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गर्मी में बच्चे पड़ रहे बीमार
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बलिया। गर्म हवाओं के चलते से लोग लू लगने से बीमार हो रहे हैं। ऐसे में चिकित्सकों ने बच्चोें को लू से बचाने का सुझाव दिया है
रेवती पीएचसी में तैनात नवजात शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सिद्धार्थ मणि दूबे ने बताया कि गर्मी के मौसम में संक्रामक रोगों का दौर शुरू हो जाता है। बच्चों का पाचनतंत्र कमजोर हो जाता है जिसकी वजह से अक्सर बच्चे उल्टी-दस्त, निर्जलीकरण से ग्रस्त हो जाते हैं। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों के प्रति विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। एहतियात के तौर पर बच्चों को ओआरएस के घोल पिलाना चाहिए। साफ-सफाई का पूरा ख्याल रखना चाहिए। शिशु को कुछ भी खिलाने से पहले हाथ अच्छे से जरूर धो लें, क्योंकि डायरिया पैदा करने वाला विषाणु हाथों के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाता है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉॎ प्रीतम कुमार मिश्रा ने सभी आयु वर्ग के लोगों से अपील की है कि गर्मी में लू से बचने के लिए पानी अधिक मात्रा में पिएं। हल्के रंग के ढीले सूती कपड़े पहनें। अति आवश्यक कार्य न हो तो, धूप में बाहर जाने से बचें। जरूरी हो तो धूपीय चस्मा, छाता, टोपी और शरीर को पूरा ढककर बाहर निकलें। गर्मी के मौसम में तरल पदार्थों का अधिक सेवन करें। घर में बने पेय पदार्थ नींबू पानी, लस्सी का प्रयोग करें, जिससे शरीर में पानी की कमी न हो। डायरिया (दस्त) होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र पर तत्काल संपर्क स्थापित करें तथा ओआरएस का घोल पिएं। अत्यधिक तली-भूनी चीजों को खाने से परहेज करें।
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रेवती पीएचसी में तैनात नवजात शिशु एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सिद्धार्थ मणि दूबे ने बताया कि गर्मी के मौसम में संक्रामक रोगों का दौर शुरू हो जाता है। बच्चों का पाचनतंत्र कमजोर हो जाता है जिसकी वजह से अक्सर बच्चे उल्टी-दस्त, निर्जलीकरण से ग्रस्त हो जाते हैं। ऐसे में अभिभावकों को बच्चों के प्रति विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। एहतियात के तौर पर बच्चों को ओआरएस के घोल पिलाना चाहिए। साफ-सफाई का पूरा ख्याल रखना चाहिए। शिशु को कुछ भी खिलाने से पहले हाथ अच्छे से जरूर धो लें, क्योंकि डायरिया पैदा करने वाला विषाणु हाथों के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाता है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉॎ प्रीतम कुमार मिश्रा ने सभी आयु वर्ग के लोगों से अपील की है कि गर्मी में लू से बचने के लिए पानी अधिक मात्रा में पिएं। हल्के रंग के ढीले सूती कपड़े पहनें। अति आवश्यक कार्य न हो तो, धूप में बाहर जाने से बचें। जरूरी हो तो धूपीय चस्मा, छाता, टोपी और शरीर को पूरा ढककर बाहर निकलें। गर्मी के मौसम में तरल पदार्थों का अधिक सेवन करें। घर में बने पेय पदार्थ नींबू पानी, लस्सी का प्रयोग करें, जिससे शरीर में पानी की कमी न हो। डायरिया (दस्त) होने पर नजदीकी स्वास्थ्य केन्द्र पर तत्काल संपर्क स्थापित करें तथा ओआरएस का घोल पिएं। अत्यधिक तली-भूनी चीजों को खाने से परहेज करें।