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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Ballia News ›   Ballia August Kranti On this day in 1942 Britishers jack were thrown off many people were martyred

Ballia August Kranti: 1942 में आज ही के दिन अंग्रेजों का जैक उतार कर फेंका गया था, 19 क्रांतिकारी हुए थे शहीद

Fri, 18 Aug 2023 04:37 PM IST
उत्पल कांत अमर उजाला नेटवर्क, बलिया
अमर उजाला नेटवर्क, बलिया Published by: उत्पल कांत Updated Fri, 18 Aug 2023 04:37 PM IST
सार

18 अगस्त 1942 को बलिया के बैरिया थाना से अंग्रेजों का जैक उतार कर फेंक दिया गया था और जांबाज क्रांतिवीरों ने गोलियों की तड़तड़ाहट के बीच थाने पर तिरंगा फहरा दिया था। इसमें 19 क्रांतिकारी शहीद हो गए थे। 

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Ballia August Kranti On this day in 1942 Britishers jack were thrown off many people were martyred
बलिया बलिदान दिवस (19 अगस्त) पर हर साल होता है आयोजन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

आज ही के दिन यानि 18 अगस्त 1942 को बैरिया थाना से अंग्रेजों का जैक उतार कर फेंक दिया गया था और जांबाज क्रांतिवीरों ने गोलियों की तड़तड़ाहट के बीच थाने पर तिरंगा फहरा दिया था। इसमें 19 क्रांतिकारी अंग्रेजों की गोलियों से छलनी होकर शहीद हो गए और तीन क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों की यातना से जेल में दम तोड़ दिया था। शहीद क्रांतिकारियों की याद में प्रत्येक वर्ष शहीद स्मारक परिसर में मेला लगता है। इसमें समाजसेवी, विभिन्न राजनीतिक दल के नेता, प्रबुद्ध लोग और छात्र-छात्राएं शहीदों को नमन करते हैं।

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अगस्त क्रांति को लेकर क्रांतिकारियों के हौसले काफी बुलंद थे। क्रांतिकारियों ने रेलवे स्टेशन फूंक दिया था। रेल पटरियों को उखाड़ दी थी। 18 अगस्त 1942 से दो दिन पहले बैरिया में भूपनारायण सिंह, सुदर्शन सिंह के साथ हजारों की भीड़ के आगे थानेदार काजिम ने खुद ही थाने पर तिरंगा फहराया था और थाना खाली करने के लिए क्रांतिकारियों से दो दिन की मोहलत मांगी थी।

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25 हजार से अधिक लोगों ने घेर लिया था थाना

उसी दिन रात में थानेदार ने जिला मुख्यालय से पांच सशस्त्र पुलिसकर्मियों को बुला लिया था और रात में तिरंगे को उतारकर फेंकवा दिया। इसकी भनक लगते ही क्रांतिकारियों ने थानेदार से बदला लेने के लिए 18 अगस्त का दिन तय किया था। दोपहर होते-होते 25 हजार से अधिक लोगों ने थाने को घेर लिया।

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महिलाओं की अगुवाई धनेश्वरी देवी, तेतरी देवी, राम झरिया देवी कर रही थीं। भूपनारायण सिंह, सुदर्शन सिंह, परशुराम सिंह, बलदेव सिंह, हरदेव सिंह, राजकिशोर सिंह, बैजनाथ साह, राजकुमार मिश्र आदि भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे। थाने पर भीड़ को देख थानेदार ने थाने की छत पर सिपाहियों संग पहुंच कर मोर्चा संभाल लिया। इसी बीच कुछ लोग थाने में बगल से घुस गए और थाने के घोड़े को खोलकर अस्तबल ध्वस्त कर दिया। इसके बाद भीड़ थाने में घुस गई। यह देख पुलिस ने गोलियां चलाई तो क्रांतिकारियों ने पथराव कर दिया। इसी बीच कौशल कुमार सिंह छलांग लगाकर थाने की छत पर पहुंच गए और जैक उतारकर तिरंगा फहरा दिया, लेकिन पुलिस की गोली से वह शहीद हो गए। शाम तक चले इस संघर्ष में कुल 19 लोग शहीद हो गए।

शहीद होने वाले क्रांतिकारी

शहीद होने वालों में कौशल सिंह के अलावा गोन्हिया छपरा निवासी निर्भय कुमार सिंह, देवबसन कोइरी, विशुनपुरा निवासी नरसिंह राय, तिवारी के मिल्की निवासी रामजनम गोंड, मिल्की मठिया के विद्यापति गोंड, चांदपुर निवासी रामप्रसाद उपाध्याय, टोलागुदरीराय निवासी मैनेजर सिंह, सोनबरसा निवासी रामदेव कुम्हार, बैरिया निवासी रामबृक्ष राय, रामनगीना सोनार, छठू कमकर, देवकी सोनार, शुभनथही निवासी धर्मदेव मिश्र, मुरारपट्टी निवासी श्रीराम तिवारी, बहुआरा निवासी मुक्तिनाथ तिवारी, श्रीपालपुर निवासी विक्रम सोनार व विक्की राम, भगवानपुर निवासी भीम अहीर शामिल थे। दयाछपरा निवासी गदाधरनाथ पांडेय, मधुबनी निवासी गौरीशंकर राय, गंगापुर निवासी रामरेखा शर्मा सहित तीन क्रांतिकारी जेल यातना में शहीद हो गए। इसके अलावा, कितने क्रांतिकारियों को जेल की कालकोठरी में डाल दिया गया, जिसका नाम तक प्रकाश में नहीं आ सका।

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