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75 दिन बाद भी नहीं नहीं मिल रहे पर्याप्त रुपये
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया
Updated Mon, 23 Jan 2017 08:11 PM IST
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सागरपाली क्षेत्र के ‘ग्रामीण बैंक’ में 75 दिन बाद भी आर्थिक आपातकाल जैसी स्थिति है। यहां के लगभग 13 हजार खाताधारकों को अब भी परेशानी से जूझना पड़ रहा है। इन खाताधारकों के पास अपना पैसा होने के बावजूद कर्जदारों का ताना सुनना पड़ रहा है। कुछ दिनों में जिले के लगभग हर बैंकों से पर्याप्त नोट मिलने भी लगा है। लेकिन अफसोस सागरपाली स्थित पूर्वांचल बैंक में आज भी पर्याप्त मात्रा में नोट नहीं मिल रहा है।
कभी-कभी मिल भी रहा है तो मात्र चार से पांच हजार में संतुष्ट होना पड़ रहा है। बैंक के खाताधारक दुमदुमा ग्राम प्रधान लक्ष्मण दास जी का कहना है कि 75 दिन बीत जाने के बाद भी जब बैंक से पर्याप्त पैसा नहीं मिल रहा है। खाताधारक बघेजी गांव निवासी गोपाल सिंह ने बताया कि मोदी के नोटबंदी फैसले ने मुझे 55 हजार रुपये कर्ज लेने में मजबूर कर दिया। जबकि मेरे खाते में पर्याप्त पैसा है।
लेकिन क्या करें, पूर्वांचल बैंक से मिल नहीं पा रहा है। ऐसे में अपना पैसा होने के बावजूद मैं कर्जदारों का ताना सुनने को विवश हूं। खाताधारक गंगहरा अखिलेश सिंह ने बताया कि पर्याप्त पैसा न मिलने के कारण इसका प्रतिकूल असर रोजमर्रे की चीजों पर पड़ा है। आलम यह है कि आज भी बीवी और बच्चे पैसा मांगने पर उन्हें सोच-समझकर देना पड़ रहा है।
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कभी-कभी मिल भी रहा है तो मात्र चार से पांच हजार में संतुष्ट होना पड़ रहा है। बैंक के खाताधारक दुमदुमा ग्राम प्रधान लक्ष्मण दास जी का कहना है कि 75 दिन बीत जाने के बाद भी जब बैंक से पर्याप्त पैसा नहीं मिल रहा है। खाताधारक बघेजी गांव निवासी गोपाल सिंह ने बताया कि मोदी के नोटबंदी फैसले ने मुझे 55 हजार रुपये कर्ज लेने में मजबूर कर दिया। जबकि मेरे खाते में पर्याप्त पैसा है।
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लेकिन क्या करें, पूर्वांचल बैंक से मिल नहीं पा रहा है। ऐसे में अपना पैसा होने के बावजूद मैं कर्जदारों का ताना सुनने को विवश हूं। खाताधारक गंगहरा अखिलेश सिंह ने बताया कि पर्याप्त पैसा न मिलने के कारण इसका प्रतिकूल असर रोजमर्रे की चीजों पर पड़ा है। आलम यह है कि आज भी बीवी और बच्चे पैसा मांगने पर उन्हें सोच-समझकर देना पड़ रहा है।
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