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गंगा का दियरांचल इलाका शराब कारोबारियों के लिए महफूज
Updated Mon, 03 Dec 2018 11:16 PM IST
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बलिया। गंगा किनारे का दियरांचल इलाका अवैध शराब कारोबारियों के लिए महफूल स्थल बन गया है। कई इलाके तो ऐसे हैं कि वहां तक पहुंचने के लिए पुलिस को मशक्कत भी करनी पड़ती है लेकिन दियरांचल इलाके तक विभिन्न प्रांतों के निर्मित अंग्रेजी शराब की खेप भी पुलिस की मिलीभगत से ही पहुंचती है।
जिले के करीब 80 किमी लंबाई में गंगा यूपी और बिहार को बांटती है। कहीं-कहीं तो गंगा का दियरांचल इलाका बहुत बड़ा है, जहां किसी का आना-जाना काफी मुश्किल भरा काम है। इसका लाभ शराब माफिया खूब उठाते हैं और यह इलाका उनके लिए महफूल स्थल बन गया है। तस्करी के लिए कुख्यात नरहीं थाना के कोटवां नारायनपुर, उजियार, सरयां, नसीरपुर मठ, भरौली, सोहांव के गंगा घाटों से अवैैध शराब की तस्करी होती है। वहीं, भरौली गंगा पुल से लग्जरी वाहनों से यह धंधा किया जाता है। इसके अलावा, पलियाखास गांव के पास गंगा का दियारा भी शराब तस्करों के लिए काफी महफूज है। जिले के गंगा किनारे के दर्जनों घाटों से खासकर शराब तस्करी का धंधा नदी के रास्ते किया जाता है लेकिन कभी कभार इसे पकड़ कर पुलिस कोरम करती है।
दयाछपरा: बैरिया थाना क्षेत्र के शुभनथही दियारा गंगा नदी का घाट शराब माफियाओं का महफूज स्थल बन गया है। इस घाट से प्रतिदिन रात के अंधेरे में नाव द्वारा राजस्थान, हरियाणा निर्मित शराब गंगा उस पार पुरुषोत्तमपुर, नरायनपुर के रास्ते बिहार में आसानी से भेजी जा रही है। लोगों की माने तो इस काम में सिपाही की भूमिका भी संदिग्ध भूमिका है, जो शराब माफियाओं से मिलकर इस धंधा को आगे बढ़ाने में सहायक है। बताया जाता है कि ट्रक से शराब उतार कर शुभनथही दियारा के झाड़ में रख दिया जाता है और फिर रात के अंधेरे में नाव द्वारा गंगा नदी को पार कर उस पार के पुरुषोत्तमपुर के दियारा में लगे सरपत आदि के अंदर छिपा दिया जाता है। फिर नौरंगा, भुवाल छपरा, करनामेपुर, पदसोडा, ओझवलिया के शराब कारोबारी वहां से उठाकर बिहार के विभिन्न जगहों पर सप्लाई कर देते हैं। अगर पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर शराब पकड़ा भी जाता है तो असल कारोबारियों को छोड़ कर पुलिस किसी दूसरे के नाम मुकदमा कर दे रही है जिसका इस धंधे से दूर तक कोई रिश्ता नहीं है।
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जिले के करीब 80 किमी लंबाई में गंगा यूपी और बिहार को बांटती है। कहीं-कहीं तो गंगा का दियरांचल इलाका बहुत बड़ा है, जहां किसी का आना-जाना काफी मुश्किल भरा काम है। इसका लाभ शराब माफिया खूब उठाते हैं और यह इलाका उनके लिए महफूल स्थल बन गया है। तस्करी के लिए कुख्यात नरहीं थाना के कोटवां नारायनपुर, उजियार, सरयां, नसीरपुर मठ, भरौली, सोहांव के गंगा घाटों से अवैैध शराब की तस्करी होती है। वहीं, भरौली गंगा पुल से लग्जरी वाहनों से यह धंधा किया जाता है। इसके अलावा, पलियाखास गांव के पास गंगा का दियारा भी शराब तस्करों के लिए काफी महफूज है। जिले के गंगा किनारे के दर्जनों घाटों से खासकर शराब तस्करी का धंधा नदी के रास्ते किया जाता है लेकिन कभी कभार इसे पकड़ कर पुलिस कोरम करती है।
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दयाछपरा: बैरिया थाना क्षेत्र के शुभनथही दियारा गंगा नदी का घाट शराब माफियाओं का महफूज स्थल बन गया है। इस घाट से प्रतिदिन रात के अंधेरे में नाव द्वारा राजस्थान, हरियाणा निर्मित शराब गंगा उस पार पुरुषोत्तमपुर, नरायनपुर के रास्ते बिहार में आसानी से भेजी जा रही है। लोगों की माने तो इस काम में सिपाही की भूमिका भी संदिग्ध भूमिका है, जो शराब माफियाओं से मिलकर इस धंधा को आगे बढ़ाने में सहायक है। बताया जाता है कि ट्रक से शराब उतार कर शुभनथही दियारा के झाड़ में रख दिया जाता है और फिर रात के अंधेरे में नाव द्वारा गंगा नदी को पार कर उस पार के पुरुषोत्तमपुर के दियारा में लगे सरपत आदि के अंदर छिपा दिया जाता है। फिर नौरंगा, भुवाल छपरा, करनामेपुर, पदसोडा, ओझवलिया के शराब कारोबारी वहां से उठाकर बिहार के विभिन्न जगहों पर सप्लाई कर देते हैं। अगर पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर शराब पकड़ा भी जाता है तो असल कारोबारियों को छोड़ कर पुलिस किसी दूसरे के नाम मुकदमा कर दे रही है जिसका इस धंधे से दूर तक कोई रिश्ता नहीं है।
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