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जगमगा उठे दिये-झालर, खूब फूटे पटाखे
Updated Wed, 07 Nov 2018 07:36 PM IST
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बलिया। दीपों का पर्व दीपावली पूरे जनपद में बुधवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई। इस दौरान लोगों ने अपने घरों में दीप जलाकर माता लक्ष्मी और गणेश की पूजा अर्चना की। वहीं दूसरी ओर बच्चों ने पटाखे छोड़कर खुशियां मनाई। दीपावली को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखने को मिला। पूजन अर्चन करने के बाद लोग एक दूसरों के घरों में जाकर बधाई और शुभकामना भी दिए।
बुधवार को सुबह से ही मिठाई, कुटकी, बताशा, पटउरा, चिउडा व लाई के दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ लग गई। इस दौरान लोग सूखी और पैकेट वाली मिठाइयों की अधिक कर रहे थे। इसके अलावा मगदर, गोंद, मोतीचूर व सोमपापड़ी मिठाइयों की डिमांड भी अधिक रही। मिठाई विक्रेता उदय ने बताया कि लोगों को शुद्धता की गारंटी वाली मिठाई अधिक पसंद रहे। इसके अलावा फूल-मालाओं की दुकानों पर भी ग्राहकों की भीड़ उमड़ी रही। शाम होते ही नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक घरों पर मिट्टी के दीये तथा मोमबत्ती की रोशनी अपनी छठा बिखेर रही थी। ऐसा प्रतीत हो रहा कि मानो आसमान से तारे जमीन पर उतर आए हो। तत्पश्चात व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठानों तथा आमजन ने अपने-अपने घरों में गणेश-लक्ष्मी की पूजन-अर्चन कर परिवार के साथ मंगलमय की कामना की। शाम से ही आतिशबाजी का जो दौर चला तो वह देर रात तक जारी रहा। इस दौरान बड़े बच्चों ने एटम बम, लाइटर बम, राकेट, बड़ा बम आदि बजाया। वहीं छोटे बच्चों ने फुलझड़ी, महुआ, चिटपुटिया बजाते रहे। पटाखा बजाने वाले स्थान पर अभिभावक बाल्टी में पानी भरकर रखा हुुआ था। इस वर्ष भी आमजन द्वारा सामूहिक रूप से चयनीज पटाखों का बहिष्कार देखने को मिला। प्रत्येक घरों में भारत निर्मित पटाखे ही बजाए गए।
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बुधवार को सुबह से ही मिठाई, कुटकी, बताशा, पटउरा, चिउडा व लाई के दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ लग गई। इस दौरान लोग सूखी और पैकेट वाली मिठाइयों की अधिक कर रहे थे। इसके अलावा मगदर, गोंद, मोतीचूर व सोमपापड़ी मिठाइयों की डिमांड भी अधिक रही। मिठाई विक्रेता उदय ने बताया कि लोगों को शुद्धता की गारंटी वाली मिठाई अधिक पसंद रहे। इसके अलावा फूल-मालाओं की दुकानों पर भी ग्राहकों की भीड़ उमड़ी रही। शाम होते ही नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के प्रत्येक घरों पर मिट्टी के दीये तथा मोमबत्ती की रोशनी अपनी छठा बिखेर रही थी। ऐसा प्रतीत हो रहा कि मानो आसमान से तारे जमीन पर उतर आए हो। तत्पश्चात व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठानों तथा आमजन ने अपने-अपने घरों में गणेश-लक्ष्मी की पूजन-अर्चन कर परिवार के साथ मंगलमय की कामना की। शाम से ही आतिशबाजी का जो दौर चला तो वह देर रात तक जारी रहा। इस दौरान बड़े बच्चों ने एटम बम, लाइटर बम, राकेट, बड़ा बम आदि बजाया। वहीं छोटे बच्चों ने फुलझड़ी, महुआ, चिटपुटिया बजाते रहे। पटाखा बजाने वाले स्थान पर अभिभावक बाल्टी में पानी भरकर रखा हुुआ था। इस वर्ष भी आमजन द्वारा सामूहिक रूप से चयनीज पटाखों का बहिष्कार देखने को मिला। प्रत्येक घरों में भारत निर्मित पटाखे ही बजाए गए।
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