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बीडीओ ने रोजगार सेवक को ठहराया मानसिक रोगी
Updated Sat, 15 Jul 2017 12:19 AM IST
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बलिया। मुख्यमंत्री को पत्र भेज गुहार लगाने के बाद दलित रोजगार सेवक लक्ष्मण प्रसाद को मानदेय तो मिल गया, लेकिन बीडीओ ने उन्हें पत्र जारी कर मानसिक रूप से बीमार करार दिया और इलाज कराने की नसीहत दी। जिससे नाराज रोजगार सेवक भी उपायुक्त श्रम एवं रोजगार सेवक को पत्र लिख बीडीओ से सवाल दागा है। उन्होंने बीडीओ से पूछा कि 11 महीने से मानदेय रोकने के बावजूद आप इलाज कराने की नसीहत देते हैं, क्या आप मेरा इलाज कराएंगे!
गौरतलब हो कि बीते 10 दिन पूर्व जब जनपद के सारे रोजगार सेवकों को आठ-आठ महीने का मानदेय दिया गया तो दुबहर ब्लाक के सांसद गांव ओझवलिया में तैनात लक्ष्मण प्रसाद का मानदेय किसी कारणवश रोक दिया गया था। इसके बाद रोजगार सेवकों ने आलाधिकारी के यहां गुहार लगाई, लेकिन मानदेय नहीं मिला। इधर उनका परिवार गरीबी से जूझ रहा है। आर्थिक अभाव के चलते समुचित इलाज भी नहीं हो पा रहा है।
जिससे थक-हारे रोजगार सेवक ने अंतत: मुख्यमंत्री योगी को पत्र लिखा था। जिसको अमर उजाला ने तीन जुलाई को ‘हाकिम! दलित होना गुनाह है क्या’ शीर्षक से छपा था। इसके बाद हरकत में आए ब्लाक के जिम्मेदार ने आपाधापी में मानदेय तो दे दिया। लेकिन बीडीओ ने उन्हें मानसिक रूप से बीमार करार देने के साथ-साथ उन्हें इलाज कराने की नसीहत दे डाली। इसके जवाब में शुक्रवार को दलित रोजगार सेवक ने उपायुक्त श्रम एवं रोजगार पत्र सौंप कर कहा है कि आठ महीने का मानदेय मिला, लेकिन 11 महीना का अभी तक नहीं मिला है। ऐसे में इलाज कैसे और कहां से कराऊंगा!
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गौरतलब हो कि बीते 10 दिन पूर्व जब जनपद के सारे रोजगार सेवकों को आठ-आठ महीने का मानदेय दिया गया तो दुबहर ब्लाक के सांसद गांव ओझवलिया में तैनात लक्ष्मण प्रसाद का मानदेय किसी कारणवश रोक दिया गया था। इसके बाद रोजगार सेवकों ने आलाधिकारी के यहां गुहार लगाई, लेकिन मानदेय नहीं मिला। इधर उनका परिवार गरीबी से जूझ रहा है। आर्थिक अभाव के चलते समुचित इलाज भी नहीं हो पा रहा है।
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जिससे थक-हारे रोजगार सेवक ने अंतत: मुख्यमंत्री योगी को पत्र लिखा था। जिसको अमर उजाला ने तीन जुलाई को ‘हाकिम! दलित होना गुनाह है क्या’ शीर्षक से छपा था। इसके बाद हरकत में आए ब्लाक के जिम्मेदार ने आपाधापी में मानदेय तो दे दिया। लेकिन बीडीओ ने उन्हें मानसिक रूप से बीमार करार देने के साथ-साथ उन्हें इलाज कराने की नसीहत दे डाली। इसके जवाब में शुक्रवार को दलित रोजगार सेवक ने उपायुक्त श्रम एवं रोजगार पत्र सौंप कर कहा है कि आठ महीने का मानदेय मिला, लेकिन 11 महीना का अभी तक नहीं मिला है। ऐसे में इलाज कैसे और कहां से कराऊंगा!
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