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बजट खपाने में जुटा शिक्षा महकमा
Updated Thu, 08 Mar 2018 10:36 PM IST
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बलिया। वित्तीय वर्ष की समाप्ति को देखते हुए अधिकांश विभाग बजट खपाने की जुगत में लग गए हैं। कई विभाग अभी तक बजट का कुछ हिस्सा ही खर्च कर पाए हैं और अब आनन-फानन में बचा धन खर्च करने की कवायद कर रहे हैं। शिक्षा विभाग भी इसे अछूता नहीं है।
बेसिक शिक्षा विभाग जहां अबतक 45 फीसदी बजट खर्च चुका है वहीं माध्यमिक शिक्षा विभाग का निर्धारित बजट पूरा उपलब्ध नहीं है। खासकर गैर वेतन मद को खर्च करने में विभाग ने दिलचस्पी ली है। बेसिक शिक्षा विभाग को शासन से अरबों का बजट मिलता है। लेकिन खर्च करने में मनमानी की जाती है। विभाग को कुल दो करोड़ 94 लाख 25 हजार 510 का बजट अलग-अलग मदों में प्राप्त होता है। लेकिन अभी तक एक करोड़ 57 लाख 22 हजार 562 रुपये ही खर्च हुए हैं जबकि वित्तीय साल बीतने में मात्र 22 दिन ही बचे हैं। इसमें भी गैर वेतन मद में आए 90 लाख पांच हजार 810 के सापेक्ष 75 लाख पांच हजार दो रुपये खर्च किए गए हैं। विभाग को एडेेड के वेतन व अन्य के मद में कुल चार अरब 90 करोड़ 15 लाख की धनराशि प्राप्त हुई है जबकि अब तक चार अरब 53 करोड़ 72 लाख छह हजार 886 रुपये खर्च किए गए हैं। इसके अलावा गैर वेतन मद में 49 करोड़ 50 लाख के सापेक्ष अब तक 47 करोड़ 26 लाख 60 हजार 357 रुपये खर्च किए गए हैं। गैर वेतन मद में मिले 49 लाख 36 हजार 947 के सापेक्ष मद में केवल 100 रुपये ही बचे हैं और बाकी धनराशि खर्च कर दी गई है। इसी तरह जिले में उच्च शिक्षा के लिए कुल 30 करोड़ 11 लाख का बजट प्राप्त हुआ है। इसमें से अब तक 29 करोड़ चार लाख 34 हजार 715 की धनराशि खर्च हो चुकी है।
जिले में माध्यमिक शिक्षा के लिए कुल एक अरब 20 करोड़ 34 लाख 70 हजार 996 के बजट के सापेक्ष एक अरब 14 करोड़ 90 लाख 96 हजार 414 रुपये खर्च किए गए हैं। विभागीय अधिकारी की मानें तो वेतन मद में अभी करीब 15 करोड़ के बजट की आवश्यकता है। वेतन मद में प्राप्त हुए 95 करोड़ 20 लाख 17 हजार 125 के सापेक्ष 94 करोड़ पांच लाख 45 हजार की धनराशि खर्च हो चुकी है। इस बचे हुए करीब छह करोड़ को खपाने में विभाग जुटा हुआ है।
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विभाग में मूल रुप से वेतन मद में बजट मिलता है जिसे खर्च किया जाता है। वर्ष 2017-18 में इस मद में भी अभी बजट नहीं मिला है। बजट के अनुसार ही खर्च करने का काम किया जाता है।
= एएन राय, जिला विद्यालय निरीक्षक
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बेसिक शिक्षा विभाग जहां अबतक 45 फीसदी बजट खर्च चुका है वहीं माध्यमिक शिक्षा विभाग का निर्धारित बजट पूरा उपलब्ध नहीं है। खासकर गैर वेतन मद को खर्च करने में विभाग ने दिलचस्पी ली है। बेसिक शिक्षा विभाग को शासन से अरबों का बजट मिलता है। लेकिन खर्च करने में मनमानी की जाती है। विभाग को कुल दो करोड़ 94 लाख 25 हजार 510 का बजट अलग-अलग मदों में प्राप्त होता है। लेकिन अभी तक एक करोड़ 57 लाख 22 हजार 562 रुपये ही खर्च हुए हैं जबकि वित्तीय साल बीतने में मात्र 22 दिन ही बचे हैं। इसमें भी गैर वेतन मद में आए 90 लाख पांच हजार 810 के सापेक्ष 75 लाख पांच हजार दो रुपये खर्च किए गए हैं। विभाग को एडेेड के वेतन व अन्य के मद में कुल चार अरब 90 करोड़ 15 लाख की धनराशि प्राप्त हुई है जबकि अब तक चार अरब 53 करोड़ 72 लाख छह हजार 886 रुपये खर्च किए गए हैं। इसके अलावा गैर वेतन मद में 49 करोड़ 50 लाख के सापेक्ष अब तक 47 करोड़ 26 लाख 60 हजार 357 रुपये खर्च किए गए हैं। गैर वेतन मद में मिले 49 लाख 36 हजार 947 के सापेक्ष मद में केवल 100 रुपये ही बचे हैं और बाकी धनराशि खर्च कर दी गई है। इसी तरह जिले में उच्च शिक्षा के लिए कुल 30 करोड़ 11 लाख का बजट प्राप्त हुआ है। इसमें से अब तक 29 करोड़ चार लाख 34 हजार 715 की धनराशि खर्च हो चुकी है।
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जिले में माध्यमिक शिक्षा के लिए कुल एक अरब 20 करोड़ 34 लाख 70 हजार 996 के बजट के सापेक्ष एक अरब 14 करोड़ 90 लाख 96 हजार 414 रुपये खर्च किए गए हैं। विभागीय अधिकारी की मानें तो वेतन मद में अभी करीब 15 करोड़ के बजट की आवश्यकता है। वेतन मद में प्राप्त हुए 95 करोड़ 20 लाख 17 हजार 125 के सापेक्ष 94 करोड़ पांच लाख 45 हजार की धनराशि खर्च हो चुकी है। इस बचे हुए करीब छह करोड़ को खपाने में विभाग जुटा हुआ है।
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विभाग में मूल रुप से वेतन मद में बजट मिलता है जिसे खर्च किया जाता है। वर्ष 2017-18 में इस मद में भी अभी बजट नहीं मिला है। बजट के अनुसार ही खर्च करने का काम किया जाता है।
= एएन राय, जिला विद्यालय निरीक्षक