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नहीं खुले अधिकांश क्रय केंद्र, गेहूं बेचने को किसान परेशान
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बलिया। गेहूं खरीद के लिए जिला प्रशासन ने क्रय केंद्रों का निर्धारण तो कर दिया है लेकिन अधिकांश केेंद्र अभी नहीं खुल सके हैं। इसके चलते किसान गेहूं बेचने के लिए परेशान हैं। विभाग का दावा है कि अबतक 600 क्विंटल गेहूं की खरीद की गई है। हालांकि लक्ष्य 980000 क्विंटल गेहूं की खरीद का है।
जिले में कुल 71 गेहूं क्रय केंद्र बनाए गए हैं। इसमें इसमें मार्केटिंग विभाग के 15, पीसीएफ के 39, एग्रो के चार, कर्मचारी कल्याण निगम के पांच, नेफेड के सात व एफसीआई के एक क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं। एक अप्रैल से केंद्रों का संचालित करने का निर्देश दिया गया था। जनपद में कुल नौ लाख 80 हजार क्विंटल गेहूं खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है लेकिन एक पखवारा बीत जाने के बाद भी अधिकांश क्रय केंद्र धरातल पर नहीं खुल सके हैं और गेहूं खरीद को लेकर सभी तरह के इंतजाम नहीं हो सके हैं। शासन की ओर से क्रय केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक कांटा, नमी मापक यंत्र के अलावा किसानों के बैठने व ठहरने, अनाज को बोरियों में भरने व तौल आदि के लिए मजदूर, पेयजल आदि का इंतजाम करने का निर्देश दिया गया है। अधिकांश केंद्रों पर न तो इलेक्ट्रॉनिक कांटे लगे हैं और न ही नमी मापक यंत्र ही हैं। इसके अलावा अन्य सुविधाओं का भी टोटा है। उधर, गेहूं क्रय केंद्रों का संचालन शुरु होते ही बिचौलिए भी सक्रिय हो गए हैं और केंद्र प्रभारियों से सांठ-गांठ कर गेहूं बेचने के काम में जुट गए हैं।
क्रय केंद्रों पर सरकार की ओर से प्रति कुंतल 1840 रुपये की दर से गेहूं खरीदने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा किसानों को प्रति क्विंटल 20 रुपये ढुलाई आदि के लिए भी भुगतान किया जाएगा। जिला विपणन अधिकारी नरेंद्र तिवारी ने बताया कि किसानों से गेहूं खरीद के लिए सभी क्रय केंद्रों पर बोरियां व धनराशि उपलब्ध करा दी गई हैं। खाद्य विभाग के प्रत्येक केंद्र को 30 लाख, पीसीएफ के प्रत्येक केंद्र को एक लाख, कर्मचारी कल्याण निगम के प्रत्येक केंद्र को पांच लाख, एग्रो के प्रत्येक केंद्र को दो लाख की धनराशि उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा एफसीआई के केंद्र को प्रतिदिन 10 लाख रुपये का लिमिट है। बताया कि प्रत्येक केंद्रों को ढाई हजार बोरियां उपलब्ध कराई गई हैं। किसानों की सुविधा को देखते हुए ग्रामीण इलाकों के कुल 12 स्थानों पर गेहूं क्रय केंद्र जल्द खोल जाएंगे। इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है और जिलाधिकारी से अनुमति के बाद कार्रवाई की जाएगी।
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अधिकांश क्रय केंद्र संचालित हो चुके हैं। नेफेड के अभी सभी केंद्र नहीं खुले हैं, उन्हें जल्द खोलने का निर्देश दिया गया है। कुछ केंद्रों पर इलेक्टॉनिक कांटे नहीं हैं और इसके लिए मंडी समिति को कांटा उपलब्ध कराने को कहा गया है।
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जिले में कुल 71 गेहूं क्रय केंद्र बनाए गए हैं। इसमें इसमें मार्केटिंग विभाग के 15, पीसीएफ के 39, एग्रो के चार, कर्मचारी कल्याण निगम के पांच, नेफेड के सात व एफसीआई के एक क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं। एक अप्रैल से केंद्रों का संचालित करने का निर्देश दिया गया था। जनपद में कुल नौ लाख 80 हजार क्विंटल गेहूं खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया है लेकिन एक पखवारा बीत जाने के बाद भी अधिकांश क्रय केंद्र धरातल पर नहीं खुल सके हैं और गेहूं खरीद को लेकर सभी तरह के इंतजाम नहीं हो सके हैं। शासन की ओर से क्रय केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक कांटा, नमी मापक यंत्र के अलावा किसानों के बैठने व ठहरने, अनाज को बोरियों में भरने व तौल आदि के लिए मजदूर, पेयजल आदि का इंतजाम करने का निर्देश दिया गया है। अधिकांश केंद्रों पर न तो इलेक्ट्रॉनिक कांटे लगे हैं और न ही नमी मापक यंत्र ही हैं। इसके अलावा अन्य सुविधाओं का भी टोटा है। उधर, गेहूं क्रय केंद्रों का संचालन शुरु होते ही बिचौलिए भी सक्रिय हो गए हैं और केंद्र प्रभारियों से सांठ-गांठ कर गेहूं बेचने के काम में जुट गए हैं।
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क्रय केंद्रों पर सरकार की ओर से प्रति कुंतल 1840 रुपये की दर से गेहूं खरीदने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा किसानों को प्रति क्विंटल 20 रुपये ढुलाई आदि के लिए भी भुगतान किया जाएगा। जिला विपणन अधिकारी नरेंद्र तिवारी ने बताया कि किसानों से गेहूं खरीद के लिए सभी क्रय केंद्रों पर बोरियां व धनराशि उपलब्ध करा दी गई हैं। खाद्य विभाग के प्रत्येक केंद्र को 30 लाख, पीसीएफ के प्रत्येक केंद्र को एक लाख, कर्मचारी कल्याण निगम के प्रत्येक केंद्र को पांच लाख, एग्रो के प्रत्येक केंद्र को दो लाख की धनराशि उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा एफसीआई के केंद्र को प्रतिदिन 10 लाख रुपये का लिमिट है। बताया कि प्रत्येक केंद्रों को ढाई हजार बोरियां उपलब्ध कराई गई हैं। किसानों की सुविधा को देखते हुए ग्रामीण इलाकों के कुल 12 स्थानों पर गेहूं क्रय केंद्र जल्द खोल जाएंगे। इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है और जिलाधिकारी से अनुमति के बाद कार्रवाई की जाएगी।
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अधिकांश क्रय केंद्र संचालित हो चुके हैं। नेफेड के अभी सभी केंद्र नहीं खुले हैं, उन्हें जल्द खोलने का निर्देश दिया गया है। कुछ केंद्रों पर इलेक्टॉनिक कांटे नहीं हैं और इसके लिए मंडी समिति को कांटा उपलब्ध कराने को कहा गया है।