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नदी के मुहाने पर जरमापुर गांव
अमर उजाला/बहराइच
Updated Thu, 06 Jul 2017 10:52 PM IST
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कटान करती नदी
- फोटो : अमर उजाला
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तराई और नेपाल के पहाड़ों पर हो रही बरसात से घाघरा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। नदी खतरे के निशान की ओर तेजी से बढ़ रही है। लाल निशान से नदी की लहरें सिर्फ सात सेंटीमीटर दूर हैं। इसके साथ ही कटान तेज हो गई है। महसी क्षेत्र में रात से अब तक 55 बीघा खेती योग्य जमीन नदी में समा गई है।
वहीं, कटान के चलते ग्राम पंचायत कायमपुर का मजरा जरमापुर पूरी तरह नदी के निशाने पर आ गया है। प्राथमिक विद्यालय का भवन लीलने के बाद नदी की लहरों ने जरमापुर गांव में कटान तेज कर दी है। तीन ग्रामीणों के मकान इस समय कट रहे हैं। सूचना के बावजूद अब तक कटान रोकने के कोई उपाय नहीं किए गए हैं। इससे बेबस ग्रामीण गृहस्थी समेटकर पलायन करने को मजबूर हैं।
तराई में मानसून की सक्रियता के साथ झमाझम बरसात शुरू हो गई है। 20 घंटे निरंतर वर्षा हुई। इसके बाद आसमान साफ हुआ। लेकिन नेपाल के पहाड़ों पर वर्षा निरंतर जारी है। इसका असर यह है कि घाघरा नदी के जलस्तर में तेजी से इजाफा हो रहा है। केंद्रीय जल आयोग संस्थान घाघराघाट के मापक जगदीश साहनी ने बताया कि एक से डेढ़ सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से नदी का जलस्तर बढ़ रहा है।
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गुरुवार को दोपहर दो बजे एल्गिन ब्रिज पर नदी का जलस्तर 105.466 मीटर रिकॉर्ड हुआ। जल मापक ने बताया कि नदी खतरे के निशान से महज 60 सेंटीमीटर दूर है। अगर जलस्तर बढ़ने की यही स्थिति रही तो आगामी 48 घंटे में नदी खतरे का निशान पार कर सकती है। वहीं, जलस्तर में इजाफा होने से कटान भी तेजी से हो रही है। महसी और कैसरगंज तहसील क्षेत्र में नदी तेज कटान कर रही है।
प्राथमिक विद्यालय कायमपुर के भवन को लीलने के बाद अब नदी की लहरें ग्राम जरमापुर को काटने को बेताब दिख रही है। इस समय गांव निवासी मूसुद्दीन, असगर अली और सकीना के खपरैल और फूस के मकानों पर नदी कटान कर रही है।
वहीं, खेती योग्य जमीन भी तेजी से नदी में समाहित हो रही है। कायमपुर, जरमापुर, मंगलपुरवा, चुरईपुरवा गांव निवासी रामपल्टन, आशिमा, अकबर, जगतनरायन, रामप्रसाद, भगौती प्रसाद समेत 16 ग्रामीणों की 55 बीघा खेती योग्य जमीन नदी में समाहित हो गई है। लोगों के खेतों में गन्ना, उड़द और मूंग की फसलें लगी हुई हैं जो कटान की भेंट चढ़ रही हैं।
अपर जिलाधिकारी संतोष कुमार राय ने बताया कि घाघरा नदी के जलस्तर में इजाफे को देखते हुए बाढ़ से निपटने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कभी भी बाढ़ की स्थितियां बन सकती हैं। उन्होंने कहा कि कलेक्ट्रेट स्थित जिला आपदा नियंत्रण केंद्र में बाढ़ कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है।
कंट्रोल रूम का नंबर 05252-230132 तथा टोल फ्री नंबर 1077 है। कंट्रोल रूम संचालन के लिए 31 जुलाई तक अधिकारियों व कर्मचारियों की तैनाती की गई है। कंट्रोल रूम अवकाश के दिनों में भी खुला रहेगा। केंद्र का प्रभारी डिप्टी कलेक्टर मंगलेश दुबे व अरुण कुमार गोंड को बनाया गया है। इसके अलावा क्लाक वाइज अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। 24 घंटे नियंत्रण कक्ष कार्य करेगा।
एडीएम ने बताया कि कैलाशपुरी गिरिजापुरी बैराज से एक लाख 17 हजार 776 क्यूसेक पानी इस समय घाघरा में डिस्चार्ज हो रहा है। वहीं गोपिया बैराज से सरयू नदी में डिस्चार्ज की स्थिति 2154 क्यूसेक है। जबकि शारदा बैराज से 7625 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा है।
