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बुखार से तीन बच्चों की मौत
अमर उजाला/बहराइच
Updated Sun, 23 Jul 2017 10:25 PM IST
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अस्पताल में भर्ती बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
मौसम परिवर्तन के साथ ही संक्रामक रोगों का कहर शुरू हो गया है। रविवार को जिला अस्पताल में बुखार से पीड़ित तीन मासूमों की मौत हो गई। वहीं, जिला अस्पताल में बुखार और डायरिया से पीड़ित 13 और रोगी भर्ती हुए हैं, जिनमें दो की हालत नाजुक बताई जा रही है।
तराई में मौसम परिवर्तन मासूमों की जिंदगी पर भारी पड़ने लगा है। शुक्रवार को चार तथा शनिवार को दो मासूमों की मौत से स्वास्थ्य विभाग में जहां हड़कंप मच गया था, वहीं रविवार को तीन और बच्चों ने दम तोड़ दिया। रुपईडीहा थाना क्षेत्र के आंबा पोखर गांव निवासी खातून (डेढ़) पुत्र मुंशरिफ खान को बुखार की शिकायत पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां रविवार को दोपहर में इलाज के दौरान खातून की मौत हो गई।
वहीं, भिनगा के मझौवा निवासी छोटू (7) पुत्र कल्पनाथ ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। कोतवाली देहात क्षेत्र के सबलापुर निवासी मोहिनी (6) पुत्री रामकुमार को शरीर पर दाने व चकत्ते निकलने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों ने खसरे के साथ बुखार होने की बात बताई।
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इलाज के दौरान देर शाम मोहिनी ने भी दम तोड़ दिया। उधर, जिला अस्पताल में बुखार और डायरिया से पीड़ित 13 और रोगी भर्ती हुए हैं। इनमें दो मरीजों की हालत नाजुक बताई जा रही है। इस बारे में जिला अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा ने बताया कि गंभीर हालत में मासूमों को चिकित्सालय में कराया गया था। काफी प्रयास के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका।
इंसेट
बुखार के लक्षण
- बच्चों का बार-बार रोन।
- कोशिश के बाद भी दूध न पीना।
- शरीर में ऐंठन व आंखें लाल होना।
- चेहरे पर सुस्ती और दिन भर सोना।
इंसेट
बचाव के उपाय
- बुखार होने पर कपड़े को पानी से भिगोकर कर माथे पर रखें।
- तेज धूप के बाद पानी पिलाने से बचें।
- नमक व चीनी का घोल बनाकर दें।
- शरीर को कपड़े से ढककर रखें
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तराई में मौसम परिवर्तन मासूमों की जिंदगी पर भारी पड़ने लगा है। शुक्रवार को चार तथा शनिवार को दो मासूमों की मौत से स्वास्थ्य विभाग में जहां हड़कंप मच गया था, वहीं रविवार को तीन और बच्चों ने दम तोड़ दिया। रुपईडीहा थाना क्षेत्र के आंबा पोखर गांव निवासी खातून (डेढ़) पुत्र मुंशरिफ खान को बुखार की शिकायत पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां रविवार को दोपहर में इलाज के दौरान खातून की मौत हो गई।
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वहीं, भिनगा के मझौवा निवासी छोटू (7) पुत्र कल्पनाथ ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। कोतवाली देहात क्षेत्र के सबलापुर निवासी मोहिनी (6) पुत्री रामकुमार को शरीर पर दाने व चकत्ते निकलने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। चिकित्सकों ने खसरे के साथ बुखार होने की बात बताई।
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इलाज के दौरान देर शाम मोहिनी ने भी दम तोड़ दिया। उधर, जिला अस्पताल में बुखार और डायरिया से पीड़ित 13 और रोगी भर्ती हुए हैं। इनमें दो मरीजों की हालत नाजुक बताई जा रही है। इस बारे में जिला अस्पताल के वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. केके वर्मा ने बताया कि गंभीर हालत में मासूमों को चिकित्सालय में कराया गया था। काफी प्रयास के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका।
इंसेट
बुखार के लक्षण
- बच्चों का बार-बार रोन।
- कोशिश के बाद भी दूध न पीना।
- शरीर में ऐंठन व आंखें लाल होना।
- चेहरे पर सुस्ती और दिन भर सोना।
इंसेट
बचाव के उपाय
- बुखार होने पर कपड़े को पानी से भिगोकर कर माथे पर रखें।
- तेज धूप के बाद पानी पिलाने से बचें।
- नमक व चीनी का घोल बनाकर दें।
- शरीर को कपड़े से ढककर रखें