फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Responding Ragini plea District Magistrate walked kilometer to reach her home provided tricycle books

न्यूज इंपैक्ट: रागिनी की पुकार पर एक किलोमीटर पैदल चलकर घर पहुंचे डीएम, ट्राईसाइकिल संग पढ़ाई का सामान दिया

Wed, 02 Sep 2026 07:26 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, बलिया।
अमर उजाला नेटवर्क, बलिया। Published by: Aman Vishwakarma Updated Wed, 02 Sep 2026 07:26 PM IST
सार

एक पैर से कूदकर स्कूल जाने वाली सात वर्षीय रागिनी की पुकार पर जिलाधिकारी करीब एक किलोमीटर पैदल चलकर उसके घर पहुंचे। उन्होंने छात्रा से मुलाकात कर ट्राईसाइकिल और पढ़ाई का सामान दिया। डीएम ने पूछा कि और कुछ चाहिए? रागिनी ने कहा-नहीं, अब डॉक्टर बनना है। उसकी बात सुनकर अधिकारी ने हौसला बढ़ाया।

विज्ञापन
Responding Ragini plea District Magistrate walked kilometer to reach her home provided tricycle books
रागिनी के साथ जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह। - फोटो : संवाद

विस्तार

एक पैर से कूद-कूदकर स्कूल जाने वाली सात वर्षीय रागिनी की तस्वीर और खबर ने आखिरकार प्रशासन को उसके घर तक पहुंचा दिया। अमर उजाला में संवाद न्यूज एजेंसी से एक सिंतबर के अंक में ‘एक पैर से कूद-कूदकर स्कूल जाती है कक्षा एक की छात्रा रागिनी’ शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने बुधवार को मामले का स्वत: संज्ञान लिया। वह मनियर ब्लॉक के रानीपुर मौजे में रागिनी से मिलने पहुंचे। जर्जर और कीचड़ भरे रास्ते के कारण जिलाधिकारी को मनियर-बलिया मार्ग पर अपना वाहन छोड़कर करीब एक किलोमीटर पैदल चलना पड़ा।

विज्ञापन


बूंदाबांदी के बीच डीएम को अपने घर के सामने देख रागिनी और उसके परिजनों के साथ ही ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे। जिलाधिकारी ने रागिनी को दो ट्राईसाइकिल, कॉपी-किताब, पढ़ाई की सामग्री, खेलकूद का सामान, चॉकलेट समेत अन्य वस्तुओं की किट प्रदान की। उन्होंने बच्ची से बातचीत कर उसकी जरूरतें पूछीं। डीएम ने कहा कि और कुछ चाहिए तो बताओ। इस पर रागिनी ने मासूमियत से कहा, 'नहीं।'
विज्ञापन


इसके बाद जिलाधिकारी ने पूछा कि पढ़-लिखकर क्या बनना चाहती हो। रागिनी ने बिना झिझक कहा, 'डॉक्टर बनना चाहती हूं।' बच्ची की स्पष्ट और आत्मविश्वास भरी बात सुनकर डीएम भी प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि रागिनी बेहद होनहार है और भविष्य में काफी आगे बढ़ेगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

आवास और सड़क बनवाने का दिया भरोसा
जिलाधिकारी ने रागिनी के परिवार की समस्याओं की भी जानकारी ली। उन्होंने प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत परिवार को आवास दिलाने का आश्वासन दिया। घर में शौचालय नहीं होने की जानकारी मिलने पर अधिकारियों से स्थिति पूछी गई। बताया गया कि शौचालय के लिए धनराशि मिल चुकी है और जल्द निर्माण कराया जाएगा। रागिनी के घर से स्कूल तक जाने वाले जर्जर मार्ग को देखकर डीएम ने प्रधान, सचिव और बीडीओ को सड़क का एस्टीमेट तैयार कर भेजने का निर्देश दिया। उन्होंने गांव की अन्य समस्याओं की भी जानकारी ली और वहां रहने वाले दिव्यांगजनों का विवरण तैयार कर रिपोर्ट देने को कहा।

