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खेतों में करें ढैचा की बुआई, यूरिया की होगी बचत
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बलिया। शासन की ओर से खेतों की उर्वरा शक्ति बचाए रखने व फसलों की अच्छी पैदावार को लेकर जैविक उर्वरक को बढ़ावा देने का काम किया जा रहा है। इसके तहत जिले को कुल 525 क्विंटल ढैंचा के बीज का आवंटन किया गया है। हालांकि इसमें 500 क्विंटल विभाग की ओर से किसानों को खेतों में प्रदर्शन के लिए नि:शुल्क दिया जाएगा। इसका प्रदर्शन कुल 1250 हेक्टेयर में होना है। जबकि 25 क्विंटल सामान्य किसानों को 52.50 रुपये की दर से उपलब्ध कराया जाएगा।
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि आवंटन के सापेक्ष 200 क्विंटल ढैचा का बीज प्राप्त हो गया है। बताया कि ढैचा की प्रति हेक्टेयर 40 किलो बुआई करके अधिकतम 40 दिनों में जब करीब पौधे की उंचाई करीब एक मीटर की हो जाए तो इसकी जुताई कर देनी चाहिए। इससे खेतों में नाइट्रोजन, कार्बन व ह्यूमस (जीवांश) में वृद्धि होगी। इससे 20 फीसदी तक यूरिया की बचत हो सकेगी। बताया कि इसकी बुआई से खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी और पैदावार भी अच्छी होगी। उन्होंने यह भी बताया कि किसान अगर चाहें तो खेतों के किनारे ढैंचा के कुछ पौधे छोड़ कर उससे बीज भी प्राप्त कर सकते हैं।
खरीफ की खेती में जिप्सम की भूमिका भी अहम होती है और पांच हजार क्विंटल उपलब्ध हो चुका है। जिला कृषि अधिकारी की मानें तो प्रति एकड़ 80 किलो का प्रयोग करने से खेतों में कैल्शियम, सल्फर की मात्रा दुरुस्त होती है मिट्टी की उर्वरा भी ठीक रहती है।
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जिला कृषि अधिकारी विकेश कुमार ने बताया कि खरीफ की खेती की तैयारियां की जा रही हैं। धान की रोपाई से पहले जैविक उर्वरक के तौर पर ढैंचा की बुआई करने से खेतों की उर्वरा शक्ति बरकरार रहेगी और पैदावार भी अच्छी होगी। इस साल 1250 हेक्टेयर में ढैंचा का प्रदर्शन किया जाएगा।
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जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि आवंटन के सापेक्ष 200 क्विंटल ढैचा का बीज प्राप्त हो गया है। बताया कि ढैचा की प्रति हेक्टेयर 40 किलो बुआई करके अधिकतम 40 दिनों में जब करीब पौधे की उंचाई करीब एक मीटर की हो जाए तो इसकी जुताई कर देनी चाहिए। इससे खेतों में नाइट्रोजन, कार्बन व ह्यूमस (जीवांश) में वृद्धि होगी। इससे 20 फीसदी तक यूरिया की बचत हो सकेगी। बताया कि इसकी बुआई से खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी और पैदावार भी अच्छी होगी। उन्होंने यह भी बताया कि किसान अगर चाहें तो खेतों के किनारे ढैंचा के कुछ पौधे छोड़ कर उससे बीज भी प्राप्त कर सकते हैं।
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खरीफ की खेती में जिप्सम की भूमिका भी अहम होती है और पांच हजार क्विंटल उपलब्ध हो चुका है। जिला कृषि अधिकारी की मानें तो प्रति एकड़ 80 किलो का प्रयोग करने से खेतों में कैल्शियम, सल्फर की मात्रा दुरुस्त होती है मिट्टी की उर्वरा भी ठीक रहती है।
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जिला कृषि अधिकारी विकेश कुमार ने बताया कि खरीफ की खेती की तैयारियां की जा रही हैं। धान की रोपाई से पहले जैविक उर्वरक के तौर पर ढैंचा की बुआई करने से खेतों की उर्वरा शक्ति बरकरार रहेगी और पैदावार भी अच्छी होगी। इस साल 1250 हेक्टेयर में ढैंचा का प्रदर्शन किया जाएगा।