अपर जिलाधिकारी संतोष कुमार राय ने कहा कि नदियों पर निरंतर नजर रखी जा रही है। अभी जलस्तर खतरे से काफी नीचे है। एल्गिन ब्रिज पर नदी खतरे के निशान से 60 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। वहीं, महसी में घूरदेवी पर खतरे का निशान 112.135 के सापेक्ष 111.115 दर्ज किया गया है।
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वहीं, कटान के चलते ग्राम पंचायत कायमपुर का मजरा जरमापुर पूरी तरह नदी के निशाने पर आ गया है। प्राथमिक विद्यालय का भवन लीलने के बाद नदी की लहरों ने जरमापुर गांव में कटान तेज कर दी है। तीन ग्रामीणों के मकान इस समय कट रहे हैं। सूचना के बावजूद अब तक कटान रोकने के कोई उपाय नहीं किए गए हैं। इससे बेबस ग्रामीण गृहस्थी समेटकर पलायन करने को मजबूर हैं।
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तराई में मानसून की सक्रियता के साथ झमाझम बरसात शुरू हो गई है। 20 घंटे निरंतर वर्षा हुई। इसके बाद आसमान साफ हुआ। लेकिन नेपाल के पहाड़ों पर वर्षा निरंतर जारी है। इसका असर यह है कि घाघरा नदी के जलस्तर में तेजी से इजाफा हो रहा है। केंद्रीय जल आयोग संस्थान घाघराघाट के मापक जगदीश साहनी ने बताया कि एक से डेढ़ सेंटीमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से नदी का जलस्तर बढ़ रहा है।
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गुरुवार को दोपहर दो बजे एल्गिन ब्रिज पर नदी का जलस्तर 105.466 मीटर रिकॉर्ड हुआ। जल मापक ने बताया कि नदी खतरे के निशान से महज 60 सेंटीमीटर दूर है। अगर जलस्तर बढ़ने की यही स्थिति रही तो आगामी 48 घंटे में नदी खतरे का निशान पार कर सकती है। वहीं, जलस्तर में इजाफा होने से कटान भी तेजी से हो रही है। महसी और कैसरगंज तहसील क्षेत्र में नदी तेज कटान कर रही है।
प्राथमिक विद्यालय कायमपुर के भवन को लीलने के बाद अब नदी की लहरें ग्राम जरमापुर को काटने को बेताब दिख रही है। इस समय गांव निवासी मूसुद्दीन, असगर अली और सकीना के खपरैल और फूस के मकानों पर नदी कटान कर रही है।
वहीं, खेती योग्य जमीन भी तेजी से नदी में समाहित हो रही है। कायमपुर, जरमापुर, मंगलपुरवा, चुरईपुरवा गांव निवासी रामपल्टन, आशिमा, अकबर, जगतनरायन, रामप्रसाद, भगौती प्रसाद समेत 16 ग्रामीणों की 55 बीघा खेती योग्य जमीन नदी में समाहित हो गई है। लोगों के खेतों में गन्ना, उड़द और मूंग की फसलें लगी हुई हैं जो कटान की भेंट चढ़ रही हैं।
अपर जिलाधिकारी संतोष कुमार राय ने बताया कि घाघरा नदी के जलस्तर में इजाफे को देखते हुए बाढ़ से निपटने की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कभी भी बाढ़ की स्थितियां बन सकती हैं। उन्होंने कहा कि कलेक्ट्रेट स्थित जिला आपदा नियंत्रण केंद्र में बाढ़ कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है।
कंट्रोल रूम का नंबर 05252-230132 तथा टोल फ्री नंबर 1077 है। कंट्रोल रूम संचालन के लिए 31 जुलाई तक अधिकारियों व कर्मचारियों की तैनाती की गई है। कंट्रोल रूम अवकाश के दिनों में भी खुला रहेगा। केंद्र का प्रभारी डिप्टी कलेक्टर मंगलेश दुबे व अरुण कुमार गोंड को बनाया गया है। इसके अलावा क्लाक वाइज अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। 24 घंटे नियंत्रण कक्ष कार्य करेगा।
एडीएम ने बताया कि कैलाशपुरी गिरिजापुरी बैराज से एक लाख 17 हजार 776 क्यूसेक पानी इस समय घाघरा में डिस्चार्ज हो रहा है। वहीं गोपिया बैराज से सरयू नदी में डिस्चार्ज की स्थिति 2154 क्यूसेक है। जबकि शारदा बैराज से 7625 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज हो रहा है।
अपर जिलाधिकारी संतोष कुमार राय ने कहा कि नदियों पर निरंतर नजर रखी जा रही है। अभी जलस्तर खतरे से काफी नीचे है। एल्गिन ब्रिज पर नदी खतरे के निशान से 60 सेंटीमीटर नीचे बह रही है। वहीं, महसी में घूरदेवी पर खतरे का निशान 112.135 के सापेक्ष 111.115 दर्ज किया गया है।