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वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से बिगड़ा मौसम का मिजाज
अमर उजाला ब्यूरो/बहराइच
Updated Tue, 01 Dec 2015 10:09 PM IST
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बहराइच। तराई में मंगलवार शाम अचानक मौसम ने करवट ले ली। बादल छा गए और तेज हवा चलने गई। इससे विजिबिलिटी भी काफी कम हो गई। इससे तापमान में गिरावट दर्ज होने के साथ ही सिहरन बढ़ गई है।
मौसमविद अचानक हुए परिवर्तन का कारण वेस्टर्न डिस्टर्बेंस बता रहे हैं। यह स्थिति आगामी दो दिन तक बरकरार रह सकती है।
मंगलवार दोपहर तक अच्छी धूप लोगों को राहत दे रही थी। शाम होते-होते जब सूरज ढलने लगा तभी 4:30 बजे के आसपास अचानक घने बादल छा गए।
कुछ ही देर में पूर्वोत्तर दिशा में 18 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवा चलने लगी, जिससे सड़कों पर उड़ रही धूल से राहगीर बहुत परेशान हुए।
ये स्थिति शाम करीब 6:60 बजे तक रही। इसी बीच दफ्तरों से लौटने वाले लोग सबसे ज्यादा परेशान रहे। बारिश के भी आसार बने लेकिन बादल बिना बरसे ही छट गए।
फसल अनुसंधान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एमवी सिंह का कहना है कि वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के चलते प्रदेश का एक बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ है।
उसी का असर तराई के मौसम पर भी देखने को मिल रहा है। पहाड़ों पर शुरू हुई बर्फबारी से मौसम परिवर्तित हुआ है। यह स्थिति आगामी दो तीन दिन तक बरकरार रह सकती है।
गेहूं के किसान कर लें इंतजाम
प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एमवी सिंह का कहना है कि जो किसान गेहूं की बोवाई करने की सोच रहे हैं, उन्हें कम से दो तीन दिन मौसम का मिजाज देख लेना चाहिए। मौसम में सुधार होने पर ही वे बोवाई करें।
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मौसमविद अचानक हुए परिवर्तन का कारण वेस्टर्न डिस्टर्बेंस बता रहे हैं। यह स्थिति आगामी दो दिन तक बरकरार रह सकती है।
मंगलवार दोपहर तक अच्छी धूप लोगों को राहत दे रही थी। शाम होते-होते जब सूरज ढलने लगा तभी 4:30 बजे के आसपास अचानक घने बादल छा गए।
कुछ ही देर में पूर्वोत्तर दिशा में 18 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवा चलने लगी, जिससे सड़कों पर उड़ रही धूल से राहगीर बहुत परेशान हुए।
ये स्थिति शाम करीब 6:60 बजे तक रही। इसी बीच दफ्तरों से लौटने वाले लोग सबसे ज्यादा परेशान रहे। बारिश के भी आसार बने लेकिन बादल बिना बरसे ही छट गए।
फसल अनुसंधान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एमवी सिंह का कहना है कि वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के चलते प्रदेश का एक बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ है।
उसी का असर तराई के मौसम पर भी देखने को मिल रहा है। पहाड़ों पर शुरू हुई बर्फबारी से मौसम परिवर्तित हुआ है। यह स्थिति आगामी दो तीन दिन तक बरकरार रह सकती है।
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गेहूं के किसान कर लें इंतजाम
प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एमवी सिंह का कहना है कि जो किसान गेहूं की बोवाई करने की सोच रहे हैं, उन्हें कम से दो तीन दिन मौसम का मिजाज देख लेना चाहिए। मौसम में सुधार होने पर ही वे बोवाई करें।
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