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महिला चिकित्सालस में बंद पड़ा है अल्ट्रासाउंड
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बलिया। जिला महिला अस्पताल में करीब दो माह से अल्ट्रासाउंड की जांच बंद है। महिला चिकित्सालय में तैनात रेडियालाजिस्ट का स्थानांतरण मऊ हो जाने के बाद ऐसी नौबत आयी है। इसके चलते प्रतिदिन सैकड़ों मरीजों को बाहर से अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है।
केंद्र व प्रदेश की सरकार स्वास्थ्य विभाग को सुदृढ़ बनाने के लिए कटिबद्ध है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। जिला महिला चिकित्सालय में करीब दो साल से अल्ट्रासाउंड बंद चल रहा था। जिसके कारण मरीजों को बाहर से अल्ट्रासाउंड अधिक पैसे देकर कराना पड़ता था। महिला चिकित्सालय की ओपीडी में प्रतिदिन करीब चार सौ मरीजों को देखा जाता है। जिसमें से करीब 50 को अल्ट्रासाउंड के लिए डॉक्टर लिखती हैं। महिला सीएमएस डॉ. सुमिता सिन्हा ने शासन से लेकर जिला प्रशासन को रेडियोलाजिस्ट की तैनाती के लिए कई बार पत्र लिखा। जिसे गंभीरता से लेते हुए डीएम ने महिला चिकित्सालय में रेडियोलाजिस्ट तैनात करने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित किया था। डीएम के निर्देश के क्रम में सीएमओ ने एसीएमओ/ रेडियोलाजिस्ट डॉ. संजय सिंह की तैनाती की थी, जो सप्ताह में दो दिन अल्ट्रासाउंड करने का काम करते थे। इसी बीच शासन द्वारा दो माह पूर्व उनका स्थानांतरण मऊ जनपद के लिए कर दिया गया था। जिसके बाद से एक बार फिर महिला चिकित्सालय में अल्ट्रासाउंड कक्ष पर ताला लटक गया है। वहीं मरीजों को बाहर से अधिक दाम देकर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है। इस बाबत सीएमएस डाक्टर सुमिता सिन्हा ने बताया कि कुछ दिन पहले एसीएमओ संजय सिंह द्वारा अल्ट्रासाउंड किया जा रहा था। लेकिन उनका स्थानांतरण गैर जनपद हो गया। जिसके कारण अल्ट्रासाउंड बंद पड़ा हुआ है। जब तक कोई रोडियोलाजिस्ट नहीं आ जाते हैं, तब तक अल्ट्रासाउंड जांच नहीं हो पाएगा। इसके लिए सीएमओ व डीएम को अवगत करा दिया गया है।
वर्जन-
रेडियोलाजिस्ट जनपद में नहीं है, जिसके कारण महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड बंद पड़ा हुआ है, जिला अस्पताल में किसी तरह रेडियोलाजिस्ट तैनात कर कार्य लिया जा रहा है। जब तक रेडियोलाजिस्ट उपलब्ध नहीं हो जाता है, तब तक महिला चिकित्सालय का अल्ट्रासाउंड बंद रखना मजबूरी है। डॉ. हरिनंद, एसीएमओ, बलिया
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इनसेट...
