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माइग्रेशन लेने पहुंची तो पता चला नकली है अंकपत्र, उड़े होश
Updated Sat, 09 Dec 2017 10:57 PM IST
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रामगढ़ (बलिया)। 11 साल बाद वीर बहादुर सिंह यूनिवर्सिटी से अपना माइग्रेशन (डिग्री) लेने के लिए पहुंची छात्रा शिक्षा के होश उड़ गए। पता चला कि उसे असली के जगह नकली अंक पत्र संस्थान से प्रदान किया है। आनन-फानन में छात्रा ने महाविद्यालय दूबे छपरा में बुधवार को पहुंचकर इस बात सें प्राचार्य डॉ. गणेश पाठक को शिकायती पत्र सौंपा तथा धोखाधड़ी करने वाले कर्मचारी के विरूद्ध कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही अंक पत्र सुधार करने की गुहार लगाई है। उधर, कॉलेज प्रशासन मामले को लेकर असमंजस में है कि आखिर उस छात्रा को अंक पत्र किस कर्मचारी ने दिया। ऐसे में हर कोई गला फंसता देख कन्नी काटता नजर आ रहा है।
मामला उस समय प्रकाश में जब छात्रा द्वारा बीटीसी में दाखिला लेने के बाद पंडित तेजराम कालेज ऑफ एजुकेशन गाज़ियाबाद कालेज ने शिखा से माइग्रेशन सर्टिफिकेट मांगा। बता दें की सन् 2005 में शिखा चौबे पुत्री रामजी चौबे निवासी दलकी ने अमरनाथ मिश्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय दुबेछापर से बीए तृतीय वर्ष यानी फाइनल ईयर की परीक्षा दी थी। परीक्षा का परिणाम आने के बाद क्रासलिस्ट में छात्रा का रिजल्ट इंकॉम्प्लिट आया था। यह देख छात्रा ने इस संबंध में एक अध्यापक से शिकायत की। अध्यापक ने इसे तकनीकी दिक्कत बताया, जिससे यूनवर्सिटी से सुधार करने की बात कहीं। छात्रा ने मार्कशीट सुधार कराने के लिए उस अध्यापक को पैसे भी थे यह आरोप लगाया है। जिसके बाद मार्कशीट सुधार कराकर दिए भी थे, जब मैं वीरबहादुर सिंह यूनिवर्सिटी माइग्रेशन सर्टिफिकेट लेने के लिए पहुंची तो इस मार्कशीट को यूनिवर्सिटी द्वारा फर्जी बताया गया। ऐसे में छात्र के बीटीसी में दाखिला भी अधर में लटक गया है और पैसे भी। इस संबंध में अमरनाथ मिश्र पीजी कालेज के प्राचार्य डॉ. गणेश पाठक ने बताया कि लिखित शिकायत पत्र मिला है, जांच कर संबंधित दोषी अध्यापक के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
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मामला उस समय प्रकाश में जब छात्रा द्वारा बीटीसी में दाखिला लेने के बाद पंडित तेजराम कालेज ऑफ एजुकेशन गाज़ियाबाद कालेज ने शिखा से माइग्रेशन सर्टिफिकेट मांगा। बता दें की सन् 2005 में शिखा चौबे पुत्री रामजी चौबे निवासी दलकी ने अमरनाथ मिश्र स्नातकोत्तर महाविद्यालय दुबेछापर से बीए तृतीय वर्ष यानी फाइनल ईयर की परीक्षा दी थी। परीक्षा का परिणाम आने के बाद क्रासलिस्ट में छात्रा का रिजल्ट इंकॉम्प्लिट आया था। यह देख छात्रा ने इस संबंध में एक अध्यापक से शिकायत की। अध्यापक ने इसे तकनीकी दिक्कत बताया, जिससे यूनवर्सिटी से सुधार करने की बात कहीं। छात्रा ने मार्कशीट सुधार कराने के लिए उस अध्यापक को पैसे भी थे यह आरोप लगाया है। जिसके बाद मार्कशीट सुधार कराकर दिए भी थे, जब मैं वीरबहादुर सिंह यूनिवर्सिटी माइग्रेशन सर्टिफिकेट लेने के लिए पहुंची तो इस मार्कशीट को यूनिवर्सिटी द्वारा फर्जी बताया गया। ऐसे में छात्र के बीटीसी में दाखिला भी अधर में लटक गया है और पैसे भी। इस संबंध में अमरनाथ मिश्र पीजी कालेज के प्राचार्य डॉ. गणेश पाठक ने बताया कि लिखित शिकायत पत्र मिला है, जांच कर संबंधित दोषी अध्यापक के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
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