{"_id":"62a629cbeab6d60d57662ef2","slug":"the-road-being-built-to-protect-the-indo-nepal-border-is-incomplete-bahraich-news-lko634904091","type":"story","status":"publish","title_hn":"भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा को बनाई जा रही सड़क अधूरी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भारत-नेपाल सीमा की सुरक्षा को बनाई जा रही सड़क अधूरी
विज्ञापन
भारत-नेपाल सीमा पर बनाई जा रही सड़क।
- फोटो : BAHRAICH
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रूपईडीहा (बहराइच)। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण भारत-नेपाल सीमा पर बनाई जा रही सड़क का निर्माण कच्छप गति से चल रहा है। पांच सालों के बीच मात्र 50 किलोमीटर की सड़क का निर्माण किया गया है। जबकि यह सड़क सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। इस सड़क का निर्माण पूर्ण हो जाने से भारत-नेपाल की खुली सीमा पर एसएसबी जवानों की गश्ती में सहूलियत मिलेगी। इसके साथ ही खुली सीमा पर स्थित एसएसबी की 13 चौकियां आपस में जुड़ जाएंगी। सड़क का निर्माण पूर्ण हो जाने से सीमावर्ती गांवों के वाशिंदों को भी काफी सहूलियत मिलेगी।
भारत-नेपाल के बीच लगभग 80 किलोमीटर की खुली सीमा है। सीमावर्ती क्षेत्र सामरिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। सीमा पर बढ़ती संवेदनशीलता को देखते हुए वर्ष 2002 में भारत-नेपाल की खुली सीमा पर एसएसबी की तैनाती की गई। सुरक्षा को देखते हुए सरकार सीमा के समानांतर सड़क बनाने के लिए एक योजना की शुरुआत की। इस सड़क के बनने से न सिर्फ सीमावर्ती इलाकों में विकास के नए मापदंड स्थापित होते, बल्कि एसएसबी के मूवमेंट को सहूलियत मिलती। लेकिन भारत-नेपाल सीमा पर नो मेंस लैंड के समानांतर सड़क निर्माण कार्य कछुए की गति से भी कम है। पिछले पांच सालों में सिर्फ 50 किलोमीटर सड़क इस परियोजना के अंतर्गत बन पाई है। जबकि इस परियोजना के लिए कई सालों पहले भूमि अधिग्रहण कर ली गई थी।
सड़क निर्माण कार्य पूरा होने पर सशस्त्र सीमा बल की सभी चौकियां आपस में जुड़ जाएंगी। बताते चलें कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सुरक्षा व स्थानीय लोगों के सुविधा के मद्देनजर सड़क निर्माण के निर्देश दिए थे और निर्माण कार्य चालू शुरू हुआ था। बताते चलें कि सीमा क्षेत्र में वन क्षेत्र अधिक होने के कारण एसएसबी के जवानों को गश्त में असुविधा होती है। बारिश में नेपाल की नदियों से पानी आने के चलते क्षेत्र बाढ़ग्रस्त हो जाता है। सीमा क्षेत्र में सड़क व फ्लाईओवर बनने से निगरानी में काफी सहूलियत मिलती। लेकिन कई वर्षों से अधर में लटका निर्माण कार्य सीमा की सुरक्षा करने वाले जवानों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन
भारत-नेपाल के बीच लगभग 80 किलोमीटर की खुली सीमा है। सीमावर्ती क्षेत्र सामरिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। सीमा पर बढ़ती संवेदनशीलता को देखते हुए वर्ष 2002 में भारत-नेपाल की खुली सीमा पर एसएसबी की तैनाती की गई। सुरक्षा को देखते हुए सरकार सीमा के समानांतर सड़क बनाने के लिए एक योजना की शुरुआत की। इस सड़क के बनने से न सिर्फ सीमावर्ती इलाकों में विकास के नए मापदंड स्थापित होते, बल्कि एसएसबी के मूवमेंट को सहूलियत मिलती। लेकिन भारत-नेपाल सीमा पर नो मेंस लैंड के समानांतर सड़क निर्माण कार्य कछुए की गति से भी कम है। पिछले पांच सालों में सिर्फ 50 किलोमीटर सड़क इस परियोजना के अंतर्गत बन पाई है। जबकि इस परियोजना के लिए कई सालों पहले भूमि अधिग्रहण कर ली गई थी।
विज्ञापन
सड़क निर्माण कार्य पूरा होने पर सशस्त्र सीमा बल की सभी चौकियां आपस में जुड़ जाएंगी। बताते चलें कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सुरक्षा व स्थानीय लोगों के सुविधा के मद्देनजर सड़क निर्माण के निर्देश दिए थे और निर्माण कार्य चालू शुरू हुआ था। बताते चलें कि सीमा क्षेत्र में वन क्षेत्र अधिक होने के कारण एसएसबी के जवानों को गश्त में असुविधा होती है। बारिश में नेपाल की नदियों से पानी आने के चलते क्षेत्र बाढ़ग्रस्त हो जाता है। सीमा क्षेत्र में सड़क व फ्लाईओवर बनने से निगरानी में काफी सहूलियत मिलती। लेकिन कई वर्षों से अधर में लटका निर्माण कार्य सीमा की सुरक्षा करने वाले जवानों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है।
विज्ञापन