प्रतिक्रिया
फेफना थाना क्षेत्र के एकौनी गांव निवासी किरण देवी ने बताया कि महिला अस्पताल के ओपीडी में चिकित्सक देखने के बाद अल्ट्रासाउंड कराने के लिए लिखा, लेकिन महिला चिकित्सालय में अल्ट्रासाउंड बंद होने के कारण बाहर से कराना पड़ा।
खेजूरी थाना क्षेत्र के बड़सरी गांव निवासी कुसुम देवी का कहना है कि प्रसव पीड़ा होने के बाद महिला अस्पताल एंबुलेंस द्वारा लाया गया, लेकिन अस्पताल में आने के बाद चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड कराने को कहा। यहां पता चला कि अल्ट्रासाउंड बंद है। जिससे मजबूर होकर बाहर कराना पड़ा।
फेफना थाना क्षेत्र के सागरपाली निवासी हरेराम ने बताया कि वह अपनी पत्नी प्रियंका को महिला अस्पताल में चार बार ओपीडी में दिखाया और चारों बार अल्ट्रासाउंड बाहर से ही कराना पड़ा।
हल्दी थाना क्षेत्र के रामपुर दीघार निवासी मानती देवी ने बताया कि वह अपनी बहू को दिखाने के लिए जिला महिला चिकित्सालय में आई थी। जहां चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड कराने को कहा। यहां पता चला कि महिला जिला चिकित्सालय में अल्ट्रासाउंड बंद है। जिसके बाद मजबूरी में बाहर पैैसा देकर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ा।
केंद्र व प्रदेश की सरकार स्वास्थ्य विभाग को सुदृढ़ बनाने के लिए कटिबद्ध है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। जिला महिला चिकित्सालय में करीब दो साल से अल्ट्रासाउंड बंद चल रहा था। जिसके कारण मरीजों को बाहर से अल्ट्रासाउंड अधिक पैसे देकर कराना पड़ता था। महिला चिकित्सालय की ओपीडी में प्रतिदिन करीब चार सौ मरीजों को देखा जाता है। जिसमें से करीब 50 को अल्ट्रासाउंड के लिए डॉक्टर लिखती हैं। महिला सीएमएस डॉ. सुमिता सिन्हा ने शासन से लेकर जिला प्रशासन को रेडियोलाजिस्ट की तैनाती के लिए कई बार पत्र लिखा। जिसे गंभीरता से लेते हुए डीएम ने महिला चिकित्सालय में रेडियोलाजिस्ट तैनात करने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित किया था। डीएम के निर्देश के क्रम में सीएमओ ने एसीएमओ/ रेडियोलाजिस्ट डॉ. संजय सिंह की तैनाती की थी, जो सप्ताह में दो दिन अल्ट्रासाउंड करने का काम करते थे। इसी बीच शासन द्वारा दो माह पूर्व उनका स्थानांतरण मऊ जनपद के लिए कर दिया गया था। जिसके बाद से एक बार फिर महिला चिकित्सालय में अल्ट्रासाउंड कक्ष पर ताला लटक गया है। वहीं मरीजों को बाहर से अधिक दाम देकर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ रहा है। इस बाबत सीएमएस डाक्टर सुमिता सिन्हा ने बताया कि कुछ दिन पहले एसीएमओ संजय सिंह द्वारा अल्ट्रासाउंड किया जा रहा था। लेकिन उनका स्थानांतरण गैर जनपद हो गया। जिसके कारण अल्ट्रासाउंड बंद पड़ा हुआ है। जब तक कोई रोडियोलाजिस्ट नहीं आ जाते हैं, तब तक अल्ट्रासाउंड जांच नहीं हो पाएगा। इसके लिए सीएमओ व डीएम को अवगत करा दिया गया है।
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रेडियोलाजिस्ट जनपद में नहीं है, जिसके कारण महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड बंद पड़ा हुआ है, जिला अस्पताल में किसी तरह रेडियोलाजिस्ट तैनात कर कार्य लिया जा रहा है। जब तक रेडियोलाजिस्ट उपलब्ध नहीं हो जाता है, तब तक महिला चिकित्सालय का अल्ट्रासाउंड बंद रखना मजबूरी है। डॉ. हरिनंद, एसीएमओ, बलिया
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फेफना थाना क्षेत्र के एकौनी गांव निवासी किरण देवी ने बताया कि महिला अस्पताल के ओपीडी में चिकित्सक देखने के बाद अल्ट्रासाउंड कराने के लिए लिखा, लेकिन महिला चिकित्सालय में अल्ट्रासाउंड बंद होने के कारण बाहर से कराना पड़ा।
खेजूरी थाना क्षेत्र के बड़सरी गांव निवासी कुसुम देवी का कहना है कि प्रसव पीड़ा होने के बाद महिला अस्पताल एंबुलेंस द्वारा लाया गया, लेकिन अस्पताल में आने के बाद चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड कराने को कहा। यहां पता चला कि अल्ट्रासाउंड बंद है। जिससे मजबूर होकर बाहर कराना पड़ा।
फेफना थाना क्षेत्र के सागरपाली निवासी हरेराम ने बताया कि वह अपनी पत्नी प्रियंका को महिला अस्पताल में चार बार ओपीडी में दिखाया और चारों बार अल्ट्रासाउंड बाहर से ही कराना पड़ा।
हल्दी थाना क्षेत्र के रामपुर दीघार निवासी मानती देवी ने बताया कि वह अपनी बहू को दिखाने के लिए जिला महिला चिकित्सालय में आई थी। जहां चिकित्सक ने अल्ट्रासाउंड कराने को कहा। यहां पता चला कि महिला जिला चिकित्सालय में अल्ट्रासाउंड बंद है। जिसके बाद मजबूरी में बाहर पैैसा देकर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ा।