छात्रों के बैठने के अलावा संबंधित विद्यालयों में अन्य सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं थी। कई लोगों ने इसकी शिकायत जिलाधिकारी से लेकर शासन तक की, लेकिन ऊंची पहुंच के चलते डीआईओएस के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। पूरे परीक्षा के दौरान लगातार प्रश्न पत्र आउट होते रहे, लेकिन डीआईओएस हमेशा इंकार करते रहे। बोर्ड परीक्षा में नकल माफियाओं ने खूब खेल किया। सबकुछ जानकारी के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। बोर्ड का रिजल्ट जब घोषित हुआ तो डीआईओएस का कारनामा पता चला। जिसमें हाईस्कूल व इंटर में एक ही विद्यालय के कई छात्रों ने जिले से लेकर प्रदेश तक के टॉप 10 में जगह बना ली। जो जनपद में चर्चा का विषय बना रहा। यही नहीं विधानसभा चुनाव के दौरान डीआईओएस के हस्ताक्षर से सभी माध्यमिक स्कूलों पर पत्र भेजकर तत्कालीन प्रदेश सरकार के पक्ष में मतदान करने की अपील भी की थी।
विज्ञापन
हालांकि डीआईओएस श्री सिंह ने इससे इंकार करते हुए बताया कि जिस तिथि में पत्र जारी किया गया है उस तिथि में वह अवकाश पर थे और इसमें कुछ माफियाओं का हाथ है। जो उन्हें बदनाम करने की साजिश कर रहे हैं। करीब ढाई माह पहले एक इंटर कालेज के शिक्षकों व कर्मचारियों के दो माह का वेतन का भुगतान बगैर प्रबंधक के हस्ताक्षर के ही कर दिए गए। मामले को लेकर जब हो हल्ला मचा तो डीआईओएस ने कार्यालय के दो बाबू व एक दफ्तरी को सस्पेंड कर दिया। डीआईओएस ने इस बार भी बताया कि वह भुगतान के दौरान अवकाश पर थे और लिपिकों ने मनमानी की थी।
विज्ञापन