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धड़ल्ले से संचालित हो रहे अवैध नसिंग होम
Updated Mon, 22 Jan 2018 11:13 PM IST
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बलिया। जिले में अवैध नर्सिंग होमों को संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा है। विभागीय उदासीनता का खामियाजा मरीज और तीमारदार झेल रहे। स्वास्थ्य महकमा महज छापेमारी कर खानापूर्ति कर रहा है।
स्वास्थ्य महकमा की उदासीनता के कारण जनपद में अवैध नर्सिंग होम का मकड़जाल फैला हुआ है। ऐसे नर्सिंग होम में मरीजों की सुविधाएं कम शोषण अधिक होता है। इलाज के नाम पर लूट मची हुई है। सीएमओ कार्यालय में मात्र 43 नर्सिंग होम और अस्पताल ही पंजीकृत हैं। शेष नर्सिंग होम व अस्पताल अवैध रूप से संचालित हो रहे है। अवैध नर्सिंग होम के संचालन होने से जहां मरीजों व तीमारदारों का शोषण होता है। विभागीय अधिकारी अवैध नर्सिंग होम की जांच अभियान चलाने का दावा तो करते हैं लेकिन वह भी कागजों तक ही सीमित होकर रह जाता है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में 2017-18 में जनपद में कुल 43 नर्सिंग होम ही पंजीकृत हैं। लेकिन हकीकत कुछ और ही है। शहर के अलावा नगरीय इलाकों की गलियों में भी नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं। ऐसे नर्सिंग होम की जानकारी के बावजूद महकमा उदासीन बना हुआ है। जब किसी नर्सिंग होम या अस्पताल में घटना घटित हो जाती है तो स्वास्थ्य महकमा द्वारा टीम गठित कर एक-दो दिन छापेमारी कर खानापूर्ति कर दी जाती है। फिर एक सप्ताह बाद मामला पुन: ठंडा बस्ता में चला जाता है।
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कोट
अवैध नर्सिंग होम संचालन को लेकर विभाग सक्रिय है। शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई भी होती है। अभियान चलाकर नर्सिंग होमों के पंजीयन संबंधी जांच की जाएगी।
-डा. एसपी राय, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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स्वास्थ्य महकमा की उदासीनता के कारण जनपद में अवैध नर्सिंग होम का मकड़जाल फैला हुआ है। ऐसे नर्सिंग होम में मरीजों की सुविधाएं कम शोषण अधिक होता है। इलाज के नाम पर लूट मची हुई है। सीएमओ कार्यालय में मात्र 43 नर्सिंग होम और अस्पताल ही पंजीकृत हैं। शेष नर्सिंग होम व अस्पताल अवैध रूप से संचालित हो रहे है। अवैध नर्सिंग होम के संचालन होने से जहां मरीजों व तीमारदारों का शोषण होता है। विभागीय अधिकारी अवैध नर्सिंग होम की जांच अभियान चलाने का दावा तो करते हैं लेकिन वह भी कागजों तक ही सीमित होकर रह जाता है।
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मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में 2017-18 में जनपद में कुल 43 नर्सिंग होम ही पंजीकृत हैं। लेकिन हकीकत कुछ और ही है। शहर के अलावा नगरीय इलाकों की गलियों में भी नर्सिंग होम संचालित हो रहे हैं। ऐसे नर्सिंग होम की जानकारी के बावजूद महकमा उदासीन बना हुआ है। जब किसी नर्सिंग होम या अस्पताल में घटना घटित हो जाती है तो स्वास्थ्य महकमा द्वारा टीम गठित कर एक-दो दिन छापेमारी कर खानापूर्ति कर दी जाती है। फिर एक सप्ताह बाद मामला पुन: ठंडा बस्ता में चला जाता है।
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अवैध नर्सिंग होम संचालन को लेकर विभाग सक्रिय है। शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई भी होती है। अभियान चलाकर नर्सिंग होमों के पंजीयन संबंधी जांच की जाएगी।
-डा. एसपी राय, मुख्य चिकित्सा अधिकारी