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डीआईओएस ने वापस की प्रबंध समिति की अनुमन्यता
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बलिया। विभिन्न अनियमितताओं के आरोप में जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ ब्रजेश मिश्र ने विश्वनाथ तिवारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नीरूपुर की प्रबंध समिति की अनुमन्यता वापस कर ली है। डीआईओएस की इस कार्रवाई से जिले के माध्यमिक शिक्षा विभाग में खलबली मच गई है।
आरोप है कि प्रबंधक महेश प्रताप तिवारी व उनके पुत्र रवि तिवारी द्वारा जिविनि कार्यालय के डिस्पैचर से मिलीभगत कर फर्जी डिस्पैच के जरिए विद्यालय में तमाम अनियमितताएं की हैं। प्रबंधक के द्वारा संलग्न प्राइमरी के नाम पर 21 नियुक्तियां कर दी गईं। जबकि विद्यालय में प्राइमरी सेक्शन संलग्न है ही नहीं। उच्च न्यायालय इलाहाबाद व शासन द्वारा इन नियुक्तियों को फर्जी घोषित कर रद्द भी कर दिया गया है। यही नहीं प्रबंधक द्वारा इस विद्यालय में कूटरचित प्रपत्रों के आधार पर दो परिचारकों व एक क्लर्क की नियुक्ति कर दी गई। इन नियुक्तियों पर जिस प्रधानाचार्य बिजेंद्र राय का हस्ताक्षर दिखाया गया, उन्होंने शपथ पत्र देकर अपना हस्ताक्षर होने से इंकार कर दिया। जिसके बाद जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. मिश्र ने संबंधित परिचारकों व क्लर्क का वेतन रोकते हुए मंडलीय समिति आजमगढ़ को अंतिम निर्णय के लिए प्रेषित कर दिया है। यह प्रकरण अभी लंबित है।
इसके अलावा इस विद्यालय में प्रधानाचार्य व शिक्षकों के निलंबन व बर्खास्तगी का खेल चलता रहा। जबकि विद्यालय की प्रबंध समिति के संबंध में 31 दिसंबर 2012 को मंडलीय समिति आजमगढ़ द्वारा यह निर्णय ले लिया गया था कि विद्यालय में कोई भी व्यक्ति प्रबंधक नहीं है और न ही कोई चुनाव हुआ है। उसके बाद महेश प्रताप तिवारी ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की जो खारिज हो गई। इसके बाद महेश तिवारी ने 2013 में विशेष अपील दाखिल की। जिसमें कोई आदेश पारित नहीं हुआ मामला अभी भी विचाराधीन है।
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आयोग से आए प्रधानाचार्य रामप्रकाश राय को प्रबंधक द्वारा चार माह में दो बार निलंबित कर दिया गया। इससे पहले प्रबंधक द्वारा पूर्व प्रभारी प्रधानाचार्य बिजेंद्र राय को बर्खास्त कर दिया गया था। बिजेंद्र राय से पहले वरिष्ठ अध्यापक जयप्रकाश मिश्र को भी प्रधानाचार्य पद से गलत तरीके से हटाया गया था। इसे जिविनि गलत पाया है। इस कार्रवाई से पूर्व विभिन्न प्रकरणों में पहले 19 दिसंबर 2020 को ही प्रबधंक महेश प्रताप तिवारी व उनके पुत्र रवि तिवारी पर मुकदमा भी दर्ज है।
पांच जून को जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ ब्रजेश मिश्र द्वारा पारित आदेश में कहा गया है कि तथ्यों को छिपाते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से पूर्व में मिलीभगत कर अवैध तरीके से प्रबंध समिति का चुनाव कर प्रबंधक महेश तिवारी ने विभागीय अनुमन्यता प्राप्त कर ली थी। विभागीय जांच के बाद पांच जून को प्रबंध समिति की अनुमन्यता वापस कर ली गई है। प्रबंध समिति को भंग करते हुए मंडलीय समिति आजमगढ़ को विद्यालय का प्रबंध संचालक नियुक्त करने के लिए पत्र भेज दिया गया है।
