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लाल निशान छूने को आतुर घाघरा, पानी रिहायशी इलाकों में फैला
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बीएसटी बांध के का क्षतिग्रस्त टी स्पर
- फोटो : BALLIA
बेल्थरारोड। घाघरा में उफान से तटवर्ती क्षेत्रों में धान, अरहर, मक्का, मूंगफली की फसल डूब गई है। बाढ़ का पानी हाहानाला से हल्दीरामपुर तक फैल गया है। घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंचने से आई बाढ़ को लेकर तटवर्ती गांवों में जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि निर्धारित समय के अनुसार अगर ठोकरों का निर्माण 30 जून तक पूरा हो गया होता तो यह नौबत नहीं आती।
घाघरा नदी का जलस्तर में लगातार बढ़ रहा है जिससे तटवर्ती दर्जनों ग्रामों के हजारों लोग बाढ़ की आशंका से सहम गए हैं। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार रविवार को जल स्तर 63.330 मीटर रिकॉर्ड किया गया जो लाल निशान 64.010 से 68 सेंटीमीटर नीचे है। हालांकि आयोग ने अगले 24 घंटे में जलस्तर में कमी होने का पूर्वानुमान किया है, फिर भी बाढ़ का खतरा बना हुआ है।
लाल निशान छूने को आतुर घाघरा ने तटवर्ती क्षेत्रों में कहर बरपाना शुरू कर दिया है। बाढ़ का पानी रिहायशी इलाकों में फैल गया है। हाहानाला, चैनपुर गुलौरा, टगुनिया से लेकर हल्दीरामपुर तक बाढ़ का पानी फैल गया है। कई किलोमीटर भूभाग जलमग्न हो गया है, जिससे सैकड़ों एकड़ धान, अरहर, मक्का, मूंगफली आदि फसलें पानी में डूब कर बर्बाद हो गई है। पशुओं के लिए चारे का संकट उत्पन्न हो गया है। पशुपालक नाव से जाकर पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था कर रहे हैं। हाहानाला, तुर्तीपार और हल्दीरामपुर रेगुलेटर पर पानी का दबाव बढ़ गया है। टगुनिया की राजभर बस्ती, तुर्तीपार की मल्लाह बस्ती, माली बस्ती, बेल्थराबाजार के गौतम बुद्ध घाट पर स्थित मंदिर तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है जिससे मंदिर के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। उधर, चैनपुर गुलौरा और आसपास के क्षेत्रों में कटान हो रही है। कटान रोकने के लिए बन रहे कटानरोधी ठोकरों का निर्माण ठप हो गया है। लोगों का कहना है कि सरकारी आदेश के अनुसार 30 जून तक ठोकर निर्माण का कार्य पूर्ण हो गया होता तो लोगों को कटान से निजात मिलती लेकिन कार्यदाई संस्था के निर्माण रोक दिए जाने से लोग कटान का दंश झेलने को विवश हैं।
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घाघरा नदी का जलस्तर में लगातार बढ़ रहा है जिससे तटवर्ती दर्जनों ग्रामों के हजारों लोग बाढ़ की आशंका से सहम गए हैं। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार रविवार को जल स्तर 63.330 मीटर रिकॉर्ड किया गया जो लाल निशान 64.010 से 68 सेंटीमीटर नीचे है। हालांकि आयोग ने अगले 24 घंटे में जलस्तर में कमी होने का पूर्वानुमान किया है, फिर भी बाढ़ का खतरा बना हुआ है।
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लाल निशान छूने को आतुर घाघरा ने तटवर्ती क्षेत्रों में कहर बरपाना शुरू कर दिया है। बाढ़ का पानी रिहायशी इलाकों में फैल गया है। हाहानाला, चैनपुर गुलौरा, टगुनिया से लेकर हल्दीरामपुर तक बाढ़ का पानी फैल गया है। कई किलोमीटर भूभाग जलमग्न हो गया है, जिससे सैकड़ों एकड़ धान, अरहर, मक्का, मूंगफली आदि फसलें पानी में डूब कर बर्बाद हो गई है। पशुओं के लिए चारे का संकट उत्पन्न हो गया है। पशुपालक नाव से जाकर पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था कर रहे हैं। हाहानाला, तुर्तीपार और हल्दीरामपुर रेगुलेटर पर पानी का दबाव बढ़ गया है। टगुनिया की राजभर बस्ती, तुर्तीपार की मल्लाह बस्ती, माली बस्ती, बेल्थराबाजार के गौतम बुद्ध घाट पर स्थित मंदिर तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है जिससे मंदिर के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा है। उधर, चैनपुर गुलौरा और आसपास के क्षेत्रों में कटान हो रही है। कटान रोकने के लिए बन रहे कटानरोधी ठोकरों का निर्माण ठप हो गया है। लोगों का कहना है कि सरकारी आदेश के अनुसार 30 जून तक ठोकर निर्माण का कार्य पूर्ण हो गया होता तो लोगों को कटान से निजात मिलती लेकिन कार्यदाई संस्था के निर्माण रोक दिए जाने से लोग कटान का दंश झेलने को विवश हैं।
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