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Bahraich News: सर्दी, जुकाम की ओपीडी तक सिमटा ट्राॅमा सेंटर, रोजाना लखनऊ रेफर हो रहे पांच से छह मरीज
Thu, 24 Jul 2025 01:20 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
Updated Thu, 24 Jul 2025 01:20 AM IST
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बहराइच के ट्रामा सेंटर के वार्ड में भर्ती मरीज।
बहराइच। शहर के चांदपुरा में हाईकोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुआ ट्रॉमा सेंटर केवल सर्दी, जुकाम के मरीजों की ओपीडी तक ही सिमट कर रह गया है जबकि गंभीर रूप से घायल होकर मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में आने वाले मरीजों में से प्रतिदिन पांच से छह की संख्या में लखनऊ ट्राॅमा सेंटर रेफर किए जा रहे हैं। इसमें से प्रतिमाह 10 से अधिक लोगों की मौत रास्ते में या फिर समय से न पहुंच पाने के कारण हो जाती है।
गोंडा, बलरामपुर, बहराइच व श्रावस्ती जिले में दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने वालों वाले मरीजों को त्वरित इलाज के लिए जिले के चांदपुरा में ट्राॅमा सेंटर का निर्माण कराया गया है। इसका उद्घाटन हुए करीब दो माह से अधिक का समय हो गया लेकिन यहां दुर्घटना के शिकार एक भी मरीज को नहीं भेजा गया। इसका कारण है कि यहां केवल जुकाम, बुखार व खांसी के इलाज करने की ही व्यवस्था है।
मशीन के नाम पर इनके पास केवल एक एक्सरे व एक ओटी ही है। यहां कोई सुविधा न होने के कारण दुर्घटना के सभी मरीजों को मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में लाया जाता है। वहां हालत गंभीर होने के बाद लखनऊ ट्राॅमा सेंटर रेफर कर दिया जाता है। यदि आंकड़ों को देखा जाय तो प्रतिदिन पांच से छह गंभीर मरीजों को लखनऊ ट्राॅमा सेंटर रेफर किया जाता है। इसमें से प्रति माह 10 से 15 मरीजों की समय पर ट्राॅमा न पहुंचने के कारण रास्ते में ही मौत हो जाती है। यदि जिले के ट्राॅमा सेंटर का संचालन ठीक ढंग से हो तो इन मरीजों की जान बचाई जा सकती थी।
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हाईकोर्ट के आदेश पर शुरू हुआ था ट्राॅमा सेंटर
वर्ष 2016 में शहर के चांदपुरा में करीब तीन करोड़ की लागत से ट्राॅमा सेंटर का निर्माण कराया गया था। यह भवन 2019 में बन कर तैयार हो गया लेकिन इसका संचालन शुरू नही हुआ। वर्ष 2025 में हाईकोर्ट में दाखिल एक पीआईएल की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने तत्काल जिले में ट्राॅमा सेंटर शुरू करने का आदेश दिया था। इसी के बाद आनन फानन 40 बेड के ट्रॉमा सेंटर को शुरू करने के लिए छह चिकित्सकों की तैनाती कर दी गई। इनमें तीन विशेषज्ञ, तीन एमबीबीएस के साथ तीन फार्मासिस्ट व पांच स्टाफ नर्स, वार्ड बॉय व सफाईकर्मी की तैनाती कर दी गई लेकिन उपकरण के नाम पर यहां केवल एक्सरे मशीन लगाकर ट्राॅमा सेंटर का 10 मई को शुभारंभ करा दिया गया।
ट्राॅमा सेंटर में एक्सरे मशीन व ओटी की व्यवस्था है लेकिन यहां ट्राॅमा के मरीज नही आते, इसलिए ओपीडी कराई जाती है। ट्रॉमा में अन्य अन्य मशीनों के लिए बजट मांगा गया है।
- डाॅ. अनुराग वर्मा, नोडल अधिकारी ट्राॅमा सेंटर
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गोंडा, बलरामपुर, बहराइच व श्रावस्ती जिले में दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने वालों वाले मरीजों को त्वरित इलाज के लिए जिले के चांदपुरा में ट्राॅमा सेंटर का निर्माण कराया गया है। इसका उद्घाटन हुए करीब दो माह से अधिक का समय हो गया लेकिन यहां दुर्घटना के शिकार एक भी मरीज को नहीं भेजा गया। इसका कारण है कि यहां केवल जुकाम, बुखार व खांसी के इलाज करने की ही व्यवस्था है।
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मशीन के नाम पर इनके पास केवल एक एक्सरे व एक ओटी ही है। यहां कोई सुविधा न होने के कारण दुर्घटना के सभी मरीजों को मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में लाया जाता है। वहां हालत गंभीर होने के बाद लखनऊ ट्राॅमा सेंटर रेफर कर दिया जाता है। यदि आंकड़ों को देखा जाय तो प्रतिदिन पांच से छह गंभीर मरीजों को लखनऊ ट्राॅमा सेंटर रेफर किया जाता है। इसमें से प्रति माह 10 से 15 मरीजों की समय पर ट्राॅमा न पहुंचने के कारण रास्ते में ही मौत हो जाती है। यदि जिले के ट्राॅमा सेंटर का संचालन ठीक ढंग से हो तो इन मरीजों की जान बचाई जा सकती थी।
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हाईकोर्ट के आदेश पर शुरू हुआ था ट्राॅमा सेंटर
वर्ष 2016 में शहर के चांदपुरा में करीब तीन करोड़ की लागत से ट्राॅमा सेंटर का निर्माण कराया गया था। यह भवन 2019 में बन कर तैयार हो गया लेकिन इसका संचालन शुरू नही हुआ। वर्ष 2025 में हाईकोर्ट में दाखिल एक पीआईएल की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने तत्काल जिले में ट्राॅमा सेंटर शुरू करने का आदेश दिया था। इसी के बाद आनन फानन 40 बेड के ट्रॉमा सेंटर को शुरू करने के लिए छह चिकित्सकों की तैनाती कर दी गई। इनमें तीन विशेषज्ञ, तीन एमबीबीएस के साथ तीन फार्मासिस्ट व पांच स्टाफ नर्स, वार्ड बॉय व सफाईकर्मी की तैनाती कर दी गई लेकिन उपकरण के नाम पर यहां केवल एक्सरे मशीन लगाकर ट्राॅमा सेंटर का 10 मई को शुभारंभ करा दिया गया।
ट्राॅमा सेंटर में एक्सरे मशीन व ओटी की व्यवस्था है लेकिन यहां ट्राॅमा के मरीज नही आते, इसलिए ओपीडी कराई जाती है। ट्रॉमा में अन्य अन्य मशीनों के लिए बजट मांगा गया है।
- डाॅ. अनुराग वर्मा, नोडल अधिकारी ट्राॅमा सेंटर