उधर, माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अरविंद राय ने विश्वनाथ तिवारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की प्रबंध समिति की अनुमन्यता प्रत्याहरित करने पर जिविनि डॉ मिश्र को धन्यवाद दिया है। उन्होंने अनियमितता करने वाले प्रबंधक को तत्काल गिरफ्तार करने की मांग पुलिस अधीक्षक से की है।
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आरोप है कि प्रबंधक महेश प्रताप तिवारी व उनके पुत्र रवि तिवारी द्वारा जिविनि कार्यालय के डिस्पैचर से मिलीभगत कर फर्जी डिस्पैच के जरिए विद्यालय में तमाम अनियमितताएं की हैं। प्रबंधक के द्वारा संलग्न प्राइमरी के नाम पर 21 नियुक्तियां कर दी गईं। जबकि विद्यालय में प्राइमरी सेक्शन संलग्न है ही नहीं। उच्च न्यायालय इलाहाबाद व शासन द्वारा इन नियुक्तियों को फर्जी घोषित कर रद्द भी कर दिया गया है। यही नहीं प्रबंधक द्वारा इस विद्यालय में कूटरचित प्रपत्रों के आधार पर दो परिचारकों व एक क्लर्क की नियुक्ति कर दी गई। इन नियुक्तियों पर जिस प्रधानाचार्य बिजेंद्र राय का हस्ताक्षर दिखाया गया, उन्होंने शपथ पत्र देकर अपना हस्ताक्षर होने से इंकार कर दिया। जिसके बाद जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. मिश्र ने संबंधित परिचारकों व क्लर्क का वेतन रोकते हुए मंडलीय समिति आजमगढ़ को अंतिम निर्णय के लिए प्रेषित कर दिया है। यह प्रकरण अभी लंबित है।
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इसके अलावा इस विद्यालय में प्रधानाचार्य व शिक्षकों के निलंबन व बर्खास्तगी का खेल चलता रहा। जबकि विद्यालय की प्रबंध समिति के संबंध में 31 दिसंबर 2012 को मंडलीय समिति आजमगढ़ द्वारा यह निर्णय ले लिया गया था कि विद्यालय में कोई भी व्यक्ति प्रबंधक नहीं है और न ही कोई चुनाव हुआ है। उसके बाद महेश प्रताप तिवारी ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की जो खारिज हो गई। इसके बाद महेश तिवारी ने 2013 में विशेष अपील दाखिल की। जिसमें कोई आदेश पारित नहीं हुआ मामला अभी भी विचाराधीन है।
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आयोग से आए प्रधानाचार्य रामप्रकाश राय को प्रबंधक द्वारा चार माह में दो बार निलंबित कर दिया गया। इससे पहले प्रबंधक द्वारा पूर्व प्रभारी प्रधानाचार्य बिजेंद्र राय को बर्खास्त कर दिया गया था। बिजेंद्र राय से पहले वरिष्ठ अध्यापक जयप्रकाश मिश्र को भी प्रधानाचार्य पद से गलत तरीके से हटाया गया था। इसे जिविनि गलत पाया है। इस कार्रवाई से पूर्व विभिन्न प्रकरणों में पहले 19 दिसंबर 2020 को ही प्रबधंक महेश प्रताप तिवारी व उनके पुत्र रवि तिवारी पर मुकदमा भी दर्ज है।
पांच जून को जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ ब्रजेश मिश्र द्वारा पारित आदेश में कहा गया है कि तथ्यों को छिपाते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से पूर्व में मिलीभगत कर अवैध तरीके से प्रबंध समिति का चुनाव कर प्रबंधक महेश तिवारी ने विभागीय अनुमन्यता प्राप्त कर ली थी। विभागीय जांच के बाद पांच जून को प्रबंध समिति की अनुमन्यता वापस कर ली गई है। प्रबंध समिति को भंग करते हुए मंडलीय समिति आजमगढ़ को विद्यालय का प्रबंध संचालक नियुक्त करने के लिए पत्र भेज दिया गया है।
उधर, माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष अरविंद राय ने विश्वनाथ तिवारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की प्रबंध समिति की अनुमन्यता प्रत्याहरित करने पर जिविनि डॉ मिश्र को धन्यवाद दिया है। उन्होंने अनियमितता करने वाले प्रबंधक को तत्काल गिरफ्तार करने की मांग पुलिस अधीक्षक से की है।