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भक्ति और भजन से नहीं होती गृहकलह
Updated Mon, 22 Jan 2018 11:09 PM IST
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मनियर। परिवार में रहना अच्छी बात है , लेकिन परिवार में रहकर भगवान का भजन करना सबसे अच्छी बात है। भक्ति और भजन से कभी भी परिवार में गृहकलह नहीं होती। यह बातें रिगवन के मठिया पर चल रहे हनुमत महायज्ञ में श्री श्री 108 विजयशरण दास जी महाराज ने रिगवन मानकी देवी इंटर कॉलेज के पास खड़सरी बाबा के पोखरे पर अपने प्रवचन के दौरान कही।
उन्होंने कहा कि भगवान शिव परिवार में रहते हुए भक्ति भजन करते थे। आज थोड़ा सा बिष जीभ पर रखते ही मौत हो जाती है, लेकिन भगवान शिव तो बिष का घड़ा ही पी गए। उन पर बिष का असर इसलिए नहीं हुआ कि ऊपर से बिष पी रहे थे। अंदर रामनाम का जाप कर रहे थे। राम नाम की महिमा का गुणगान करते हुए उन्होंने कहा कि राम नाम जपने से श्राप भी मिट जाता है। उन्होंने एक ब्राह्मण की कथा कहते हुए कहा कि ब्राह्मण तुलसी की माला लेकर राम नाम जपता था । ऐसी आदत बन गई कि हमेशा उनका मुंह राम नाम जपता रहता था। एक गरीब का बच्चा बुखार से पीड़ित था। दवा के बाद भी बुखार नहीं उतरता था ।वह गरीब ब्राह्मण के पास आया और ब्राह्मण से अपने लड़के का पीड़ा सुनाया। ब्राह्मण ने तुलसी का माला लड़के के गले में डाल दिया और उस लड़के का बुखार उतर गया। कहने का मतलब है तुलसी के निर्जीव लकड़ी में चैतन्य आ गया। यज्ञ के आयोजनकर्ता श्री श्री 108 पूज्य संत श्री बैरागी जी महाराज एवं यज्ञाचार्य बनारस के पंडित राजेश शास्त्री जी महाराज है।
इनसेट
भागवत कथा का शुभारंभ
सहतवार । क्षेत्र के ग्राम सभा महादनपुर में सर्व मनोकामना पूर्ण पंचमुखी हनुमान मन्दिर पर सन्त श्री रामधनीदासजी द्वारा आयोजित सात दिवसीय हनुमान महायज्ञ व भागवत कथा का शुभारम्भ कलश यात्रा के साथ शुरु हो गया। कलश यात्रा हाथी, घोड़े , गाजे बाजे के साथ यज्ञ मंडप से शुरु होकर मथौली, सिंगहीहाता, सिंगही, कोलकला, चांदपुर होते हुए घाघरा घाट पर पहुंचा, जहां से श्रद्धालु कलश में जलभर वापस महाराजपुर ,बभनौली होते हुए यज्ञ मंडप पर पहुंचे। यज्ञ में सन्त श्री श्री 1008 श्री राममिलनदासजी महाराज श्रीमद् भागवत कथा का रसपान कराएंगे।
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उन्होंने कहा कि भगवान शिव परिवार में रहते हुए भक्ति भजन करते थे। आज थोड़ा सा बिष जीभ पर रखते ही मौत हो जाती है, लेकिन भगवान शिव तो बिष का घड़ा ही पी गए। उन पर बिष का असर इसलिए नहीं हुआ कि ऊपर से बिष पी रहे थे। अंदर रामनाम का जाप कर रहे थे। राम नाम की महिमा का गुणगान करते हुए उन्होंने कहा कि राम नाम जपने से श्राप भी मिट जाता है। उन्होंने एक ब्राह्मण की कथा कहते हुए कहा कि ब्राह्मण तुलसी की माला लेकर राम नाम जपता था । ऐसी आदत बन गई कि हमेशा उनका मुंह राम नाम जपता रहता था। एक गरीब का बच्चा बुखार से पीड़ित था। दवा के बाद भी बुखार नहीं उतरता था ।वह गरीब ब्राह्मण के पास आया और ब्राह्मण से अपने लड़के का पीड़ा सुनाया। ब्राह्मण ने तुलसी का माला लड़के के गले में डाल दिया और उस लड़के का बुखार उतर गया। कहने का मतलब है तुलसी के निर्जीव लकड़ी में चैतन्य आ गया। यज्ञ के आयोजनकर्ता श्री श्री 108 पूज्य संत श्री बैरागी जी महाराज एवं यज्ञाचार्य बनारस के पंडित राजेश शास्त्री जी महाराज है।
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सहतवार । क्षेत्र के ग्राम सभा महादनपुर में सर्व मनोकामना पूर्ण पंचमुखी हनुमान मन्दिर पर सन्त श्री रामधनीदासजी द्वारा आयोजित सात दिवसीय हनुमान महायज्ञ व भागवत कथा का शुभारम्भ कलश यात्रा के साथ शुरु हो गया। कलश यात्रा हाथी, घोड़े , गाजे बाजे के साथ यज्ञ मंडप से शुरु होकर मथौली, सिंगहीहाता, सिंगही, कोलकला, चांदपुर होते हुए घाघरा घाट पर पहुंचा, जहां से श्रद्धालु कलश में जलभर वापस महाराजपुर ,बभनौली होते हुए यज्ञ मंडप पर पहुंचे। यज्ञ में सन्त श्री श्री 1008 श्री राममिलनदासजी महाराज श्रीमद् भागवत कथा का रसपान कराएंगे।
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