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24 घंटे में आधा मीटर बढ़ी घाघरा
ब्यूरो,अमर उजाला,बलिया
Updated Tue, 05 Jul 2016 09:56 PM IST
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flood, heavy rain, mandakini, alaknanda, uttarakhand news, weather alert
- फोटो : amar ujala
घाघरा नदी के जलस्तर में वृद्धि का क्रम देखकर तटवर्ती बाशिंदों के होश उड़ गए हैं। पिछले 24 घंटे में नदी के जलस्तर में 0.435 मीटर की अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, मंगलवार को अपराह्न जलस्तर 61.590 मीटर दर्ज किया गया, जो लाल निशान 64.010 मीटर से 2.420 मीटर कम है। सोमवार को घाघरा का जलस्तर 61.155 मीटर दर्ज किया गया।
केंद्रीय जल आयोग का कहना है कि सोमवार को पूर्वाह्न जलस्तर में स्थिरता के बाद वृद्धि शुरू हो गई है। पहले जलस्तर में एक से डेढ़ सेमी वृद्धि का सिलसिला शुरू हुआ। लेकिन मंगलवार की दोपहर से ही चार सेमी प्रतिघंटे की रफ्तार से वृद्धि हो रही है।
जलस्तर में लगातार हो रहे वृद्धि से तटवर्ती चैनपुर दिलवरा, मठिया, महुआतर, सबुनियां, खैराखास, तूर्तीपार, मुजौना, उभांव, करीमगंज, बेल्थरा बाजार, सोनबरसा, हल्दीरामपुर आदि तटवर्ती क्षेत्रों में खलबली मची हुई है। किसी तरह जल स्तर में वृद्धि का सिलसिला जारी रहा तो अगले एक-दो दिन में जलस्तर लाल निशान के ऊपर पहुंच जाएगा।
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उधर पहिया में कटान शुरू हो जाने से पिछले एक पखवारे में कुल पांच एकड़ भूमि नदी की धारा में विलीन हो चुकी है। कटान धीरे-धीरे आबादी की ओर बढ़ रही है। ऐसे में यादव बस्ति और ऐतिहासिक रामलीला मंच के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
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केंद्रीय जल आयोग का कहना है कि सोमवार को पूर्वाह्न जलस्तर में स्थिरता के बाद वृद्धि शुरू हो गई है। पहले जलस्तर में एक से डेढ़ सेमी वृद्धि का सिलसिला शुरू हुआ। लेकिन मंगलवार की दोपहर से ही चार सेमी प्रतिघंटे की रफ्तार से वृद्धि हो रही है।
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जलस्तर में लगातार हो रहे वृद्धि से तटवर्ती चैनपुर दिलवरा, मठिया, महुआतर, सबुनियां, खैराखास, तूर्तीपार, मुजौना, उभांव, करीमगंज, बेल्थरा बाजार, सोनबरसा, हल्दीरामपुर आदि तटवर्ती क्षेत्रों में खलबली मची हुई है। किसी तरह जल स्तर में वृद्धि का सिलसिला जारी रहा तो अगले एक-दो दिन में जलस्तर लाल निशान के ऊपर पहुंच जाएगा।
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उधर पहिया में कटान शुरू हो जाने से पिछले एक पखवारे में कुल पांच एकड़ भूमि नदी की धारा में विलीन हो चुकी है। कटान धीरे-धीरे आबादी की ओर बढ़ रही है। ऐसे में यादव बस्ति और ऐतिहासिक रामलीला मंच के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।