बलिया बलिदान दिवस: सेनानी को कार और 75 शहीद आश्रितों को स्कूटी देकर किया गया सम्मान
बलिया बलिदान दिवस शनिवार को धूमधाम से मनाया गया। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह की ओर से बलिया जिले के एकमात्र जीवित सेनानी रामविचार पांडेय को चार पहिया वाहन और 75 सेनानी परिजनों को इलेक्ट्रिक स्कूटी देकर सम्मानित किया गया।
विस्तार
आजादी के अमृत महोत्सव के तहत बलिया बलिदान दिवस पर शनिवार को पुलिस लाइन के परेड ग्राउंड में जनसभा हुई। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह की ओर से बलिया जिले के एकमात्र जीवित स्वतंत्रता सेनानी रामविचार पांडेय को चार पहिया वाहन और 75 सेनानी परिजनों को इलेक्ट्रिक स्कूटी देकर सम्मानित किया गया। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने सभी के हाथ में चाबियां सौंपी। उन्होंने परिवहन मंत्री की इस पहल की सराहना की। शहीदों के परिजनों को सरकार की ओर मिली सहायता राशि का प्रतीकात्मक चेक वितरित किया गया।
दयाशंकर सिंह ने कहा कि बलिया के लिए आज का दिन बेहद गौरवशाली है। हमारे बलिदानियों ने जो त्याग किया है, उसी वजह से आज हम खुले में सांस ले रहे हैं। अगले वर्ष यह कार्यक्रम नौ अगस्त से ही शुरू होगा। प्रतिदिन शहीद स्थलों पर अलग-अलग कार्यक्रम होंगे और 19 अगस्त को भव्य समापन समारोह होगा।
वेतन की धनराशि से खरीदी कार
परिवहन राज्यमंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि सेनानी रामविचार पांडेय आजादी की लड़ाई के जीते जागते गवाह हैं। एक दिन शहर में उनको देखा कि अपने लड़के के साथ वृद्धावस्था में स्कूटर से कहीं जा रहे थे। उनके पुत्र से कार की उपलब्धता के बारे में पूछा तो बताया कि बैंक में आईटीआर मांगा जा रहा है, जो नहीं है। फिर मैंने अपने वेतन की धनराशि से कार खरीद कर देने का निर्णय लिया। आज बलिया बलिदान दिवस पर इस कार को देकर जो खुशी हो रही है, उसे शब्दों में बयां नहीं कर सकता।
ये भी पढ़ें: अखिलेश यादव के बयान पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का पलटवार, बोले- समाप्तवादी पार्टी बन जाएगी सपा
बलिया की धरा से निकली आवाज पूरे देश में जाएगी
बलिदान दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कहा कि आजादी हिंसा और क्रांति दोनों की अहम भूमिका है। 1942 में मुंबई में आजादी के दीवाने इकट्ठा हुए। उसी दौरान गांधी जी, सरदार बल्लभ भाई पटेल सहित अन्य को गिरफ्तार कर लिया। गांधीजी जी ने करो या मरो का नारा दिया, जिसे बलिया के लोगों ने हृदय से लिया। नौ से 19 अगस्त के बीच जिले के कोने-कोने में आजादी के मतवालों ने सरकारी संस्थानों पर कब्जा कर न सिर्फ तिरंगा लहराया बल्कि स्वघोषित सरकार भी बना डाली। इसकी गूंज लंदन तक पहुंच गई थी।
बलिया का मतलब है स्वाभिमानी, सम्मान से जीने वाले लोग, ये भृगु बाबा और पूर्व पीएम चंद्रशेखर की धरती है। बलिया की धरा से निकली आवाज पूरे भारत वर्ष में जाएगी। स्वतंत्रता व अमर सेनानियों के सपने को पूरा करने के लिए हमें पीएम की अगुवाई में मुहिम चलानी चाहिए, उसकी शुरुआत बलिया की धरती से हो।
वंदे मातरम के उद्घोष से पूरा जेल परिसर गूंज उठा
19 अगस्त बलिया बलिदान दिवस शनिवार को धूमधाम से मनाया गया। हर वर्ष की तरह परम्परा के अनुरूप प्रतीकात्मक तौर पर सेनानियों के साथ जेल में गए, फिर जेल का फाटक खुला और सभी सेनानी बाहर निकले। इस दौरान भारत माता की जय और वंदे मातरम के उद्घोष से पूरा जेल परिसर गूंज उठा। जेल से बाहर निकलने के बाद डिप्टी सीएम श्री पाठक, परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह समेत अन्य अतिथियों के साथ सेनानी राजकुमार ‘बाघ‘ की प्रतिमा पर माल्यार्पण व पुष्प अर्पित कर नमन किया।