छह माह की उम्र में टूटा था पैर, इलाज में बिक गए गहने
रागिनी के पैर के इलाज के बारे में जिलाधिकारी ने उसकी मां बबीता से जानकारी ली। बबीता ने बताया कि रागिनी करीब छह माह की थी, तभी उसे इलाज के लिए बलिया ले जाते समय रास्ते में हादसा हो गया और उसका पैर टूट गया। इसके बाद मऊ तक कई जगह इलाज कराया गया। इलाज में करीब चार लाख रुपये खर्च हो गए। बेटी के इलाज के लिए उसने अपने शरीर के सारे गहने तक बेच दिए। काफी इलाज के बाद डॉक्टरों ने बताया कि पैर अब ठीक नहीं हो पाएगा। इसके बाद वह थक-हारकर बैठ गई।

रागिनी के इलाज को लेकर डीएम ने सीएमओ डॉ. अभय नारायण राय से जानकारी ली और बच्ची की जांच कराने के बाद हायर सेंटर भेजने के निर्देश दिए। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुराग सिंह ने बताया कि पैर काफी समय से टूटा होने के कारण उसे जोड़ना संभव नहीं है, हालांकि बच्ची की आवश्यक जांच कराई जाएगी। पीएचसी मनियर प्रभारी डॉ. दिग्विजय कुमार को रागिनी को वाहन से बलिया ले जाकर जांच कराने की जिम्मेदारी दी गई।

भावुक होकर बोली-‘नहीं, मत जाइए’
रागिनी से बातचीत के दौरान माहौल उस समय भावुक हो गया, जब डीएम वापस लौटने लगे तो बच्ची ने उनसे कहा, “नहीं, मत जाइए।” रागिनी की इस मासूम पुकार ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। ग्रामीणों ने कहा कि रागिनी की पीड़ा ही थी, जिसने जिलाधिकारी को गांव तक आने के लिए मजबूर किया। डीएम मंगला प्रसाद सिंह ने मीडिया के सवालों के जवाब में कहा कि रागिनी की पुकार जब खबरों के माध्यम से सामने आई तो वह उससे मिलने आए। बच्ची का हरसंभव इलाज कराया जाएगा और उसकी वास्तविक जरूरत के अनुसार मदद की जाएगी।

अमर उजाला की खबर पढ़कर मदद को आगे आए आनंद
अमर उजाला में रागिनी की खबर प्रकाशित होने के बाद गुजरात के सूरत में वोल्टा ग्रीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में कार्यरत जौनपुर निवासी आनंद उपाध्याय ने अमर उजाला से दूरभाष पर संपर्क किया। उन्होंने कहा कि रागिनी के इलाज और उसकी जरूरत की हर चीज पूरी करने के लिए वह तत्पर हैं। इलाज में चाहे जितना खर्च आए, वह परिवार का पूरा खर्च उठाने के लिए तैयार हैं। 

उन्होंने परिवार से अपील की कि वे जहां उचित समझें, वहां बच्ची का इलाज कराएं, इलाज का पूरा खर्च वह वहन करेंगे। इस दौरान सीएमओ डॉ. अभय नारायण राय, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुराग सिंह, बेसिक शिक्षा अधिकारी मनीष कुमार सिंह, डीपीआरओ अवनीश कुमार श्रीवास्तव, बीडीओ मनियर शत्रुघ्न सिंह, पीएचसी मनियर प्रभारी डॉ. दिग्विजय कुमार, ग्राम पंचायत सचिव गिरीश कुमार पांडेय, ग्राम प्रधान राजू प्रसाद सहित अन्य अधिकारी व ग्रामीण मौजूद रहे।

सोशल मीडिया पर मदद के लिए बढ़े हाथ
दिव्यांग...लेकिन साहसी रागिनी की खबर सोशल मीडिया पर वायरल होते ही मदद के लिए कई हाथ आगे आए हैं। किसी ने ट्राई साइकिल देने की बात कही है तो किसी ने अस्पतालों के नाम सुझाए हैं। आम आदमी पार्ट के कार्यकर्ताओं ने रागिनी के घर पहुंच व्हील चेयर और 25 हजार की मदद उपलब्ध कराई। आप के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने इसे अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट किया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed